अनिल अंबानी ग्रुप पर ED का शिकंजा कसता: 9000 करोड़ की संपत्ति जब्त, लोन फ्रॉड की जांच में नया मोड़
अनिल अंबानी ग्रुप पर ED का शिकंजा कसता: 9000 करोड़ की संपत्ति जब्त, लोन फ्रॉड की जांच में नया मोड़
उद्योगपति अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई तेज हो गई है। एजेंसी ने हाल ही में ग्रुप से जुड़ी अतिरिक्त 1400 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को जब्त कर लिया, जिससे कुल जब्त संपत्तियों का मूल्य अब लगभग 9000 करोड़ रुपये पहुंच गया है। यह कदम मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) की धारा 5(1) के तहत उठाया गया है, जो ग्रुप की कंपनियों पर लोन फ्रॉड और फंड डायवर्जन के आरोपों से जुड़ा है। अनिल अंबानी, जो कभी भारत के सबसे अमीर भाइयों में शुमार थे, अब वित्तीय संकट और कानूनी जाल में फंस चुके हैं।
ED की इस ताजा कार्रवाई का आदेश 19 नवंबर को जारी हुआ, जो 3 नवंबर के बाद का है। इससे पहले, 31 अक्टूबर को एजेंसी ने चार प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किए थे, जिनमें 42 हाई-वैल्यू प्रॉपर्टीज को 3083 करोड़ रुपये की कीमत पर फ्रीज किया गया था। इनमें मुंबई के बांद्रा स्थित पाली हिल में अनिल अंबानी का आइकॉनिक रेसिडेंस, दिल्ली का रिलायंस सेंटर (महाराजा रणजीत सिंह मार्ग पर), तथा नोएडा, मुंबई, गोवा, पुणे, हैदराबाद, चेन्नई जैसे शहरों में फ्लैट्स, प्लॉट्स और ऑफिस स्पेस शामिल हैं। नवीनतम जब्ती में 1452 करोड़ रुपये की अतिरिक्त प्रॉपर्टीज जोड़ी गईं, जो रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (RInfra) से जुड़ी हैं।
जांच का केंद्र बिंदु RCom का बैंक लोन मामला है, जहां केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की FIR के आधार पर ED ने अनिल अंबानी, RCom और अन्य पर धोखाधड़ी, साजिश और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। ED का दावा है कि ग्रुप ने 13,600 करोड़ रुपये से अधिक के फंड्स को संदिग्ध तरीके से डायवर्ट किया, जो 2019 तक नॉन-पर्फॉर्मिंग एसेट्स (NPA) बन गए। इसमें रिलायंस होम फाइनेंस (RHFL) के 1353.50 करोड़ और रिलायंस कैपिटल फाइनेंशियल (RCFL) के 1984 करोड़ रुपये के डिफॉल्ट शामिल हैं। नवंबर की शुरुआत में ED ने नवी मुंबई के धीरूभाई अंबानी नॉलेज सिटी (DAKC) में 132 एकड़ जमीन को 7545 करोड़ रुपये की कीमत पर अटैच किया था। अनिल अंबानी को 14 नवंबर को पूछताछ के लिए तलब किया गया था, लेकिन वे दोबारा पेश नहीं हुए, जिसके बाद ट्रैवल बैन लगा दिया गया।
रिलायंस ग्रुप की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन कंपनियों ने पहले सफाई दी थी कि ये कार्रवाइयां ‘अनुचित’ हैं। ग्रुप की वित्तीय सेहत पहले से ही कमजोर है—रिलायंस इंफ्रा का शेयर गुरुवार को 4.10% गिरकर 172 रुपये पर ट्रेड कर रहा था। विशेषज्ञों का मानना है कि यह जांच ग्रुप की कंपनियों को दिवालिया प्रक्रिया की ओर धकेल सकती है, जैसा कि RCom के साथ पहले हो चुका है। अनिल अंबानी, जो मुकेश अंबानी के छोटे भाई हैं, ने हाल के वर्षों में कई डिफॉल्ट्स का सामना किया है, लेकिन ED की यह कार्रवाई सबसे गंभीर है।
यह मामला कॉर्पोरेट गवर्नेंस और बैंकिंग फ्रॉड की व्यापक समस्या को उजागर करता है। ED की जांच जारी है, और आगे पूछताछ व संपत्ति अटैचमेंट की संभावना है। क्या अनिल अंबानी इस संकट से उबर पाएंगे? बाजार और निवेशक बेचैन हैं, जबकि ग्रुप की कंपनियां पुनर्गठन की कोशिशों में जुटी हैं। यह घटना भारतीय अर्थव्यवस्था में बड़े कॉर्पोरेट्स पर नियामक नजर की याद दिलाती है।
