राजनीति

तमिलनाडु में ‘विजय’ युग की शुरुआत: स्टालिन का इस्तीफा, गठबंधन सरकार की तैयारी

तमिलनाडु में ‘विजय’ युग की शुरुआत: स्टालिन का इस्तीफा, गठबंधन सरकार की तैयारी

​चेन्नई: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों ने राज्य की सियासत को पूरी तरह बदल दिया है। अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेट्टी कड़गम’ (TVK) राज्य में सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरी है। मंगलवार को मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने अपनी हार स्वीकार करते हुए राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को अपना इस्तीफा सौंप दिया है।

​विधायक दल के नेता चुने गए विजय

नतीजों के बाद टीवीके खेमे में हलचल तेज हो गई है। चेन्नई में हुई बैठक में विजय को सर्वसम्मति से टीवीके विधायक दल का नेता चुन लिया गया है। सरकार बनाने के दावे के लिए विधायकों के हस्ताक्षर लेने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिसमें अब तक 90 से अधिक विधायक दस्तखत कर चुके हैं।

​बहुमत से चूकी टीवीके, लेकिन सबसे बड़ी पार्टी

इस चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत (118 सीटें) नहीं मिला है। टीवीके 107 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी है, जो बहुमत के आंकड़े से 11 सीटें दूर है। वहीं, सत्ताधारी डीएमके को करारी शिकस्त मिली है और वह 59 सीटों पर सिमट गई है। एआईएडीएमके को 47 सीटें मिली हैं।

​गठबंधन का समीकरण और ‘किंगमेकर’ की भूमिका

बहुमत की कमी को देखते हुए अब तमिलनाडु में गठबंधन सरकार बनना तय है। विजय ने पहले ही चुनाव प्रचार के दौरान सत्ता में हिस्सेदारी देने का संकेत दिया था। सरकार बनाने के लिए विजय को छोटी पार्टियों के समर्थन की जरूरत होगी:

​कांग्रेस के 5 विधायक

​लेफ्ट (वामपंथी दलों) के 4 विधायक

​पीएमके (PMK) के 4 विधायक

​वीसीके (VCK) के 2 विधायक

​आईयूएमएल (IUML) के 2 विधायक

​पीएमके ने पहले ही गठबंधन के संकेत दे दिए हैं, जिससे विजय के लिए सरकार बनाने की राह आसान हो सकती है।

​स्टालिन की ऐतिहासिक हार

इस चुनाव का सबसे बड़ा उलटफेर कोलाथुर विधानसभा सीट पर देखने को मिला। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन अपनी ही सीट नहीं बचा पाए और उन्हें टीवीके के उम्मीदवार वीएस बाबू ने हरा दिया। स्टालिन की हार और विजय की पार्टी की ‘आंधी’ ने राज्य की दशकों पुरानी द्रविड़ राजनीति के समीकरणों को हिला कर रख दिया है।

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