उत्तराखंड में AI वीडियो से सियासी बवाल: हरीश रावत को ‘पाकिस्तानी जासूस’ दिखाने पर FIR, साइबर पुलिस की जांच शुरू
उत्तराखंड में AI वीडियो से सियासी बवाल: हरीश रावत को ‘पाकिस्तानी जासूस’ दिखाने पर FIR, साइबर पुलिस की जांच शुरू
देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता हरीश रावत को ‘पाकिस्तानी जासूस’ और मुस्लिम तुष्टिकरण करने वाला दिखाने वाले AI जनरेटेड वीडियो ने सियासी घमासान मचा दिया है। भाजपा के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से शेयर किए गए इस वीडियो पर हरीश रावत ने कड़ी आपत्ति जताई और नेहरू कॉलोनी थाने में FIR दर्ज कराई। पुलिस ने मामला साइबर सेल को सौंप दिया है और जांच शुरू कर दी है।
वीडियो में हरीश रावत की इमेज का इस्तेमाल कर उन्हें ‘मुस्लिम शरणम गच्छामि, मजार शरणम गच्छामि, लव जिहाद शरणम गच्छामि’ जैसे संवाद बोलते दिखाया गया है। बैकग्राउंड में मजारों और बदलते उत्तराखंड के दृश्य दिखाए गए हैं। अंत में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पुलिस और बुलडोजर के साथ नजर आते हैं। भाजपा ने इसे कांग्रेस की ‘तुष्टिकरण नीति’ का प्रतीक बताया, जबकि रावत ने इसे ‘झूठी साजिश’ और ‘सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश’ करार दिया।
रावत ने भाजपा से माफी और वीडियो हटाने की मांग की। उन्होंने समर्थकों के साथ भाजपा मुख्यालय की ओर मार्च निकाला, लेकिन पुलिस ने रोक दिया। प्रदर्शन में रावत ने कहा, “मैं पाकिस्तानी जासूस नहीं हूं। भाजपा झूठ फैला रही है।” भाजपा प्रवक्ता मनवीर चौहान ने इसे ‘ड्रामा’ बताया और कहा कि रावत तुष्टिकरण के मुद्दे से ध्यान भटका रहे हैं।
FIR आईटी एक्ट और BNS की धाराओं में दर्ज हुई है। साइबर पुलिस वीडियो के सोर्स और बनाने वालों की जांच कर रही है। रावत ने चुनाव आयोग और जिलाधिकारी से भी शिकायत की है। यह विवाद 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों पार्टियों के बीच तनाव बढ़ा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि AI का राजनीतिक दुरुपयोग लोकतंत्र के लिए खतरा है। जांच में सच सामने आने का इंतजार है।
