तालिबान के वाणिज्य मंत्री की भारत यात्रा: पाकिस्तान को कूटनीतिक धक्का, व्यापारिक संबंधों में नया मोड़
तालिबान के वाणिज्य मंत्री की भारत यात्रा: पाकिस्तान को कूटनीतिक धक्का, व्यापारिक संबंधों में नया मोड़
अफगानिस्तान के तालिबान शासन के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री अल्हाज नूरुद्दीन अजीजी की भारत यात्रा ने क्षेत्रीय भू-राजनीति में उथल-पुथल मचा दी है। बुधवार को दिल्ली पहुंचे अजीजी का यह पांच दिवसीय दौरा पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर तनाव के बीच हो रहा है, जहां इस्लामाबाद ने काबुल पर हवाई हमले किए हैं। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इसे ‘भारत की अफगानिस्तान से कम तीव्रता वाली जंग’ करार देते हुए तालिबान को चेतावनी दी है, जो कूटनीतिक रूप से एक बड़ा झटका साबित हो रहा है।
अजीजी एक बड़े व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत आए हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को बढ़ावा देना है। बुधवार को उन्होंने भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला (आईआईटीएफ) 2025 का दौरा किया, जहां भारतीय निर्यात जैसे दवाएं, वस्त्र, मशीनरी और चाय-चीनी के साथ अफगानी कृषि उत्पादों व खनिजों पर चर्चा हुई। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने एक्स पर स्वागत संदेश देते हुए कहा, “द्विपक्षीय व्यापार एवं निवेश को मजबूत करना यात्रा का प्रमुख फोकस है।” यह यात्रा अक्टूबर में तालिबान विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी के दिल्ली दौरे के एक महीने बाद हो रही है, जब भारत ने काबुल में अपना दूतावास फिर से खोलने की घोषणा की थी।
पाकिस्तान के साथ संबंधों में बिगड़ती स्थिति ने तालिबान को भारत की ओर झुकने पर मजबूर कर दिया है। अक्टूबर से अफ-पाक सीमा बंद है, व्यापार ठप और सीमा पर गोलीबारी जारी है। पाकिस्तान तालिबान पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) को समर्थन देने का आरोप लगाता है, जबकि काबुल ने पाकिस्तानी हवाई हमलों को ‘आतंकवाद’ करार दिया है। नवंबर में पाकिस्तान ने काबुल और पक्तिका प्रांत में टीटीपी ठिकानों पर हमला किया, जिसके जवाब में अफगान बलों ने जवाबी कार्रवाई की। तालिबान के उप आर्थिक मामलों वाले उप प्रधानमंत्री मुल्ला अब्दुल गनी बरादर ने व्यापारियों से पाकिस्तान के रास्ते पर निर्भरता कम करने को कहा है।
इस बीच, भारत का तालिबान से निकटता पाकिस्तान को खल रही है। मुत्तकी की देवबंद मदरसे यात्रा पर पेशावर के विद्वान तैय्यब कुरैशी ने न्यूयॉर्क टाइम्स को कहा, “पाकिस्तान ने तालिबान को शरण दी, लेकिन अब वे भारत के नए संरक्षक बन रहे हैं।” पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने बिना सबूत के दावा किया कि अफगानिस्तान ‘भारतीय प्रॉक्सी’ बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह व्यावहारिक नीति पाकिस्तानी प्रभाव को कमजोर करेगी, लेकिन वैचारिक मतभेदों के कारण लंबे समय तक टिकना मुश्किल होगा।
भारत ने अफगानिस्तान को मानवीय सहायता भेजी है और चाबहार बंदरगाह के जरिए वैकल्पिक कनेक्टिविटी पर जोर दे रहा है। मुत्तकी ने भारत को आश्वासन दिया कि अफगान मिट्टी का इस्तेमाल भारत-विरोधी गतिविधियों के लिए नहीं होगा। जैसे-जैसे तालिबान भारत के साथ हवाई माल ढुलाई गलियारे को मजबूत कर रहा है—जो दिल्ली, मुंबई, अमृतसर को काबुल व कंधार से जोड़ेगा—पाकिस्तान की चिंताएं बढ़ रही हैं। यह यात्रा न केवल आर्थिक है, बल्कि क्षेत्रीय संतुलन बदलने वाली भी। क्या यह भारत-तालिबान संबंधों का नया अध्याय लिखेगा या पाकिस्तान के साथ टकराव को भड़काएगा? समय ही बताएगा।
