उत्तराखंड

चमोली में फिर हिली धरती: 3.7 तीव्रता का भूकंप, गोपेश्वर-जोशीमठ के बीच केंद्र

चमोली में फिर हिली धरती: 3.7 तीव्रता का भूकंप, गोपेश्वर-जोशीमठ के बीच केंद्र

उत्तराखंड के सीमांत जिले चमोली में रविवार सुबह 10:27 बजे भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, रिक्टर स्केल पर तीव्रता 3.7 मापी गई, जबकि गहराई सिर्फ 5 किलोमीटर थी। भूकंप का केंद्र गोपेश्वर और जोशीमठ के बीच लतामणी क्षेत्र में था। झटके चमोली के अलावा पिंडर घाटी, नंदाकिनी घाटी, बद्रीनाथ, हेमकुंड साहिब और नीती-माना वैली में भी महसूस किए गए। राहत की बात यह रही कि किसी तरह के जान-माल के नुकसान की कोई सूचना नहीं है।

पिछले एक महीने में यह चमोली का तीसरा भूकंप है। 12 अक्टूबर को भी 3.9 और 28 अक्टूबर को 3.4 तीव्रता के झटके आए थे। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदकिशोर जोशी ने कहा, “सभी थानों से रिपोर्ट ली गई है। कहीं से कोई नुकसान नहीं हुआ है। फिर भी हाई अल्टीट्यूड इलाकों में सतर्कता बरती जा रही है।”

उत्तराखंड क्यों है भूकंप की हॉटस्पॉट?

उत्तराखंड पूरा का पूरा क्षेत्र सिस्मिक जोन-5 और जोन-4 में आता है – भारत में सबसे ज्यादा खतरे वाला जोन। हिमालयी बेल्ट में इंडियन टेक्टोनिक प्लेट और यूरेशियन प्लेट के बीच लगातार घर्षण हो रहा है। इंडियन प्लेट हर साल करीब 2 सेमी उत्तर की ओर खिसक रही है, जबकि यूरेशियन प्लेट दक्षिण की ओर दबाव डाल रही है। इस टकराव से भूगर्भ में जबरदस्त ऊर्जा जमा होती है, जो चट्टानों के टूटने पर अचानक बाहर निकलती है – यही भूकंप है।

वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. कलाचंद सैन ने बताया, “चमोली-जोशीमठ क्षेत्र मेन सेंट्रल थ्रस्ट (MCT) और अलकनंदा फॉल्ट के ठीक ऊपर है। यही वजह है कि यहां हर महीने छोटे-बड़े झटके आते रहते हैं।” उन्होंने चेतावनी दी कि 7+ तीव्रता का बड़ा भूकंप भी कभी भी आ सकता है, क्योंकि इस क्षेत्र में 500 साल से ज्यादा समय से बड़ा भूकंप नहीं आया है।

क्या करें, क्या न करें?

भूकंप आने पर तुरंत खुले मैदान में जाएं

ऊंची इमारतों, बिजली के खंभों और नदी किनारों से दूर रहें

घर में हो तो मजबूत टेबल के नीचे छिपें

गैस सिलेंडर तुरंत बंद करें

चमोली में पिछले 4 सालों में 200 से ज्यादा बार भूकंप के झटके आ चुके हैं। जोशीमठ भूस्खलन के बाद से यह इलाका और भी संवेदनशील हो गया है। विशेषज्ञ बार-बार कह रहे हैं – “छोटे झटके चेतावनी हैं, बड़े भूकंप की तैयारी अभी से शुरू कर दें।”

 

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