उत्तराखंड

देहरादून बार एसोसिएशन का चक्काजाम: नए न्यायालय परिसर पर सैकड़ों वकीलों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी, चैंबर निर्माण में देरी पर भारी विरोध

देहरादून बार एसोसिएशन का चक्काजाम: नए न्यायालय परिसर पर सैकड़ों वकीलों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी, चैंबर निर्माण में देरी पर भारी विरोध

देहरादून: देहरादून बार एसोसिएशन के सैकड़ों अधिवक्ताओं ने मंगलवार को हरिद्वार रोड स्थित नए न्यायालय परिसर के बाहर सड़क पर धरना देकर चक्काजाम कर दिया। वकीलों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की और चैंबर निर्माण से जुड़ी नीतियों में सहयोग न करने का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि 5,000 से अधिक पंजीकृत वकीलों के लिए उपलब्ध 5 बीघा जमीन अपर्याप्त है, और सरकार की निष्क्रियता से न्यायिक कार्य प्रभावित हो रहा है। पुलिस ने स्थिति संभाल ली, लेकिन वकीलों ने चेतावनी दी कि मांगें पूरी न होने पर आंदोलन तेज होगा।

प्रदर्शन का कारण: चैंबर निर्माण में सरकारी लापरवाही

देहरादून बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनमोहन कंडवाल ने बताया कि नए न्यायालय परिसर (हरिद्वार रोड पर सिविल कंपाउंड) में वकीलों के लिए चैंबर बनाने के लिए ली गई 5 बीघा जमीन पर्याप्त नहीं है। परिसर में 10,000 से अधिक लोग (वकील, स्टाफ और वकील सहायक) काम करते हैं, लेकिन सुविधाओं की भारी कमी है। कंडवाल ने कहा, “सरकार बार की मांगों पर लगातार नाकाम रही है। हेल्थ डिपार्टमेंट रेन बसरा बनाने की योजना बना रहा है, जो हमारी जमीन पर कब्जा कर लेगा। इससे कानूनी कार्य और कठिन हो जाएगा।” वकीलों ने मांग की कि हरिद्वार रोड का पूरा परिसर वकीलों के चैंबर और कानूनी कार्यालयों के लिए आरक्षित किया जाए।

प्रदर्शन सुबह 10 बजे शुरू हुआ। सैकड़ों वकीलों ने काले कोट पहनकर सड़क पर बैठ गए और “सरकार हमारा अपमान कर रही है”, “चैंबर बनाओ, न्याय बचाओ” जैसे नारे लगाए। ट्रैफिक जाम हो गया, जिससे हरिद्वार रोड पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। एसएसपी देहरादून ने मौके पर पहुंचकर बातचीत की, लेकिन वकील संतुष्ट नहीं हुए। कंडवाल ने कहा, “हमारा धरना तब तक जारी रहेगा, जब तक सरकार लिखित आश्वासन न दे।”

ऐतिहासिक संदर्भ: बार एसोसिएशन का लंबा संघर्ष

देहरादून बार एसोसिएशन का यह विरोध नया नहीं है। 2015 में भी वकीलों ने हरिद्वार रोड की जमीन को हेल्थ डिपार्टमेंट को ट्रांसफर करने के खिलाफ आंदोलन किया था। उस समय ADM को ज्ञापन सौंपा गया था। 2022 में भी स्पेस शॉर्टेज पर विरोध हुआ, जब बार ने कहा कि 5 बीघा जमीन 10,000 लोगों के लिए नाकाफी है। सुप्रीम कोर्ट ने 2020 में देहरादून, हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर बार एसोसिएशन के सैटरडे स्ट्राइक्स को अवैध ठहराया था, लेकिन यह चैंबर मुद्दा अलग है। एसोसिएशन में 5,000 से अधिक वकील पंजीकृत हैं, और स्पेस की कमी से दैनिक कार्य प्रभावित हो रहा है।

सरकार की प्रतिक्रिया: DM ने आश्वासन दिया

DM देहरादून आशीष बटवाल ने कहा, “वकीलों की मांगों पर विचार किया जा रहा है। जल्द बैठक बुलाई जाएगी।” विधानसभा स्पीकर रीता जोशी ने भी हस्तक्षेप की बात कही। विपक्षी नेता ने सरकार पर निशाना साधा, “न्यायपालिका को कमजोर करने की साजिश।” प्रदर्शन में महिलाओं का भी अच्छा प्रतिनिधित्व था।

यह आंदोलन उत्तराखंड में न्यायिक सुविधाओं पर बहस छेड़ रहा है। वकील शाम तक धरने पर डटे रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *