रावलपिंडी से इस्लामाबाद तक उफान: इमरान समर्थकों का ‘आजादी’ मार्च, सेना परेशान
रावलपिंडी से इस्लामाबाद तक उफान: इमरान समर्थकों का ‘आजादी’ मार्च, सेना परेशान
पाकिस्तान में राजनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के समर्थकों ने रावलपिंडी से इस्लामाबाद तक भारी प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के कार्यकर्ता ‘आजादी’ (आजादी) के नारे लगाते हुए अदियाला जेल के बाहर जमा हो गए, जहां इमरान खान अगस्त 2023 से कैद हैं। स्वास्थ्य संबंधी अफवाहों और जेल प्रशासन द्वारा मुलाकात पर रोक के खिलाफ यह आंदोलन तेज हो गया है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगाया, जबकि सुरक्षा बलों ने आंसू गैस और बैरिकेड्स का सहारा लिया।
पीटीआई नेता असद कायसर ने कहा, “आइसलामाबाद हाई कोर्ट (आईएचसी) ने इमरान को परिवार और वकीलों से मिलने का आदेश दिया था, लेकिन जेल प्रशासन ने इसे नजरअंदाज कर दिया। हम शांतिपूर्ण विरोध कर रहे हैं, लेकिन सरकार की दमनकारी नीतियां असहनीय हैं।” सोमवार को आईएचसी के बाहर सांसदों ने विरोध दर्ज किया, जो मंगलवार को अदियाला जेल तक पहुंचा। खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने घोषणा की कि पेशावर-इस्लामाबाद मोटरवे पर रैली निकाली जाएगी। इमरान के बेटों ने चेतावनी दी कि “कुछ अपरिवर्तनीय छिपाया जा रहा है”, जबकि सोशल मीडिया पर मौत की अफवाहें वायरल हैं। एक सीनेटर ने कहा, “इमरान जिंदा हैं, उनकी फोटो ही पाकिस्तान बदल सकती है।”
सरकार ने कड़ा रुख अपनाया। रावलपिंडी में 1-3 दिसंबर के लिए सेक्शन 144 लागू कर दिया गया, जो पांच या इससे अधिक लोगों की सभाओं, जुलूसों और हथियारों पर प्रतिबंध लगाता है। इस्लामाबाद में नवंबर 18 से दो महीने का प्रतिबंध है, जिसमें रेड जोन शामिल है। डिप्टी कमिश्नर हसन वकार चीमा ने कहा, “सार्वजनिक शांति के लिए जरूरी कदम।” सड़कें सील, सेना तैनात, और शूट-एट-साइट ऑर्डर जारी। क्वेट्टा में भी सार्वजनिक सभा हो रही है, लेकिन सुरक्षा बल हाई अलर्ट पर हैं। रावलपिंडी, पाकिस्तानी सेना का गढ़ होने से स्थिति संवेदनशील है।
प्रदर्शन में महिलाएं और इमरान की बहनें भी शामिल हुईं। एक कार्यकर्ता ने चिल्लाया, “आजादी… इमरान को रिहा करो!” पुलिस ने पथराव का जवाब आंसू गैस से दिया, कई घायल। पीटीआई का दावा है कि यह ‘शांतिपूर्ण आजादी मार्च’ है, लेकिन विपक्षी नेता इसे ‘लोकतंत्र की लड़ाई’ बता रहे हैं। शहबाज शरीफ सरकार पर दबाव बढ़ रहा है, जबकि आर्मी चीफ आसिम मुनीर की ताकत पर सवाल उठे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह आंदोलन 2024 चुनावों की याद दिलाता है, जब पीटीआई समर्थकों ने बड़े पैमाने पर विरोध किया था।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ी है। भारत ने सीमा पर सतर्कता बरती, जबकि संयुक्त राष्ट्र ने मानवाधिकारों की जांच की मांग की। सोशल मीडिया पर #FreeImranKhan ट्रेंड कर रहा है। पीटीआई ने कहा, “हम पीछे नहीं हटेंगे।” फिलहाल, रावलपिंडी-इस्लामाबाद मार्ग पर तनाव बरकरार है, और आने वाले दिनों में हिंसा की आशंका से पूरा पाकिस्तान सांस थामे है।
