गांवों को शराबमुक्त बनाने का संकल्प: शिवराज सिंह चौहान ने पुलिस को दिए सख्त आदेश, अवैध बिक्री पर लगेगी रोक
गांवों को शराबमुक्त बनाने का संकल्प: शिवराज सिंह चौहान ने पुलिस को दिए सख्त आदेश, अवैध बिक्री पर लगेगी रोक
केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ग्रामीण भारत को नशामुक्त बनाने के लिए कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि ‘गांवों में किसी भी कीमत पर शराब नहीं बिकनी चाहिए।’ उन्होंने पुलिस और प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि अवैध शराब की बिक्री पर तत्काल कार्रवाई हो और ग्रामीण क्षेत्रों में नशे की जड़ें उखाड़ फेंकी जाएं। यह बयान मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के इछावर तहसील के धामंदा गांव में अवैध शराब की बिक्री की शिकायतों के बाद आया है, जहां चौहान ने स्थानीय प्रशासन के साथ बैठक की। चौहान ने जोर देकर कहा, “शराब न केवल परिवारों को बर्बाद कर रही है, बल्कि गांवों की शांति और विकास को भी चोट पहुंचा रही है। हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।”
यह पहली बार नहीं है जब चौहान ने शराबबंदी पर जोर दिया हो। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने लाड़ली बहन योजना और ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के तहत नशामुक्ति अभियान चलाया था। 2023 में डिंडोरी जिले के जल्दा मुड़िया गांव में पेसा एक्ट के तहत ग्राम सभा ने शराबबंदी का प्रस्ताव पारित किया था, जो मध्य प्रदेश का पहला ऐसा गांव बना। वहां ग्रामीणों ने शराब बनाने, बेचने या पीने पर 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया, और महिलाओं ने इसे ‘सुख-शांति की नई शुरुआत’ बताया। चौहान ने उस समय कहा था कि आदिवासी क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को सशक्त बनाकर नशे पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाएगा। अब केंद्रीय मंत्री के नाते वे पूरे देश में इस मॉडल को फैलाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
धामंदा गांव में चौहान के दौरे के दौरान ग्रामीणों ने शिकायत की कि कुछ लोग अवैध रूप से शराब बेच रहे हैं, जिससे झगड़े और दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। चौहान ने एसपी और कलेक्टर को तलब कर कहा, “निगरानी बढ़ाएं, छापेमारी करें और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।” उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे भी जागरूक हों और नशे के खिलाफ आवाज उठाएं। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत चल रही ‘महात्मा गांधी नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट’ (मनरेगा) योजनाओं में नशामुक्त गांवों को प्राथमिकता देने का ऐलान भी किया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा, क्योंकि शराब पर खर्च होने वाले पैसे परिवारों की बचत में लगेंगे।
मध्य प्रदेश में चौहान के कार्यकाल में शराब दुकानों पर सख्ती बढ़ी थी—2023 में कैबिनेट ने फैसला लिया कि दुकानों पर बैठकर पीना प्रतिबंधित रहेगा। लेकिन अवैध बिक्री अभी भी चुनौती बनी हुई है। राष्ट्रीय स्तर पर, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, भारत में शराब से जुड़ी बीमारियां लाखों मौतों का कारण बन रही हैं, खासकर ग्रामीण इलाकों में। चौहान का यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘नशामुक्त भारत’ अभियान से जुड़ता है। पुलिस ने तुरंत धामंदा में छापा मारा, जहां से 50 लीटर अवैध शराब जब्त हुई। चौहान ने कहा, “गांव शराबमुक्त होंगे, तभी भारत का ग्रामीण विकास साकार होगा।”
फिलहाल, मध्य प्रदेश सरकार ने राज्यव्यापी अभियान शुरू करने की योजना बनाई है, जिसमें ग्राम पंचायतों को शराबबंदी के लिए प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। विपक्ष ने इसे स्वागतयोग्य बताया, लेकिन मांग की है कि अमल पर नजर रखी जाए। चौहान के इस सख्त रवैये से ग्रामीण महिलाओं में उत्साह है, जो लंबे समय से नशे के खिलाफ लड़ रही हैं। यह कदम न केवल सामाजिक सुधार लाएगा, बल्कि स्वस्थ भारत के सपने को साकार करने में मदद करेगा।
