राजनीति

कर्नाटक कांग्रेस संकट: दिल्ली दौरा रद्द, कल नाश्ते पर मिलेंगे सिद्धारमैया-शिवकुमार – हाईकमान के फैसले का इंतजार

कर्नाटक कांग्रेस संकट: दिल्ली दौरा रद्द, कल नाश्ते पर मिलेंगे सिद्धारमैया-शिवकुमार – हाईकमान के फैसले का इंतजार

बेंगलुरु। कर्नाटक कांग्रेस में सुलगते सीएम विवाद को ठंडा करने के लिए बड़ा ट्विस्ट आ गया। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का दिल्ली दौरा रद्द हो गया है। पार्टी हाईकमान ने दोनों नेताओं को दिल्ली न बुलाने का फैसला लिया है, क्योंकि राहुल गांधी का शेड्यूल अनिश्चित है। इसके बजाय, सिद्धारमैया ने शिवकुमार को कल (29 नवंबर) सुबह नाश्ते पर आमंत्रित किया है, जहां सीएम पद को लेकर खुली चर्चा होगी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गुरुवार को कहा कि दिल्ली मीटिंग रद्द होने के बाद राज्य स्तर पर ही मुद्दा सुलझाया जाएगा। यह कदम पार्टी के आंतरिक कलह को कम करने की कोशिश है, लेकिन जातिगत संगठनों की धमकियों ने संकट को और गहरा दिया है।

सिद्धारमैया ने कहा, “शिवकुमार कल नाश्ते पर आएंगे, तब हम इस मुद्दे पर विस्तार से बात करेंगे। हाईकमान का फैसला सर्वोपरि है, और हम दोनों इसका पालन करेंगे।” शिवकुमार ने भी सहमति जताई, “मैं निश्चित रूप से दिल्ली जाऊंगा अगर बुलाया गया, लेकिन फिलहाल राज्य में ही चर्चा हो रही है।” यह नाश्ता मीटिंग 2023 के कथित ‘पावर-शेयरिंग डील’ पर केंद्रित होगी, जहां 2.5 साल बाद सीएम बदलने का वादा था। शिवकुमार के समर्थक MLAs ने दिल्ली जाकर हाईकमान से दबाव बनाया था, लेकिन खड़गे ने साफ कहा कि “भ्रम दूर करने के लिए राज्य में ही बैठक होगी।”

सोशल मीडिया पर दोनों नेताओं के बीच तीखे संकेतों ने आग में घी डाला था। शिवकुमार ने X पर लिखा, “शब्द की ताकत ही दुनिया की ताकत है। वादा निभाना ही सबसे बड़ा बल है।” सिद्धारमैया ने जवाब में कहा, “हमारा जनादेश 5 साल का है, और हम वादों पर खरे उतरे हैं।” सिद्धारमैया के बेटे यथिंद्र ने कहा कि पिता का इस्तीफा ‘बेबुनियाद अफवाह’ है। शिवकुमार के कैंप से 6 MLAs दिल्ली गए थे, लेकिन खड़गे ने उन्हें लौटा दिया।

जातिगत समीकरणों ने संकट को जटिल बना दिया। वोकालिगारा संगठन (शिवकुमार समर्थक) ने चेतावनी दी कि डील न मानने पर ‘परिणाम भुगतना पड़ेगा’। वहीं, अहिंदा संगठन (सिद्धारमैया समर्थक) ने कहा कि सीएम बदलाव से पार्टी टूट सकती है। कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग महासंघ ने भी सिद्धारमैया को हटाने पर ‘गंभीर परिणाम’ की धमकी दी। पूर्व मंत्री सतीश जरकीहोली ने शिवकुमार से देर रात मुलाकात कर कहा, “लीडरशिप चेंज नहीं होगा।”

भाजपा ने इसे ‘कांग्रेस बनाम कांग्रेस’ का तमाशा बताया। राज्याध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने कहा, “कुर्सी की लड़ाई में जनता भूल गई। हम वेट एंड वॉच में हैं।” विशेषज्ञों का मानना है कि नाश्ता मीटिंग से कोई ठोस फैसला नहीं निकलेगा, और हाईकमान दिसंबर में फिर बुला सकता है। 2028 चुनाव से पहले यह संकट पार्टी की एकता को चुनौती दे रहा है। फिलहाल, कल की मीटिंग पर सबकी नजरें टिकी हैं – क्या यह विवाद सुलझेगा या और भड़केगा?

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