नक्सलियों को झटका: 33 लाख के इनामी खूंखार दंपति ने किया सरेंडर, ताड़मेटला कांड में 76 जवानों की शहादत के मास्टरमाइंड
नक्सलियों को झटका: 33 लाख के इनामी खूंखार दंपति ने किया सरेंडर, ताड़मेटला कांड में 76 जवानों की शहादत के मास्टरमाइंड
छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों को आज एक ऐतिहासिक सफलता हाथ लगी। दरभा डिवीजन के शीर्ष माओवादी कमांडर जयलाल उर्फ दिरदो विज्जा (25 लाख इनामी) और उनकी पत्नी माड़वी गंगी उर्फ विमला (8 लाख इनामी) ने आंध्र प्रदेश के सीमावर्ती इलाके अल्लूरी सीताराम राजू जिले में आत्मसमर्पण कर दिया। दोनों पर कुल 33 लाख रुपये का इनाम घोषित था। ये दंपति 20 वर्षों से सक्रिय थे और कई बड़े नक्सली हमलों के मास्टरमाइंड रहे, जिनमें 2010 के ताड़मेटला चिंतागुफा हमले में 76 सीआरपीएफ जवानों की शहादत शामिल है।
आंध्र प्रदेश पुलिस के विशेष कमांडो बटालियन (ग्रेहाउंड्स) ने सरेंडर प्रक्रिया को अंजाम दिया। एसपी वी. सुर्यनारायण ने बताया, “दंपति ने छत्तीसगढ़ पुलिस की आत्मसमर्पण नीति-2019 और विकास योजनाओं से प्रभावित होकर हथियार डाले। जयलाल ने माओवादी संगठन के अंदरूनी कलह और महिलाओं पर अत्याचार का हवाला देते हुए मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।” विमला ने LOS (लोकल ऑर्गनाइजेशन स्क्वॉड), ACS (एरिया कमेटी सेक्रेटरी) से लेकर मलंगेर एरिया कमेटी इंचार्ज तक का सफर तय किया था। वह मूल रूप से सुकमा जिले के फूलबगड़ी की निवासी हैं।
जयलाल का नाम देश के सबसे खूंखार नक्सली हमलों से जुड़ा है। 2010 में सुकमा के ताड़मेटला में नक्सलियों ने सीआरपीएफ कैंप पर हमला कर 76 जवानों को शहीद कर दिया था। जयलाल इस हमले का प्लानर था। इसी तरह, 2013 के झीरम घाटी हमले में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर फायरिंग कर कई नेताओं की हत्या की साजिश में उसकी भूमिका थी। इसके अलावा, 2020 के मिनपा हमले (17 जवान शहीद), 2021 के टेकलगुडेम मुठभेड़ (22 जवान शहीद), 2024 के टेकलगुड़ा और धर्माराम कैंप अटैक में भी ये दंपति शामिल रहे। इन घटनाओं में कुल 150 से अधिक सुरक्षाकर्मियों की शहादत हुई।
सरेंडर के बाद दंपति को आंध्र प्रदेश से छत्तीसगढ़ लाया गया, जहां सुकमा पुलिस ने पूछताछ शुरू कर दी। डीजीपी अशोक जुनेदे ने कहा, “यह नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान ‘प्रहार’ का नतीजा है। हम सरेंडरियों को पुनर्वास योजना के तहत 2.5 लाख रुपये की सहायता, प्रशिक्षण और रोजगार देंगे।” मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ट्वीट कर इसे ‘नक्सल उन्मूलन की दिशा में बड़ा कदम’ बताया। विपक्षी नेता ने कहा कि सरेंडर नीति की सफलता से 2026 तक छत्तीसगढ़ नक्सल मुक्त हो सकता है।
यह घटना बस्तर क्षेत्र में नक्सलियों के मनोबल को तोड़ने वाली है। पिछले 20 महीनों में दंतेवाड़ा, सुकमा और नारायणपुर में 500 से अधिक नक्सली सरेंडर कर चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि संगठन के अंदरूनी झगड़े और विकास कार्यों ने नक्सलियों को मजबूर किया। अब सवाल है कि क्या ये सरेंडर नक्सलवाद के अंत की शुरुआत हैं? फैंस और परिवारों के लिए न्याय की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
