सावधान: ‘सुपर अल नीनो’ की दस्तक, 30 साल बाद फिर दुनिया पर मंडरा रहा है भीषण गर्मी और सूखे का खतरा
सावधान: ‘सुपर अल नीनो’ की दस्तक, 30 साल बाद फिर दुनिया पर मंडरा रहा है भीषण गर्मी और सूखे का खतरा
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली सहित उत्तर भारत के कई राज्यों में मई की शुरुआत भले ही हल्की बारिश से हुई हो, लेकिन सूरज के तेवर अभी से तीखे होने लगे हैं। मौसम विशेषज्ञों ने चेतावनी जारी की है कि इस साल के अंत तक दुनिया ‘सुपर अल नीनो’ के एक अत्यंत शक्तिशाली पैटर्न का सामना कर सकती है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह पिछले तीन दशकों के सबसे विनाशकारी मौसम पैटर्न में से एक हो सकता है।
क्या है ‘सुपर अल नीनो’ और यह क्यों है खतरनाक?
सुपर अल नीनो तब सक्रिय होता है जब मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 2°C या उससे अधिक बढ़ जाता है। यह एक दुर्लभ जलवायु घटना है जो कई दशकों में एक बार घटित होती है।
इतिहास: इससे पहले 1982-83, 1997-98 और 2015-16 में सुपर अल नीनो ने तबाही मचाई थी।
2026 की चुनौती: विशेषज्ञों के अनुसार, 2026 में इसके दोबारा लौटने की प्रबल संभावना है। इस दौरान समुद्र के ऊपर चलने वाली व्यापारिक हवाएं कमजोर हो जाती हैं, जिससे गर्म पानी पूरे प्रशांत क्षेत्र में फैल जाता है और वैश्विक जलवायु को अस्त-व्यस्त कर देता है।
वैश्विक एजेंसियों का अलर्ट: 60% संभावना
राष्ट्रीय समुद्री और वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA) और संयुक्त राष्ट्र की मौसम एजेंसी (WMO) ने साझा अलर्ट जारी किया है:
मई से जुलाई के बीच अल नीनो बनने की संभावना 60% तक है।
शुरुआती संकेत बताते हैं कि यह घटना ‘सुपर’ स्तर की हो सकती है, जिसका सबसे भयावह असर एशियाई देशों, विशेषकर भारत पर पड़ेगा।
भारत पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, सुपर अल नीनो भारत की अर्थव्यवस्था और कृषि के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है:
कमजोर मॉनसून और सूखा: इसके प्रभाव से मॉनसून कमजोर पड़ जाता है, जिससे बारिश में भारी कमी आती है और देश के कई हिस्सों में भीषण सूखे की स्थिति बन सकती है।
कृषि और महंगाई: कम बारिश के कारण फसलों की पैदावार प्रभावित होगी, जिससे खाद्य पदार्थों की कीमतों में उछाल और महंगाई बढ़ने का खतरा है।
भीषण लू (Heatwave): मई के दौरान गुजरात, महाराष्ट्र, पूर्वी तटीय राज्यों और हिमालय के तराई क्षेत्रों में सामान्य से कहीं अधिक दिनों तक लू चलने का अनुमान है।
राहत की एक किरण: मॉनसून का जल्द आगमन
हालाँकि सुपर अल नीनो का खतरा मंडरा रहा है, लेकिन आईएमडी (IMD) ने एक राहत भरी खबर भी दी है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में दक्षिण-पश्चिमी मॉनसून का आगमन 14-16 मई के आसपास होने की उम्मीद है। आईएमडी प्रमुख मृत्युंजय महापात्र के अनुसार, मई में देश के कई हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक रहेगा, लेकिन उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में तापमान सामान्य के आसपास बना रह सकता है।
विशेषज्ञों की सलाह: आने वाले समय में जल संरक्षण और कृषि प्रबंधन की बेहतर रणनीति अपनाना जरूरी है, क्योंकि ‘सुपर अल नीनो’ के कारण होने वाली गर्मी और पानी की कमी सीधे तौर पर आम जनजीवन को प्रभावित करेगी।
