राजनीति

मुंबई मेयर पर ‘खान’ का सवाल: बीजेपी नेता साटम के बयान से भड़का सियासी तूफान, अबू आजमी ने ठहराया ‘वोट जिहाद’ का आरोप

मुंबई मेयर पर ‘खान’ का सवाल: बीजेपी नेता साटम के बयान से भड़का सियासी तूफान, अबू आजमी ने ठहराया ‘वोट जिहाद’ का आरोप

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में ब्रिक नगर निगम (बीएमसी) चुनावों से ठीक पहले सियासत गरम हो गई है। बीजेपी के मुंबई अध्यक्ष अमित साटम के विवादास्पद बयान ‘मुंबई में खान मेयर नहीं’ ने विपक्ष को भड़का दिया है। साटम ने न्यूयॉर्क सिटी में ‘खान’ उपनाम वाले उम्मीदवार ज़ोहरान ममदानी के मेयर चुने जाने का हवाला देते हुए चेतावनी दी कि अगर किसी ने मुंबई पर ‘खान’ लादने की कोशिश की, तो बीजेपी इसे बर्दाश्त नहीं करेगी। इस बयान पर समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक अबू आजमी ने पलटवार किया और बीजेपी पर ‘वोट जिहाद’ फैलाने का आरोप लगाया, जिससे सियासी संग्राम तेज हो गया।

साटम का बयान गुरुवार को एक रैली के दौरान आया, जहां उन्होंने कहा, “न्यूयॉर्क में मुस्लिम उम्मीदवार ज़ोहरान ममदानी को मेयर बनाया गया, लेकिन मुंबई को हम ऐसी ‘खान’ नहीं सौंपेंगे। यह शहर हिंदू-मराठी संस्कृति का गढ़ है, और हम इसे बचाएंगे।” उन्होंने ‘वोट जिहाद’ का जिक्र करते हुए मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण का आरोप लगाया, जो बीएमसी चुनावों में मुस्लिम बहुल इलाकों जैसे भायखला, मलाड और मीरा-भायंदर पर असर डाल सकता है। साटम ने आगे कहा, “मुंबई में वंदे मातरम का सम्मान होना चाहिए, न कि ‘खान’ का राज।” यह बयान बीजेपी की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जहां पार्टी मुस्लिम-विरोधी ध्रुवीकरण से हिंदू वोटों को एकजुट करने की कोशिश कर रही है।

अबू आजमी ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए साटम को ‘सांप्रदायिकता फैलाने वाला’ ठहराया। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आजमी ने कहा, “बीजेपी ‘वोट जिहाद’ का शोर मचा रही है, लेकिन असल में वे खुद ध्रुवीकरण कर रहे हैं। मुंबई सभी का शहर है—हिंदू, मुस्लिम, ईसाई। क्या ‘खान’ नाम होने से कोई अयोग्य हो जाता है? यह लोकतंत्र का अपमान है।” आजमी ने साटम के बयान को ‘हेट स्पीच’ बताते हुए महाराष्ट्र चुनाव आयोग से शिकायत दर्ज करने का ऐलान किया। सपा ने इसे बीजेपी की ‘फूट डालो, राज करो’ की नीति का हिस्सा करार दिया, जो 2024 विधानसभा चुनावों के बाद महा विकास अघाड़ी (एमवीए) को कमजोर करने का प्रयास है।

यह विवाद न्यूयॉर्क के मेयर चुनाव से प्रेरित है, जहां 6 नवंबर को ज़ोहरान ममदानी—एक पाकिस्तानी मूल के मुस्लिम—ने डेमोक्रेटिक प्राइमरी में जीत हासिल की। ममदानी की जीत को अमेरिका में मुस्लिम प्रतिनिधित्व की मिसाल माना जा रहा है, लेकिन भारत में इसे सांप्रदायिक चश्मे से देखा गया। बीजेपी समर्थकों ने साटम के बयान का समर्थन किया, जबकि विपक्षी दलों—कांग्रेस, एनसीपी (एसपी) और शिवसेना (यूबीटी)—ने इसे निंदा की। उद्धव ठाकरे ने ट्वीट किया, “मुंबई महानगर है, न कि किसी का गुलाम। ऐसे बयान शहर की एकता को तोड़ते हैं।” महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बीजेपी के बयान से दूरी बनाई, लेकिन पार्टी आलाकमान ने साटम का बचाव किया।

बीएमसी चुनाव, जो 2026 में होने हैं, में 227 सीटें दांव पर हैं। 2017 में बीजेपी ने 82 सीटें जीती थीं, लेकिन एमवीए ने गठबंधन से कंट्रोल लिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयानबीाजी मुस्लिम वोटों को सपा-कांग्रेस की ओर धकेल सकती है। सांप्रदायिक तनाव बढ़ने के डर से मुंबई पुलिस ने अलर्ट जारी किया है। फिलहाल, चुनाव आयोग ने बयान पर नजर रखने की बात कही है। यह संग्राम महाराष्ट्र की सियासत को और उबाल पर ला सकता है, जहां नाम की राजनीति अब चुनावी हथियार बन गई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *