दिल्ली रेड फोर्ट ब्लास्ट: धमाके वाली जगह से मिले 9mm कारतूस, आर्मी-पुलिस का हथियार, जांच में नया मोड़
दिल्ली रेड फोर्ट ब्लास्ट: धमाके वाली जगह से मिले 9mm कारतूस, आर्मी-पुलिस का हथियार, जांच में नया मोड़
रेड फोर्ट के पास 10 नवंबर को हुए कार बम धमाके की जांच में दिल्ली पुलिस को एक बड़ा सुराग मिला है। धमाके वाली जगह से तीन 9mm कैलिबर के कारतूस बरामद हुए हैं, जिसमें दो लाइव और एक खाली शामिल है। यह कारतूस आमतौर पर भारतीय सेना, पुलिस और सुरक्षा बलों द्वारा इस्तेमाल किए जाते हैं, जो सिविलियन के लिए प्रतिबंधित हैं। हालांकि, साइट से कोई पिस्तौल या इसका कोई पार्ट नहीं मिला, जिससे जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि ये कारतूस कहां से आए। धमाके में 13 लोगों की मौत हुई थी और कई घायल हुए थे। NIA और दिल्ली पुलिस के संयुक्त जांच में यह खुलासा JeM से जुड़े ‘व्हाइट कॉलर टेरर’ नेटवर्क की साजिश को और गहरा कर रहा है।
दिल्ली पुलिस के सीनियर अधिकारी ने बताया, “ये कारतूस केवल आर्म्ड फोर्सेज या स्पेशल परमिशन वाले लोगों के पास हो सकते हैं। सिविलियन यूज के लिए ये अवैध हैं।” फॉरेंसिक टीम ने साइट से ये कारतूस बरामद किए, जो धमाके के बाद की डेब्री में छिपे थे। CCTV फुटेज से पुष्टि हुई कि धमाके से ठीक पहले एक सफेद Hyundai i20 कार रुकती है, जिसमें अमोनियम नाइट्रेट से लदा IED फटा। ड्राइवर डॉ. उमर उल नबी (32, पुलवामा) का DNA मैच हो चुका है, जो अल-फलाह यूनिवर्सिटी का जूनियर डॉक्टर था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, ये कारतूस उमर के पास हो सकते हैं, लेकिन हथियार की अनुपस्थिति से संदेह है कि यह किसी बड़े नेटवर्क से जुड़ा हो।
यह खोज जांच को नया आयाम दे रही है। NIA का मानना है कि 9mm कारतूसों का स्रोत JeM के पाकिस्तान-आधारित हैंडलर्स से जुड़ा हो सकता है, जो कश्मीर के रेडिकलाइज्ड डॉक्टरों के जरिए भारत में घुसेड़े जाते हैं। फरीदाबाद से बरामद 2,900 किलो विस्फोटक के अलावा, अब कारतूसों की ट्रेसिंग पर फोकस है। विशेषज्ञों का कहना है कि ये कारतूस INSAS पिस्टल या ग्लॉक जैसी सर्विस राइफलों के लिए हैं, जो ब्लैक मार्केट में हजारों रुपये में बिकते हैं। लेकिन आधिकारिक स्रोत से आने पर आर्मी इंटेलिजेंस को अलर्ट किया गया है।
धमाके के बाद NMC ने चार कश्मीरी डॉक्टरों – डॉ. मुजफ्फर अहमद, डॉ. आदिल अहमद राथर, डॉ. मुजम्मिल शकील और डॉ. शाहीन सईद – की रजिस्ट्रेशन कैंसल कर दी। दिल्ली पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार किया, जो JeM के टेरर विंग से जुड़े थे। एक नई FIR क्रिमिनल कॉन्सपिरेसी के तहत दर्ज हुई, जिसमें दिल्ली में सीरीज ब्लास्ट की साजिश का जिक्र है। गृह मंत्रालय ने कहा, “सुरक्षा एजेंसियां हर एंगल से जांच कर रही हैं। कोई छूट नहीं मिलेगी।”
विशेषज्ञों का मानना है कि यह ‘सॉफ्ट टारगेट’ अटैक का हिस्सा था, जहां शिक्षित लोग हथियार सप्लाई चेन का लिंक बने। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। क्या ये कारतूस बड़े प्लॉट का सुराग हैं? NIA की टीम फरीदाबाद और कश्मीर में छापेमारी जारी रखेगी। दिल्ली हाई अलर्ट पर है, और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। देश की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं – क्या ब्लैक मार्केट को रोकने के लिए नई स्ट्रैटेजी चाहिए?
