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पंचतत्व में विलीन हुए दिवाकर भट्ट: बेटे ने दी मुखाग्नि, हरिद्वार में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई में उमड़ा जनसैलाब

पंचतत्व में विलीन हुए दिवाकर भट्ट: बेटे ने दी मुखाग्नि, हरिद्वार में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई में उमड़ा जनसैलाब

उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शुमार और पूर्व कैबिनेट मंत्री दिवाकर भट्ट मंगलवार शाम को 79 वर्ष की आयु में अपने हरिद्वार स्थित आवास पर पंचतत्व में विलीन हो गए। लंबे समय से न्यूरोलॉजिकल समस्या से जूझ रहे भट्ट का इंद्रेश अस्पताल देहरादून से डिस्चार्ज कराने के बाद घर लाया गया था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। उनकी देह को बुधवार सुबह 11 बजे खड़खड़ी श्मशान घाट पर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। बेटे ने मुखाग्नि दी, और अंतिम यात्रा में हजारों लोग उमड़ पड़े, जो भट्ट के जमीनी नेतृत्व और आंदोलनकारी छवि का प्रमाण था।

दिवाकर भट्ट को ‘फील्ड मार्शल’ कहा जाता था, क्योंकि वे राज्य आंदोलन में सबसे आगे रहते थे। 1970 में तरुण हिमालय संस्था बनाने से लेकर 1994 के मुजफ्फरनगर दंगे, 1996 के आंदोलन में 30 लोगों की शहादत तक, वे हर संघर्ष की अगुवाई करते रहे। उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) के संस्थापक सदस्यों में शामिल भट्ट 2002 में UKD से विधायक बने और 2007 में भाजपा सरकार में राजस्व मंत्री बने। मेजर जनरल बीसी खंडूरी के कार्यकाल में भू-कानून बनाने में उनका योगदान सराहनीय रहा।

अंतिम संस्कार की तैयारी मंगलवार रात से ही शुरू हो गई थी। उनके पार्थिव शरीर को हरिद्वार के आवास पर रखा गया, जहां राजनीतिक दलों के नेता, कार्यकर्ता और आमजन श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शोक संदेश जारी कर कहा, “राज्य निर्माण से जनसेवा तक उनके योगदान अविस्मरणीय हैं।” धामी की ओर से जिला मजिस्ट्रेट मयूर दीक्षित और एसएसपी परमेंद्र सिंह डोभाल ने पुष्पचक्र अर्पित किया। राज्य सरकार ने हरिद्वार जिले में सभी सरकारी कार्यालय बंद रखे और तीन दिवसीय राजकीय शोक घोषित किया।

अंतिम यात्रा में UKD के पूर्व विधायक पुष्पेश त्रिपाठी, पूर्व सीएम बीसी खंडूरी के पुत्र मनीष खंडूरी, पूर्व विधायक उमेश शर्मा ‘कौड़िया’ समेत सैकड़ों नेता शामिल हुए। जनसैलाब इतना विशाल था कि खड़खड़ी घाट पर पहुंचने में दो घंटे लग गए। बेटे ने भावुक होकर मुखाग्नि दी, और जैसे ही चिता प्रज्वलित हुई, नारे लगे – “फील्ड मार्शल अमर रहें!” परिवार में पत्नी, दो बेटे और बेटियां हैं, जो सदमे में हैं।

राजनीतिक हलकों में भट्ट के निधन को अपूरणीय क्षति बताया जा रहा है। पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा, “वे आंदोलन के सिपाही थे, जिन्होंने पहाड़ से मैदान तक लोगों को जोड़ा।” UKD ने कहा कि भट्ट की कमी पार्टी के लिए गहरी चोट है। यह निधन उत्तराखंड की राजनीति में एक युग का अंत दर्शाता है, जहां आंदोलनकारी नेताओं की जगह धीरे-धीरे खत्म हो रही है। भट्ट की सादगी और साहस हमेशा याद रखा जाएगा।

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