समंदर से तबाही… चक्रवात दित्वाह: श्रीलंका की तबाही से दुनिया क्यों सिहर उठी?
समंदर से तबाही… चक्रवात दित्वाह: श्रीलंका की तबाही से दुनिया क्यों सिहर उठी?
बंगाल की खाड़ी में जन्मा चक्रवात दित्वाह (Cyclone Ditwah) अब सिर्फ एक तूफान नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया की सबसे विनाशकारी आपदाओं में शुमार हो चुका है। 26 नवंबर को श्रीलंका के दक्षिण-पूर्वी तट से शुरू हुआ यह तूफान, 28 नवंबर को पूरे द्वीप पर कहर बनकर टूट पड़ा। यमन द्वारा नामित ‘दित्वाह’ (सोकोत्रा द्वीप की डेटवाह लैगून के नाम पर) ने भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलनों का ऐसा तांडव रचा कि श्रीलंका के 25 जिलों में लाखों लोग प्रभावित हो गए। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, 410 से अधिक मौतें हो चुकी हैं, जबकि 336-400 लोग लापता हैं। यह 2000 के दशक के बाद श्रीलंका की सबसे भयानक बाढ़ आपदा है।
श्रीलंका के चाय बागानों वाले पहाड़ी इलाकों—जैसे उवा और सेंट्रल प्रांत—सबसे ज्यादा प्रभावित हुए, जहां भूस्खलन ने पूरी गांवों को मिट्टी में दफना दिया। राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने इसे ‘श्रीलंका की सबसे बड़ी प्राकृतिक चुनौती’ करार दिया और अंतरराष्ट्रीय सहायता की अपील की। लगभग 10 लाख लोग बेघर हो चुके हैं, 20,000 घर पूरी तरह तबाह। बुनियादी ढांचा चरमरा गया—सड़कें, पुल और बिजली लाइनें ध्वस्त। सेना के नेतृत्व में बचाव कार्य जारी हैं, लेकिन कई इलाकों में पहुंच अभी भी मुश्किल। सोशल मीडिया पर पीड़ितों की आपबीती छलक रही हैं: “हम सब डर गए थे, सब कुछ मिट्टी में मिल गया।” एक यूजर ने लिखा।
भारत भी दित्वाह के निशाने पर है। तूफान के अवशेष एक डीप डिप्रेशन बनकर चेन्नई तट के पास अटक गए हैं, जहां 26 सेंटीमीटर से अधिक बारिश दर्ज हो चुकी। इंडियन मीटियोरोलॉजिकल डिपार्टमेंट (IMD) ने चेन्नई, तिरुवल्लुर, कांचीपुरम और चेंगलपट्टू में रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया। 40-60 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चल रही हैं, जिससे जलभराव और बाढ़ की स्थिति बनी हुई। तमिलनाडु में 3 मौतें और 149 पशुओं की जान जा चुकी। स्कूल-कॉलेज बंद, 83 उड़ानें रद्द। IMD के अनुसार, डिप्रेशन दक्षिण-पश्चिम दिशा में बढ़ रहा, लेकिन 2 दिसंबर शाम तक कमजोर हो सकता है।
दुनिया को चिंता क्यों? दित्वाह जलवायु परिवर्तन का चेहरा है। गर्म समुद्री सतहों (SST) और कम विंड शीयर ने इसे तेजी से विकसित किया, जो वैश्विक तापमान वृद्धि का नतीजा है। श्रीलंका जैसे द्वीप राष्ट्र पहले से ही समुद्र स्तर बढ़ने से जूझ रहे हैं; यह तूफान उनके लिए ‘नई सामान्य’ का संकेत। आर्थिक नुकसान: अरबों डॉलर, जिसमें चाय निर्यात प्रभावित। भारत ने ‘ऑपरेशन सागर बंधु’ के तहत C-130J विमान, Mi-17 हेलीकॉप्टर और राहत सामग्री भेजी, लेकिन पाकिस्तान की सहायता उड़ान को एयरस्पेस क्लियरेंस में देरी से विवाद छिड़ गया।
विशेषज्ञ चेताते हैं: 2025 का चौथा चक्रवात होने से साफ है कि हिंद महासागर में तूफानों की तीव्रता बढ़ रही। बिना वैश्विक सहयोग—जैसे ग्रीन एनर्जी और बेहतर पूर्व चेतावनी—ऐसी तबाहियां बार-बार आएंगी। फिलहाल, श्रीलंका ‘शुरू से पुनर्निर्माण’ की जद्दोजहद में है। दुनिया को यह सबक लेना होगा: प्रकृति की चेतावनी को अनदेखा मत करो।
