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अयोध्या राम मंदिर: ध्वजारोहण से पहले सप्तऋषि मंदिर में पीएम मोदी की पूजा-अर्चना

अयोध्या राम मंदिर: ध्वजारोहण से पहले सप्तऋषि मंदिर में पीएम मोदी की पूजा-अर्चना

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के संपूर्ण निर्माण की पूर्णता का प्रतीक बने ध्वजारोहण उत्सव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को अयोध्या पहुंचकर ऐतिहासिक क्षण का नेतृत्व किया। दोपहर करीब 12 बजे अभिजीत मुहूर्त में मंदिर के 191 फीट ऊंचे शिखर पर भगवा धर्मध्वज फहराने से पहले पीएम मोदी ने राम जन्मभूमि परिसर स्थित सप्तमंदिर (सप्तऋषि मंदिर) में पूजा-अर्चना की। यह मंदिर परिसर के सात प्राचीन ऋषि-मुनियों—महर्षि वशिष्ठ, विश्वामित्र, अगस्त्य, वाल्मीकि, देवी अहल्या, निषादराज गुहा और माता शबरी—के मंदिरों का समूह है, जो रामायण की पवित्र कथा से जुड़े हैं।

पीएम मोदी सुबह अयोध्या एयरपोर्ट पर उतरते ही सीएम योगी आदित्यनाथ द्वारा स्वागत किए गए। इसके बाद उन्होंने 1.5 किलोमीटर लंबा रोडशो किया, जिसमें हजारों भक्तों ने तिरंगा लहराते हुए उनका स्वागत किया। रोडशो के बाद वे सीधे सप्तमंदिर पहुंचे, जहां वैदिक मंत्रोच्चार और शंखनाद के बीच पूजा-अर्चना की। यहां उन्होंने दीप प्रज्वलन किया और ऋषि-मुनियों को नमन किया। इसके बाद शेषावतार मंदिर और माता अन्नपूर्णा मंदिर में दर्शन किए, फिर राम दरबार गर्भगृह में पूजा की। अंत में राम लला के दर्शन के बाद ठीक 11:55 बजे से शुरू हुए ध्वजारोहण में 22 फीट ऊंची भगवा ध्वजा फहराई गई, जो मंदिर निर्माण की पूर्णता और सनातन संस्कृति के पुनरुत्थान का प्रतीक है।

यह ध्वजा 36×54 फीट का भगवा कपड़ा है, जिस पर ‘जय श्री राम’ और ‘राम राज्य’ अंकित है। इसे 108 फीट ऊंचे स्वर्ण कलश युक्त ध्वजदंड पर फहराया गया। समारोह में आरएसएस सरसंघचालक मोहन भागवत, सीएम योगी आदित्यनाथ और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य मौजूद रहे। लगभग 7,000 भक्तों ने इस आयोजन में भाग लिया। सीएम योगी ने इसे ‘रामराज्य का सूत्रपात’ बताते हुए कहा, “यह संपूर्ण देश के लिए सनातन संस्कृति का चरमोत्कर्ष है।” ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि पूजा से पहले गणपति पूजन, पंचांग पूजन, षोडश मातृका पूजन और नवग्रह पूजन जैसे वैदिक अनुष्ठान संपन्न हुए।

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा, “अयोध्या धाम में धर्मध्वजारोहण का यह पावन अवसर सनातन धर्म की विजय का प्रतीक है। सप्तऋषि मंदिर में पूजा कर भगवान राम का आशीर्वाद प्राप्त करना मेरे लिए सौभाग्य की बात है।” यह आयोजन जनवरी 2024 में प्राण प्रतिष्ठा के बाद मंदिर का अंतिम चरण पूरा होने का संकेत है। दुनिया भर के रामभक्त इसे ‘धर्म की पुनर्स्थापना’ के रूप में देख रहे हैं। अयोध्या में सुरक्षा के कड़े इंतजाम हैं, और लाइव टेलीकास्ट ने करोड़ों लोगों को जोड़ा। यह न केवल धार्मिक, बल्कि राष्ट्रीय एकता का भी प्रतीक बन गया है।

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