Thursday, September 10, 2026
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8 साल बाद राष्ट्रीय होगा ‘आयुष्मान भारत’: पश्चिम बंगाल में जल्द लागू होगी केंद्र की बड़ी स्वास्थ्य योजना

8 साल बाद राष्ट्रीय होगा ‘आयुष्मान भारत’: पश्चिम बंगाल में जल्द लागू होगी केंद्र की बड़ी स्वास्थ्य योजना

​कोलकाता/नई दिल्ली: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य योजना ‘आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ (AB-PMJAY) को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। लगभग 8 वर्षों के लंबे इंतजार और केंद्र-राज्य के बीच चली खींचतान के बाद, अब यह योजना पश्चिम बंगाल में भी पूरी तरह लागू होने के लिए तैयार है।

​इस निर्णय के साथ ही आयुष्मान भारत योजना अब वास्तविक अर्थों में ‘राष्ट्रीय’ स्वरूप ले लेगी, क्योंकि पश्चिम बंगाल उन चुनिंदा राज्यों में से था जहाँ इसे अब तक लागू नहीं किया गया था।

​मुख्य बिंदु: क्यों बदला फैसला?

​स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार: राज्य के करोड़ों निवासियों को अब देश भर के किसी भी सूचीबद्ध अस्पताल में 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिल सकेगा।

​सहमति का आधार: सूत्रों के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकार के बीच योजना के नाम और ब्रांडिंग को लेकर चल रहा विवाद सुलझने की कगार पर है। संभवतः इसे राज्य की अपनी योजना ‘स्वास्थ्य साथी’ के साथ एकीकृत (Converged) किया जा सकता है।

​मरीजों को लाभ: बंगाल के जो लोग काम के सिलसिले में दूसरे राज्यों में रहते हैं, उन्हें अब पोर्टेबिलिटी सुविधा के कारण बाहर भी इलाज कराने में आसानी होगी।

​क्या है आयुष्मान भारत योजना?

​आयुष्मान भारत दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी वित्त पोषित स्वास्थ्य आश्वासन योजना है। इसके तहत प्रत्येक पात्र परिवार को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य कवर प्रदान किया जाता है। यह मुख्य रूप से माध्यमिक (Secondary) और तृतीयक (Tertiary) देखभाल के लिए अस्पताल में भर्ती होने के खर्च को कवर करती है।

​बंगाल में अब तक की स्थिति

​पश्चिम बंगाल सरकार ने 2019 में इस योजना से खुद को अलग कर लिया था और अपनी खुद की योजना ‘स्वास्थ्य साथी’ पर ध्यान केंद्रित किया था। राज्य का तर्क था कि केंद्र की योजना में राज्य को 40% खर्च वहन करना पड़ता है, जबकि श्रेय पूरी तरह केंद्र को जाता है। हालांकि, अब व्यापक जनहित और केंद्र के साथ बेहतर समन्वय के उद्देश्य से इसे लागू करने की तैयारी है।

​आगामी कदम

​आधिकारिक घोषणा के बाद, राज्य में लाभार्थियों की पहचान और अस्पतालों के पैनल बनाने की प्रक्रिया शुरू होगी। इस कदम से न केवल बंगाल के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूती मिलेगी, बल्कि केंद्र-राज्य संबंधों में भी एक नई सकारात्मक शुरुआत देखी जा रही है।

​यह योजना लागू होते ही बंगाल के लगभग 1.5 करोड़ से अधिक परिवारों को सीधे तौर पर लाभ मिलने की उम्मीद है।

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