उत्तराखंड

नैनीताल जिले में अवैध निर्माणों पर प्रशासन का सख्त एक्शन: 600 लोगों को नोटिस, 100 वर्ग गज से छोटे प्लॉट्स की जांच तेज

नैनीताल जिले में अवैध निर्माणों पर प्रशासन का सख्त एक्शन: 600 लोगों को नोटिस, 100 वर्ग गज से छोटे प्लॉट्स की जांच तेज

उत्तराखंड के नैनीताल जिले में अवैध निर्माणों और भूमि अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन ने कमर कस ली है। जिला विकास प्राधिकरण (एनडीडीए) ने 100 वर्ग गज (लगभग 900 वर्ग फीट) से छोटे प्लॉटों पर बने मकानों की जांच के तहत करीब 600 लोगों को नोटिस जारी किए हैं। यह अभियान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य बिना नक्शा स्वीकृति, बिना रजिस्ट्री और सरकारी जमीनों पर खुर्दबुर्द निर्माणों को रोकना है। जांच में हल्द्वानी, रामनगर, भवाली और नैनीताल शहर के मुस्लिम बहुल इलाकों में सैकड़ों अवैध बस्तियां चिन्हित हुई हैं।

मई 2025 में शुरू हुए इस सत्यापन अभियान की शुरुआत नैनीताल में एक नाबालिग हिंदू लड़की से दुष्कर्म की घटना से हुई, जिसके बाद अवैध कब्जों की पोल खुली। विशेष जांच टीम (SIT) ने रामनगर के पूछड़ी बस्ती, हल्द्वानी के गौलापार और गौजाजाली क्षेत्रों में सरकारी जमीनों पर बसे अवैध निर्माणों का पता लगाया। प्रारंभिक जांच में 173 से अधिक मकान बिना मानचित्र पास कराए बने पाए गए, जिनमें से कई पर स्टांप पेपर पर सौदे के बाद बिना रजिस्ट्री के निर्माण हुआ। जिला मजिस्ट्रेट वंदना सिंह ने बताया, “600 नोटिसों में से अधिकांश 100 वर्ग गज से छोटे प्लॉट्स पर बने भवनों से जुड़े हैं। नोटिस प्राप्तकर्ताओं को 3-7 दिनों में वैध दस्तावेज (रजिस्ट्री, नक्शा स्वीकृति) प्रस्तुत करने का समय दिया गया है। जवाब न मिलने पर मकान सील या ध्वस्त करने की कार्रवाई होगी।”

अभियान के पहले चरण में हल्द्वानी में 400 से अधिक अवैध भवन चिन्हित हो चुके हैं, जबकि रामनगर में कोसी नदी किनारे बाहरी लोगों द्वारा बसाई गई बस्तियों पर SIT की निगरानी है। दुष्कर्म आरोपी मोहम्मद उस्मान के रुकुट कंपाउंड स्थित मकान पर भी नोटिस चस्पा किया गया, जो फॉरेस्ट लैंड पर बिना अनुमति बना पाया गया। इसके अलावा, बाहरी राज्यों के लोगों द्वारा भूमि खरीद-फरोख्त की भी जांच चल रही है, जिसमें शर्तों के उल्लंघन पर जमीन राज्य सरकार में निहित की जा सकती है।

पुलिस ने भी किरायेदारों के सत्यापन अभियान चलाया, जिसमें 699 लोगों की जांच हुई और कई मकान मालिकों पर जुर्माना लगाया गया। स्थानीय व्यापारी संगठनों और हिंदूवादी ग्रुप्स ने अभियान का समर्थन किया है, लेकिन कुछ निवासियों ने इसे “डेमोग्राफी चेंज रोकने की साजिश” बताया। यह अभियान जिले के पर्यटन और पारिस्थितिकी संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अपडेट्स के लिए जिला प्रशासन की वेबसाइट nainital.nic.in चेक करें।

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