उत्तराखंड

उत्तराखंड में रिवर्स पलायन पर राजनीतिक बवाल: हरीश रावत का धामी सरकार पर तंज, जंगली जानवरों के आतंक का मुद्दा फिर गरमाया

उत्तराखंड में रिवर्स पलायन पर राजनीतिक बवाल: हरीश रावत का धामी सरकार पर तंज, जंगली जानवरों के आतंक का मुद्दा फिर गरमाया

देहरादून, 21 दिसंबर 2025: उत्तराखंड में रिवर्स पलायन को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। एक तरफ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ग्रामीण विकास एवं पलायन निवारण आयोग की बैठक में रिवर्स पलायन को बढ़ावा देने के बड़े ऐलान कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने धामी सरकार पर तीखा हमला बोला है। रावत ने कहा कि सरकार रिवर्स पलायन की बात तो खूब कर रही है, लेकिन पहले जंगली जानवरों के आतंक से लोगों को निजात दिलाओ, नहीं तो लोग गांव लौटने की बजाय और भागेंगे।

धामी सरकार के प्रयास: शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास में हुई आयोग की 10वीं बैठक में सीएम धामी ने कहा कि पलायन राज्य की बड़ी चुनौती रही है, लेकिन पिछले चार-पांच सालों में रिवर्स पलायन के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। सरकार का दावा है कि अब तक 6282 प्रवासी गांव लौट चुके हैं। धामी ने हर जिले में ‘प्रवासी पंचायतें’ आयोजित करने के निर्देश दिए, जहां देश-विदेश में बसे उत्तराखंडियों को आमंत्रित कर सरकार की योजनाओं की जानकारी दी जाएगी और उनके सुझाव लिए जाएंगे। ग्रामीण आजीविका बढ़ाने के लिए स्वरोजगार योजनाओं पर जोर दिया गया।

हरीश रावत का पलटवार: पूर्व सीएम हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर धामी सरकार को घेरा। उन्होंने लिखा, “उत्तराखंड वासियों को उनकी जमीन दे दो, वो आसमान लेकर क्या करेंगे?” रावत ने जंगली जानवरों—गुलदार, भालू, हाथी, बंदर, सुअर आदि—के हमलों और फसलों को नुकसान का जिक्र करते हुए कहा कि ये जानवर गांवों से लेकर शहरों तक आतंक मचा रहे हैं। पहले वर्तमान पलायन रोको, फिर रिवर्स पलायन की बात करो। रावत का कहना है कि संभावनाएं नष्ट हो रही हैं, ऐसे में लोग गांव कैसे लौटेंगे?

जंगली जानवरों का बढ़ता आतंक: राज्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष चरम पर है। 2025 में अब तक गुलदार, भालू और तेंदुए के हमलों में 35 लोगों की मौत और 193 घायल होने की खबरें हैं। पिछले 25 सालों में 900 से ज्यादा मौतें हुई हैं। इसी सप्ताह सीएम धामी ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से फोन पर बात कर मदद मांगी। सरकार ने सोलर फेंसिंग, सेंसर अलर्ट सिस्टम, हर जिले में वन्यजीव नसबंदी केंद्र और रिहैब सेंटर बनाने का ऐलान किया है। रेंजरों को ज्यादा अधिकार देने और 5 करोड़ अतिरिक्त बजट का प्रावधान भी किया गया।

घोस्ट विलेज की समस्या: मूलभूत सुविधाओं के अभाव और अब जंगली जानवरों के डर से कई गांव भूतहा बन चुके हैं। लोग सिर्फ त्योहारों पर आते हैं। सरकार रोजगार योजनाओं से रिवर्स पलायन को प्रोत्साहित कर रही है, लेकिन विपक्ष का कहना है कि बिना सुरक्षा के यह सपना अधूरा रहेगा।

यह मुद्दा आने वाले दिनों में और गरमाएगा, क्योंकि पहाड़ों में सुरक्षा और रोजगार दोनों ही लोगों की प्राथमिकता हैं।

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