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बाजार में भारी गिरावट: एक दिन में उड़े 4.5 लाख करोड़ रुपये, निवेशकों पर सदमा!

बाजार में भारी गिरावट: एक दिन में उड़े 4.5 लाख करोड़ रुपये, निवेशकों पर सदमा!

मुंबई: भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को फिर से झटका दे दिया। सेंसेक्स 1,200 अंकों से ज्यादा लुढ़क गया, जबकि निफ्टी 400 से अधिक अंकों की छलांग नीचे चला गया। इस भारी बिकवाली से निवेशकों की जेब ढीली हो गई और बाजार पूंजीकरण में 4.5 लाख करोड़ रुपये की कमी आ गई। बीएसई का कुल मार्केट कैप 445 लाख करोड़ रुपये से घटकर 440.5 लाख करोड़ रुपये रह गया। यह गिरावट वैश्विक व्यापार तनाव और विदेशी निवेशकों के लगातार बहिर्वाह से उपजी है, जिसने पूरे बाजार को हिला दिया।

ट्रेडिंग सेशन के दौरान सेंसेक्स 82,500 से ऊपर खुला था, लेकिन दोपहर होते-होते यह 81,200 के आसपास सिमट गया। अंत में यह 81,289 पर बंद हुआ, जो 1,211 अंकों (1.47%) की गिरावट दर्शाता है। निफ्टी भी 24,800 से नीचे फिसल गया और 24,456 पर सेटल हुआ, 412 अंकों (1.65%) की कमी के साथ। सभी सेक्टर्स लाल निशान में रहे—आईटी में 2.5% की गिरावट, ऑटो में 2%, और बैंकिंग में 1.8% की। रिलायंस इंडस्ट्रीज 3% लुढ़की, जबकि HDFC बैंक और इंफोसिस जैसे ब्लूचिप शेयरों में 2-4% की कमजोरी देखी गई। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी 1.5-2% नीचे बंद हुए।

इस गिरावट के पीछे मुख्य वजहें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए टैरिफ प्रस्ताव हैं, जिनसे भारत-चीन व्यापार युद्ध की आशंका बढ़ गई है। यूएस ने चीनी इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटो पार्ट्स पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की, जिसका असर भारतीय निर्यात पर पड़ रहा है। इसके अलावा, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने जनवरी से अब तक 1.1 लाख करोड़ रुपये (13-15 अरब डॉलर) की बिक्री की है, जो रुपये को 88 डॉलर प्रति के पार धकेल रहा है। आरबीआई की डिविडेंड घोषणा (2.69 लाख करोड़) भी उम्मीदों से कम रही, जिससे ब्याज दर कटौती की संभावना कमजोर पड़ी। वर्ल्ड बैंक ने भारत की 2025 विकास दर को 2.3% पर घटा दिया, जो वैश्विक मंदी का संकेत है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह 2025 की चल रही क्रैश का हिस्सा है, जहां फरवरी से ही बाजार 11-13% नीचे है। एलआईसी जैसे बड़े संस्थानों को भी 1.45 लाख करोड़ का नुकसान हुआ है। हालांकि, कुछ एनालिस्ट रिकवरी की उम्मीद जता रहे हैं। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के अनुसार, निफ्टी 26,000 तक पहुंच सकता है, अगर अर्निंग्स मजबूत हों। सिटी रिसर्च भी 13% उछाल की भविष्यवाणी कर रहा है।

निवेशकों में डर का माहौल है। रिटेल इनवेस्टर्स, जो अब 21 करोड़ अकाउंट्स तक पहुंच चुके हैं, पैनिक सेलिंग कर रहे हैं। एनएसई ने ट्रेडिंग में कोई बदलाव नहीं किया, लेकिन वॉल्यूम 20% बढ़ गया। एक्सपर्ट्स सलाह दे रहे हैं कि लॉन्ग-टर्म इनवेस्टर्स हार्ड होल्ड करें, क्योंकि इतिहास गवाह है कि बाजार हमेशा रिकवर करता है—जैसे 2020 क्रैश के बाद 140% रैली। सरकार ने FPI नियमों पर विचार करने की बात कही है, लेकिन फिलहाल बाजार की नजर अगले हफ्ते के क्वार्टरली रिजल्ट्स पर है। यह गिरावट अर्थव्यवस्था के लिए चेतावनी है, लेकिन अवसर भी छिपा सकती है। निवेशक सतर्क रहें, क्योंकि बाजार की रफ्तार कभी भी पलट सकती है।

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