केदारपुरी में दिसंबर के अंत तक बर्फ का इंतजार: ‘सूखा दिसंबर’ से पर्यावरणविदों में चिंता
केदारपुरी में दिसंबर के अंत तक बर्फ का इंतजार: ‘सूखा दिसंबर’ से पर्यावरणविदों में चिंता
रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड के पवित्र केदारनाथ धाम में इस बार दिसंबर महीना बीतने को है, लेकिन सीजन की पहली अच्छी बर्फबारी अभी तक नहीं हुई। आमतौर पर दिसंबर तक केदारपुरी और आसपास की ऊंची चोटियां 5-8 फीट बर्फ से ढक जाती हैं, लेकिन इस साल धाम क्षेत्र पूरी तरह सूखा और बर्फविहीन नजर आ रहा है। पर्यावरणविदों और स्थानीय लोगों ने इसे जलवायु परिवर्तन का स्पष्ट संकेत बताते हुए गंभीर चिंता जताई है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, उच्च हिमालयी क्षेत्रों जैसे केदारनाथ, बद्रीनाथ और औली में अभी तक कोई बड़ी बर्फबारी नहीं हुई। हालांकि कुछ जगहों पर हल्की बर्फ गिरी, लेकिन वह टिक नहीं पाई। वाडिया हिमालयन इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों का कहना है कि तापमान बढ़ने और मौसमी चक्र में बदलाव से बर्फ जमने का समय नहीं मिल रहा। पिछले चार-पांच सालों में बर्फबारी का पैटर्न बदल गया है—दिसंबर-जनवरी की बर्फ अब मार्च-अप्रैल में गिर रही है, जो ग्लेशियरों के लिए घातक है।
स्थानीय लोग बताते हैं कि बर्फ न होने से धाम का नजारा बदला-बदला सा लग रहा है। झीलें तो जम रही हैं, लेकिन पहाड़ियां हरी-भरी और सूखी हैं। इससे न केवल पर्यटन प्रभावित हो रहा, बल्कि गर्मियों में पानी के स्रोतों (नदियां, झरने) पर संकट मंडरा रहा है। दुर्लभ हिमालयी जड़ी-बूटियां भी खतरे में हैं, क्योंकि बर्फ की कमी से मिट्टी का नमी संतुलन बिगड़ रहा है।
मौसम विभाग ने 29 दिसंबर से पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की उम्मीद जताई है, जिससे उच्च क्षेत्रों में बर्फबारी हो सकती है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह देरी लंबे समय में हिमालयी पारिस्थितिकी के लिए नुकसानदेह साबित होगी। क्या यह जलवायु परिवर्तन की बड़ी चेतावनी है? वैज्ञानिक कहते हैं—हां, और अब कार्रवाई का समय है।
