‘हमारे पास बुरे पड़ोसी हैं’: एस जयशंकर ने पाकिस्तान को आतंकवाद पर दी कड़ी चेतावनी, बोले- ‘पानी मांगो और आतंक फैलाओ, यह मुमकिन नहीं’
‘हमारे पास बुरे पड़ोसी हैं’: एस जयशंकर ने पाकिस्तान को आतंकवाद पर दी कड़ी चेतावनी, बोले- ‘पानी मांगो और आतंक फैलाओ, यह मुमकिन नहीं’
चेन्नई: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को पाकिस्तान पर करारा हमला बोलते हुए उसे ‘बुरा पड़ोसी’ करार दिया और आतंकवाद को बढ़ावा देने पर कड़ी चेतावनी दी। आईआईटी मद्रास में छात्रों से संवाद के दौरान जयशंकर ने कहा कि भारत को आतंकवाद से अपने लोगों की रक्षा करने का पूरा अधिकार है और वह इस अधिकार का इस्तेमाल करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई बाहरी ताकत भारत को यह नहीं बता सकती कि आत्मरक्षा में क्या करना चाहिए या क्या नहीं।
जयशंकर ने कहा, “आपके पड़ोसी बुरे भी हो सकते हैं। दुर्भाग्य से, हमारे हैं। पश्चिम की ओर देखें तो पता चलता है कि अगर कोई देश जानबूझकर, लगातार और बिना पछतावे के आतंकवाद जारी रखता है, तो हमें अपने लोगों को आतंकवाद से बचाने का अधिकार है। हम उस अधिकार का इस्तेमाल करेंगे। हम उसका इस्तेमाल कैसे करेंगे, यह हम पर निर्भर है। कोई हमें नहीं बता सकता कि क्या करना चाहिए या नहीं।”
यह बयान अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के संदर्भ में आया है, जिसमें पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था। हमले में लश्कर-ए-तैयबा के प्रॉक्सी ग्रुप द रेसिस्टेंस फ्रंट की भूमिका थी। जयशंकर ने सिंधु जल समझौते (IWT) का भी जिक्र किया, जिसे भारत ने हमले के बाद निलंबित कर दिया था। उन्होंने कहा, “कई साल पहले हमने जल बंटवारे की व्यवस्था पर सहमति जताई थी, क्योंकि यह अच्छे पड़ोसी की भावना में था। लेकिन अगर दशकों तक आतंकवाद होता है, तो अच्छी पड़ोसियत नहीं रहती। आप पानी मांगो और आतंकवाद फैलाओ – यह दोनों साथ नहीं चल सकते।”
विदेश मंत्री ने भारत की पड़ोसी नीति पर भी प्रकाश डाला, कहा कि ज्यादातर पड़ोसी भारत की प्रगति को अपने विकास का अवसर मानते हैं, लेकिन आतंकवाद अच्छे रिश्तों की बुनियाद तोड़ देता है। यह बयान ऐसे समय आया जब पाकिस्तान लगातार IWT पर भारत के रुख की आलोचना कर रहा है। जयशंकर की यह टिप्पणी भारत की नई आत्मरक्षा नीति को रेखांकित करती है, जहां आतंकवाद के खिलाफ सक्रिय कार्रवाई को प्राथमिकता दी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संदेश न केवल पाकिस्तान बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी है कि भारत अब आतंकवाद पर चुप नहीं बैठेगा।
