अन्तर्राष्ट्रीय

रूस की हाइपरसोनिक ‘ओरेश्निक’ मिसाइल बेलारूस में तैनात: अमेरिकी रिसर्चर्स की रिपोर्ट में खुलासा, यूरोप में बढ़ी टेंशन

रूस की हाइपरसोनिक ‘ओरेश्निक’ मिसाइल बेलारूस में तैनात: अमेरिकी रिसर्चर्स की रिपोर्ट में खुलासा, यूरोप में बढ़ी टेंशन

मॉस्को/मिन्स्क, 27 दिसंबर 2025: रूस अपनी नई न्यूक्लियर-कैपेबल हाइपरसोनिक मिसाइल ‘ओरेश्निक’ को बेलारूस में तेजी से तैनात कर रहा है। अमेरिकी रिसर्चर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, सैटेलाइट इमेजेस से पूर्वी बेलारूस के क्रिचेव (Krichev) एयरबेस पर तेज निर्माण कार्य दिख रहा है, जहां मोबाइल लॉन्चर और स्ट्रैटेजिक मिसाइल बेस की सुविधाएं बनाई जा रही हैं। यह पुराना एयरबेस रूस की सीमा से करीब 4 किमी दूर है, और यहां जल्दबाजी में काम चल रहा है—अगस्त 2025 से शुरू होकर नवंबर तक रेल ट्रांसफर पॉइंट और फेंसिंग जैसी संरचनाएं बन चुकी हैं।

मिडलबरी इंस्टीट्यूट के जेफरी लुईस और CNA के डेकर इवेलेथ ने प्लैनेट लैब्स की सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण कर कहा कि वे 90% आश्वस्त हैं कि यहां ओरेश्निक के मोबाइल लॉन्चर तैनात होंगे। यह साइट मिन्स्क से 307 किमी पूर्व और मॉस्को से 478 किमी दक्षिण-पश्चिम में है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पहले ही बेलारूस में ओरेश्निक तैनात करने का ऐलान किया था, जबकि बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको ने कहा कि पहली मिसाइलें पहले ही आ चुकी हैं—कुल 10 तक हो सकती हैं।

ओरेश्निक (हेजल ट्री) मिसाइल Mach 10 (लगभग 12,000 km/h) से ज्यादा स्पीड वाली इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसकी रेंज 5,500 किमी तक बताई जाती है। यह न्यूक्लियर या कन्वेंशनल वारहेड ले जा सकती है और MIRV (मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल) से लैस है, यानी एक मिसाइल से कई टारगेट हिट कर सकती है। पुतिन दावा करते हैं कि इसे इंटरसेप्ट करना असंभव है। 2024 में इसका पहला इस्तेमाल यूक्रेन पर हुआ था।

यह तैनाती यूक्रेन युद्ध और NATO के साथ टेंशन बढ़ाने वाली है—रूस इसे पश्चिमी देशों की लंबी दूरी की मिसाइल सप्लाई का जवाब बता रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि बेलारूस में तैनाती से यूरोप पर रूस का स्ट्राइक रीच बढ़ेगा, जो न्यूक्लियर डिटरेंस का संकेत है। रूसी और बेलारूसी दूतावासों ने कमेंट से इनकार किया। क्या यह कोल्ड वॉर के बाद पहली बार रूस का न्यूक्लियर हथियार विदेश में तैनात करना है? दुनिया की नजरें अब यूरोपीय सुरक्षा पर टिकी हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *