समुद्री तेल व्यापार पर पुतिन के खिलाफ EU-G7 की नई चोट: शिपिंग सर्विसेज पर पूर्ण प्रतिबंध की तैयारी, रूस का तेल रास्ता हो सकता है ब्लॉक!
समुद्री तेल व्यापार पर पुतिन के खिलाफ EU-G7 की नई चोट: शिपिंग सर्विसेज पर पूर्ण प्रतिबंध की तैयारी, रूस का तेल रास्ता हो सकता है ब्लॉक!
नई दिल्ली। यूरोपीय संघ (EU) और जी7 देश रूसी तेल निर्यात को झटका देने के लिए नया हथियार उठाने की तैयारी में हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ आर-पार की जंग में ये देश मौजूदा प्राइस कैप को खत्म कर रूसी तेल के लिए पश्चिमी समुद्री सेवाओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहे हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम यूक्रेन युद्ध के लिए रूस की तेल राजस्व को चोट पहुंचाने का सबसे सख्त उपाय होगा, जो 2026 की शुरुआत में EU के 20वें सैंक्शंस पैकेज का हिस्सा हो सकता है।
छह सूत्रों के हवाले से रॉयटर्स ने बताया कि यह पहल ब्रिटेन और अमेरिका की ओर से आ रही है, जो जी7 की तकनीकी बैठकों में जोर दे रहे हैं। 2022 से लागू $60 प्रति बैरल का प्राइस कैप अप्रभावी साबित हो चुका है, क्योंकि रूस ने अपना ‘शैडो फ्लीट’ (गुप्त टैंकर बेड़ा) बढ़ाकर एशिया की ओर तेल रूट डायवर्ट कर दिया। अक्टूबर 2025 में रूस ने 44% तेल इसी फ्लीट से निर्यात किया, जैसा कि फिनलैंड के सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर के विश्लेषण से पता चला। EU के 27 देशों के फ्लीट, खासकर ग्रीस, साइप्रस और माल्टा के जहाज, अभी भी रूसी तेल का बड़ा हिस्सा ढो रहे हैं। नया प्रतिबंध इन्हें पूरी तरह रोक देगा।
ट्रंप प्रशासन प्राइस कैप को लेकर संशयपूर्ण रहा है और सितंबर 2025 में इसे $47.6 प्रति बैरल घटाने के EU-कनाडा-ब्रिटेन के प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया। लेकिन अब समुद्री सेवाओं पर बैन को लेकर चर्चा तेज है, जिसमें बीमा, फ्लैग रजिस्ट्रेशन और पोर्ट सर्विसेज शामिल होंगी। लॉयड्स लिस्ट इंटेलिजेंस के अनुसार, रूस, ईरान और वेनेजुएला के सैंक्शन वाले तेल से जुड़े कुल 1,423 टैंकरों में से 921 पहले से ही US-UK-EU सैंक्शंस के दायरे में हैं। EU चाहता है कि यह बैन जी7 के साथ समन्वय में लागू हो, ताकि रूस का शैडो फ्लीट और महंगा पड़े।
रूस की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आ सकती है। पुतिन ने हाल ही में भारत के साथ ऊर्जा सहयोग को मजबूत बताया, जहां तेल निर्यात बढ़ा है। लेकिन अगर यह बैन लगा, तो रूस को अपना फ्लीट और विस्तार करना पड़ेगा, जो महंगा और जटिल होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे रूसी अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा, क्योंकि तेल राजस्व युद्ध मशीनरी का मुख्य स्रोत है। यूक्रेन युद्ध के तीन साल बाद यह कदम पुतिन की कमर तोड़ सकता है, लेकिन वैश्विक तेल कीमतों पर असर डाल सकता है।
EU के अधिकारियों ने कहा कि यह उपाय आयात पर पूर्ण प्रतिबंध के सबसे करीब होगा। फिलहाल, चर्चाएं जारी हैं और जल्द फैसला अपेक्षित है। रूस ने इसे ‘आर्थिक युद्ध’ करार दिया हो सकता है, लेकिन EU-G7 का मूड साफ है – पुतिन का तेल साम्राज्य अब रुक-रुकावट का शिकार बनेगा।
