राजनीति

यूपी बीजेपी में जातीय समीकरण पर सवाल: पंकज चौधरी की विधायक बैठक चिट्ठी ने ठाकुर-ब्राह्मण राजनीति को दी हवा?

लखनऊ, 31 दिसंबर 2025: उत्तर प्रदेश की सियासत में नए साल से पहले ही हलचल तेज हो गई है। बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने सभी विधायकों को चिट्ठी भेजकर 10 जनवरी को लखनऊ में बैठक बुलाई है। इस चिट्ठी में 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति, संगठन मजबूती और विकास कार्यों पर चर्चा का जिक्र है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे ठाकुर-ब्राह्मण समीकरण से जोड़कर देखा जा रहा है। क्या यह चिट्ठी जातीय राजनीति को हवा दे रही है? विपक्षी दल इसे बीजेपी के अंदरूनी कलह का संकेत बता रहे हैं।

चिट्ठी में क्या लिखा है?

पंकज चौधरी की चिट्ठी में विधायकों से अपील की गई है कि वे क्षेत्र की समस्याओं, विकास योजनाओं और संगठन की मजबूती पर फीडबैक दें। बैठक का एजेंडा 2027 चुनाव की तैयारी है, जहां पार्टी की एकजुटता पर जोर दिया गया है। चिट्ठी में लिखा है, “हम सब मिलकर उत्तर प्रदेश को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।” लेकिन सूत्रों का कहना है कि यह चिट्ठी हाल की घटनाओं के बाद आई है, जहां ठाकुर और ब्राह्मण विधायकों के बीच असंतोष की खबरें थीं। कुछ विधायकों ने कैबिनेट विस्तार में जातीय संतुलन की मांग की थी, जो अब तक नहीं मानी गई।

ठाकुर-ब्राह्मण राजनीति की आग क्यों भड़की?

यूपी बीजेपी में ठाकुर (राजपूत) और ब्राह्मण समुदाय के बीच तनाव पुराना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (ठाकुर) के नेतृत्व में ठाकुरों का दबदबा माना जाता है, जबकि ब्राह्मण विधायक और नेता असंतोष जता रहे हैं। हाल ही में पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य (ओबीसी) के इस्तीफे और ब्राह्मण नेता जितिन प्रसाद की नाराजगी की खबरें आई थीं। पंकज चौधरी (ब्राह्मण) की नियुक्ति को ब्राह्मणों को साधने की कोशिश माना गया था, लेकिन चिट्ठी में ठाकुर विधायकों की ज्यादा सक्रियता पर जोर देने से ठाकुर लॉबी नाराज बताई जा रही है।

एक वरिष्ठ बीजेपी नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “चिट्ठी में विकास की बात है, लेकिन असल में यह असंतोष को दबाने की कोशिश है। ठाकुर और ब्राह्मण दोनों महत्वपूर्ण हैं, लेकिन संतुलन बिगड़ रहा है।” विपक्षी सपा नेता अखिलेश यादव ने तंज कसा, “बीजेपी में जातीय कलह चरम पर है। ठाकुर-ब्राह्मण की लड़ाई से पार्टी बिखर रही है।”

बैठक का एजेंडा और संभावित असर

10 जनवरी की बैठक में कैबिनेट विस्तार, संगठन फेरबदल और लोकसभा 2024 की कमियों पर चर्चा होगी। मकर संक्रांति के बाद बड़े ऐलान की चर्चा है, जिसमें ब्राह्मण चेहरों को तरजीह मिल सकती है। लेकिन अगर जातीय राजनीति हावी हुई, तो 2027 चुनाव में बीजेपी को नुकसान हो सकता है। यूपी में ठाकुर वोटबैंक करीब 8-10% और ब्राह्मण 9-11% है, दोनों की नाराजगी महंगी पड़ सकती है।

आरएसएस और बीजेपी हाईकमान इस पर नजर रखे हुए हैं। नए साल में क्या यह चिट्ठी शांति का संदेश बनेगी या आग में घी डालेगी? सियासी पंडितों की नजरें बैठक पर टिकी हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *