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छत्तीसगढ़: नक्सलवाद को बड़ा झटका – दंतेवाड़ा में 65 लाख के इनामी 37 नक्सलियों ने डाले हथियार, 26 जवानों की शहादत के जिम्मेदार भीमा भी सरेंडर!

छत्तीसगढ़: नक्सलवाद को बड़ा झटका – दंतेवाड़ा में 65 लाख के इनामी 37 नक्सलियों ने डाले हथियार, 26 जवानों की शहादत के जिम्मेदार भीमा भी सरेंडर!

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले में शनिवार को एक ऐतिहासिक घटना घटी, जब 37 कुख्यात नक्सलियों ने सुरक्षा बलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इनमें 12 महिलाएं शामिल हैं, और 27 नक्सलियों पर कुल 65 लाख रुपये का इनाम घोषित था। सबसे चौंकाने वाली बात – 2020 के मिनपा नक्सली हमले का मास्टरमाइंड भीमा उर्फ जहाज कलमू ने भी हथियार डाल दिए, जिसमें 26 जवान शहीद हुए थे। यह सरेंडर ‘पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन’ योजना का परिणाम है, जो नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित कर रही है।

दंतेवाड़ा जिले के डीआरजी (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) कार्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में यह सरेंडर हुआ। पुलिस अधीक्षक गौरव राय ने बताया, “ये नक्सली भैरमगढ़ एरिया कमेटी, इंद्रावती एरिया कमेटी और माड़ इलाके से ताल्लुक रखते हैं। इनमें कई कुख्यात नाम शामिल हैं, जैसे कुमाली उर्फ अनीता मंडावी, गीता उर्फ लक्ष्मी मड़कम, रंजन उर्फ सोमा मंडावी और भीमा उर्फ जहाज कलमू – सभी पर 8-8 लाख रुपये का इनाम था।” भीमा पर 8 लाख का इनाम था, और वह मिनपा हमले के अलावा कई अन्य घटनाओं में शामिल रहा। एक अन्य नक्सली पर 5 लाख का इनाम था।

राय ने कहा, “सरेंडर करने वाले नक्सलियों ने बताया कि संगठन में लगातार दबाव, हिंसा की मजबूरी और परिवार से दूरी ने उन्हें यह कदम उठाने पर मजबूर किया। सरकार की पुनर्वास नीति ने उन्हें नई जिंदगी का मौका दिया।” सरेंडर करने वालों का स्वागत पुलिस उपमहानिरीक्षक दंतेवाड़ा रेंज कमलोचन कश्यप, डीआईजी (सीआरपीएफ) राकेश चौधरी, सीआरपीएफ की 111वीं, 230वीं और 80वीं बटालियन के कमांडेंटों ने किया। डीआरजी बस्तर फाइटर्स, विशेष आसूचना शाखा और आरएफटी की टीमों ने ग्राउंड इंटेलिजेंस के जरिए इन्हें तैयार किया।

यह घटना नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे ‘लोन वर्राटू’ अभियान की सफलता का प्रतीक है। पिछले 20 महीनों में दंतेवाड़ा में ही 165 इनामी सहित 508 नक्सली सरेंडर कर चुके हैं। पूरे छत्तीसगढ़ में पिछले 23 महीनों में 2,200 से ज्यादा नक्सलियों ने हथियार डाले हैं, जिनमें कई टॉप कैडर शामिल हैं। केंद्र सरकार ने मार्च 2026 तक नक्सलवाद उखाड़ फेंकने का लक्ष्य रखा है, और यह सरेंडर उस दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहा है।

सरेंडर करने वालों को सरकारी पुनर्वास योजना के तहत प्रशिक्षण, रोजगार और वित्तीय सहायता दी जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह लहर संगठन की रीढ़ तोड़ रही है, खासकर महिलाओं और युवा कैडरों में। क्या यह शांति की नई शुरुआत है? बस्तर के लोग उम्मीद बांधे हुए हैं।

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