पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में बड़ी वारदात: प्रमुख मौलाना मोहम्मद इदरीस की गोली मारकर हत्या, समर्थकों का भारी बवाल
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में बड़ी वारदात: प्रमुख मौलाना मोहम्मद इदरीस की गोली मारकर हत्या, समर्थकों का भारी बवाल
पेशावर/चारसड्डा: पाकिस्तान के अशांत प्रांत खैबर पख्तूनख्वा में मंगलवार, 5 मई को एक बार फिर टारगेट किलिंग की घटना ने पूरे इलाके को दहला दिया। अज्ञात हमलावरों ने प्रसिद्ध धार्मिक विद्वान और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (F) के जिला प्रमुख शेख-उल-हदीस मौलाना मोहम्मद इदरीस की गाड़ी पर घात लगाकर हमला किया, जिसमें उनकी मौत हो गई।
घात लगाकर किया गया हमला
स्थानीय पुलिस के अनुसार, यह घटना चारसड्डा जिले के उत्मानजई इलाके में हुई।
हमले का समय: हमलावरों ने उस समय अंधाधुंध फायरिंग की जब मौलाना इदरीस ‘दारुल उलूम उत्मानजई’ में धार्मिक भाषण (दरस-ए-हदीस) देने जा रहे थे।
नुकसान: इस हमले में मौलाना गंभीर रूप से घायल हो गए और अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया। उनके साथ चल रहे दो सुरक्षाकर्मी भी इस फायरिंग में घायल हुए हैं, जिनका इलाज जारी है।
सड़कों पर उतरे समर्थक, इलाके में तनाव
मौलाना इदरीस की मौत की खबर फैलते ही चारसड्डा और आसपास के इलाकों में तनाव फैल गया।
विरोध प्रदर्शन: सैकड़ों की संख्या में उनके समर्थक सड़कों पर उतर आए और दोषियों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग को लेकर ‘फारूक-ए-आज़म चौक’ पर धरना दिया।
बाजार बंद: हत्या के विरोध में स्थानीय लोगों में भारी गुस्सा है और इलाके में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।
प्रशासनिक कार्रवाई और निंदा
इस घटना के बाद खैबर पख्तूनख्वा के पुलिस और राजनीतिक नेतृत्व ने कड़ा रुख अपनाया है:
मुख्यमंत्री सोहैल अफरीदी: मुख्यमंत्री ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए पुलिस से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने घायल सुरक्षाकर्मियों को उच्च स्तरीय इलाज मुहैया कराने के निर्देश दिए हैं।
आईजीपी जुल्फिकार हमीद: खैबर पख्तूनख्वा के पुलिस महानिरीक्षक (IGP) ने इसे एक “घिनौना कृत्य” बताया और कहा कि मौलाना इदरीस की सेवाओं को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने आरोपियों को जल्द से जल्द कानून के कटघरे में लाने का भरोसा दिया है।
कौन थे मौलाना मोहम्मद इदरीस?
मौलाना मोहम्मद इदरीस पाकिस्तान के वरिष्ठ और सम्मानित धार्मिक विद्वानों में से एक थे। वह जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (F) के चारसड्डा जिला अध्यक्ष थे और जेयूआई-एफ प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान के बेहद करीबी सहयोगी माने जाते थे। वह पूर्व विधायक (MPA) भी रह चुके थे और धार्मिक शिक्षा के क्षेत्र में उनका बड़ा योगदान था।
सुरक्षा पर सवाल: इस हत्या ने एक बार फिर खैबर पख्तूनख्वा में बिगड़ती कानून-व्यवस्था और धार्मिक विद्वानों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है, हालांकि अभी तक किसी भी आतंकी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।
