दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का कहर: AQI गंभीर स्तर पर पहुंचा, स्वास्थ्य आपातकाल जैसी स्थिति
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का कहर: AQI गंभीर स्तर पर पहुंचा, स्वास्थ्य आपातकाल जैसी स्थिति
दिल्ली-एनसीआर में सर्दी की दस्तक के साथ ही वायु प्रदूषण ने फिर से विकराल रूप धारण कर लिया है। सोमवार को वीकेंड के बाद हल्की राहत मिली थी, लेकिन मंगलवार सुबह तक एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच गया। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के अनुसार, दिल्ली का औसत AQI 349 दर्ज किया गया, जो ‘हैजर्डस’ (खतरनाक) स्तर को दर्शाता है। कुछ इलाकों जैसे डिफेंस कॉलोनी में यह 664 तक पहुंचा, जबकि गाजियाबाद (416), नोएडा (323) और ग्रेटर नोएडा (240) में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। पीएम2.5 का स्तर 263 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और पीएम10 का 343 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर मापा गया, जो सुरक्षित सीमा (60 और 100) से कई गुना अधिक है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह उछाल ठंडी हवाओं, कम हवा की गति और पड़ोसी राज्यों से आने वाले प्रदूषित हवाओं का नतीजा है। पराली जलाने का मौसम भले ही बीत चुका हो, लेकिन वाहनों से निकलने वाले धुएं, निर्माण कार्य और औद्योगिक उत्सर्जन मुख्य दोषी बने हुए हैं। IITM की रिपोर्ट के मुताबिक, वेंटिलेशन इंडेक्स 2400 वर्ग मीटर प्रति सेकंड तक गिर गया, जो प्रदूषकों के फैलाव के लिए प्रतिकूल है। दिसंबर में मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, 2-3 दिसंबर तक मॉडरेट श्रेणी की उम्मीद है, लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर हवा की दिशा नहीं बदली तो स्थिति और बिगड़ सकती है।
स्वास्थ्य पर असर गंभीर है। AQI 300 से ऊपर होने पर सभी लोगों को सांस लेने में तकलीफ, खांसी, सिरदर्द और फेफड़ों की समस्याएं हो सकती हैं। संवेदनशील समूह—बच्चे, बुजुर्ग और अस्थमा रोगी—के लिए यह आपातकाल जैसा है। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि आउटडोर एक्टिविटी बंद रखें, मास्क पहनें और एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें। अस्पतालों में श्वसन रोगों के केस 30 प्रतिशत बढ़ चुके हैं।
सरकार ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तहत सख्त कदम उठाए हैं। स्टेज-3 लागू होने से निर्माण कार्य 50 प्रतिशत सीमित हो गए, पुराने वाहनों पर प्रतिबंध लगा दिया गया और 11 बजे के बाद ट्रक प्रवेश बंद है। कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने पड़ोसी राज्यों को निर्देश दिए हैं कि वे सीमा पर चेकपॉइंट सख्त करें। हालांकि, विपक्ष ने इसे अपर्याप्त बताते हुए केंद्रीय हस्तक्षेप की मांग की है। 2025 में जनवरी-नवंबर तक केवल 3 ‘गंभीर’ दिन दर्ज हुए थे, जो 8 साल का सर्वश्रेष्ठ रिकॉर्ड है, लेकिन दिसंबर की शुरुआत ने सबको चौंका दिया।
सोशल मीडिया पर जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। एक यूजर ने लिखा, “400+ AQI को प्रदूषण नहीं, लापरवाही कहते हैं। हम जहर सांस ले रहे हैं!” वहीं, मुंबई की तुलना में दिल्ली की स्थिति पर बहस छिड़ गई है, जहां AQI 200 पर भी सख्ती ज्यादा है। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय के उपाय जैसे इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा और ग्रीन जोन विकसित करना जरूरी है। फिलहाल, दिल्लीवासी घरों में कैद हैं, उम्मीद करते हुए कि हवा जल्द साफ हो।
