UKSSSC पेपर लीक: टिहरी की प्रोफेसर सुमन चौहान गिरफ्तार, CBI की जांच से सनसनीखेज खुलासे
UKSSSC पेपर लीक: टिहरी की प्रोफेसर सुमन चौहान गिरफ्तार, CBI की जांच से सनसनीखेज खुलासे
देहरादून: उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की ग्रेजुएट लेवल भर्ती परीक्षा के पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ा खुलासा किया है। टिहरी गढ़वाल के शहीद श्रीमती हंसा धनाई राजकीय महाविद्यालय, अग्रोड़ा (धार मंडल) में असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन चौहान को शुक्रवार (28 नवंबर 2025) को गिरफ्तार कर लिया गया। सुमन पर परीक्षा के दौरान प्रश्नों को हल करके उत्तर उम्मीदवार तक पहुंचाने का गंभीर आरोप है। यह गिरफ्तारी जांच में महत्वपूर्ण मोड़ है, जो पेपर लीक के पीछे की साजिश को उजागर कर रही है। CBI ने मामले को 28 अक्टूबर को अपने हाथ में लिया था, और अब सुमन को शनिवार को स्थानीय CBI कोर्ट में पेश किया जाएगा।
परीक्षा 21 सितंबर 2025 को हुई थी, जिसमें विभिन्न प्रशासनिक पदों के लिए 416 रिक्तियों पर भर्ती के लिए एक लाख से अधिक उम्मीदवार शामिल हुए थे। परीक्षा शुरू होने के महज 35 मिनट बाद हरिद्वार के आदर्श बाल सधान इंटर कॉलेज (बहादुरपुर जट, लक्सर) सेंटर से तीन पेजों की तस्वीरें वायरल हो गईं। मुख्य आरोपी खालिद शाहजाद (हरिद्वार निवासी) ने परीक्षा हॉल में जूतों में छिपाकर स्लिम मोबाइल फोन ले जाकर वॉशरूम ब्रेक के दौरान प्रश्न पत्र की फोटो खींचीं। इन्हें व्हाट्सएप के जरिए अपनी बहनों सबिया और हिना को भेजा, जिन्होंने तुरंत टिहरी की प्रोफेसर सुमन चौहान को फॉरवर्ड कर दिया। सुमन ने कई प्रश्नों को हल करके उत्तर वापस भेजे, जो खालिद तक पहुंचे। CBI ने फोरेंसिक जांच में व्हाट्सएप चैट, टाइम-स्टैंप्ड फोटो और कॉल रिकॉर्ड्स से यह साबित कर दिया।
लीक सामने आने के बाद UKSSSC ने परीक्षा रद्द कर दी और तीन महीने के अंदर पुनः परीक्षा की घोषणा की। राज्य पुलिस ने सबसे पहले खालिद, सबिया और हिना को गिरफ्तार किया था। सुमन को पहले सस्पेंड कर दिया गया था, लेकिन CBI की पूछताछ में उनके असंतोषजनक जवाबों के बाद गिरफ्तारी हुई। सुमन खालिद से पहले रिशिकेश नगर निगम में टैक्स इंस्पेक्टर के रूप में काम करने के दौरान मिली थीं। CBI के एक अधिकारी ने बताया कि यह गिरफ्तारी अकादमिक सर्कल में इनसाइडर कोल्यूजन को इंगित करती है, और जांच से बड़ा नेटवर्क उजागर हो सकता है। एजेंसी ने कहा कि जांच प्रतिदिन चल रही है, और और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
यह मामला उत्तराखंड में पेपर लीक की बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाता है। सितंबर में युवाओं के आंदोलन के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने CBI जांच की सिफारिश की। बेरोजगार संघ के नेतृत्व में चले प्रदर्शनों में ‘पेपर चोर, गद्दी छोड़’ के नारे लगे, और छात्रों ने SIT को ‘कवर-अप’ बताया। स्वाभिमान मोर्चा के बॉबी पंवार ने सोशल मीडिया पर लीक की तस्वीरें पोस्ट कीं, जिससे मामला वायरल हुआ। पूर्व मामलों जैसे 2012 और 2021 के लीक में भी BJP कार्यकर्ताओं का नाम आया था, जिससे राजनीतिक विवाद बढ़ा। CM धामी ने इसे ‘नकल जिहाद’ करार दिया, जबकि विपक्ष ने सिस्टम की नाकामी पर सवाल उठाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरफ्तारी भर्ती प्रक्रिया की अखंडता को बहाल करने में मददगार होगी। UKSSSC चेयरमैन गणेश सिंह मार्टोलिया ने स्वीकार किया कि तीन पेज लीक हुए, लेकिन पूरा पेपर प्रभावित नहीं। CBI ने उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा (अनुचित साधनों पर नियंत्रण) अधिनियम 2023 की धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। राज्य सरकार ने रिटायर्ड जस्टिस बीएस वर्मा को SIT का पर्यवेक्षण सौंपा था, लेकिन अब CBI के पास पूरा मामला है। उम्मीदवारों से अपील है कि पुनः परीक्षा की तैयारी करें, जबकि जांच से भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगेगी। यह घटना न केवल उत्तराखंड, बल्कि पूरे देश के भर्ती तंत्र के लिए चेतावनी है।
