उत्तराखंड

सुविधा कटौती पर BJP-कांग्रेस एकजुट, मुख्य सचिव से पुनर्विचार की मांग

सुविधा कटौती पर BJP-कांग्रेस एकजुट, मुख्य सचिव से पुनर्विचार की मांग

उत्तराखंड पूर्व विधायक संगठन ने राज्य सरकार की सुविधा कटौती नीति के खिलाफ आज सचिवालय में हल्ला बोला। मुख्य सचिव आनंद वर्धन से मुलाकात के दौरान भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के पूर्व विधायकों ने एक स्वर में नाराजगी जताई और फैसले पर तत्काल पुनर्विचार की गुहार लगाई। संगठन ने कहा कि वर्षों जनसेवा करने वाले पूर्व जनप्रतिधियों के साथ यह असंवेदनशील व्यवहार अन्यायपूर्ण है। मुलाकात में बेरोजगारी, उपनल कर्मचारियों और किसानों की समस्याएं भी उठाई गईं, जिससे प्रदर्शन ने व्यापक स्वरूप ले लिया।

पूर्व विधायकों का मुख्य आरोप है कि सरकार ने बिना पूर्व सूचना या ठोस कारण के यात्रा भत्ता, महंगाई भत्ता और आवासीय रियायतों में कटौती कर दी। कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे पूर्व विधायक हीरा सिंह बिष्ट ने कहा, “यह निर्णय न केवल गलत है, बल्कि परंपरा और सम्मान का अपमान भी। पूर्व विधायकों को मिली सुविधाएं जारी रखी जानी चाहिए।” भाजपा से जुड़े पूर्व विधायक केदार सिंह रावत ने स्पष्ट किया कि सरकारी अतिथि गृहों में आगंतुक सूची से पूर्व विधायकों-सांसदों को हटा दिया गया है। दिल्ली के उत्तराखंड निवास में वर्तमान विधायकों के लिए 1,500 रुपये शुल्क है, जबकि पूर्व विधायकों के लिए इसे बढ़ाकर 3,500 रुपये कर दिया गया। रावत ने जोड़ा, “हम दुरुपयोग के पक्षधर नहीं, लेकिन एकतरफा कटौती गलत संदेश देती है।”

संगठन ने मुख्य सचिव के समक्ष अन्य मुद्दे भी रखे। बेरोजगार युवाओं की भर्ती प्रक्रिया में देरी, उपनल कर्मचारियों की नियमितीकरण मांग और किसानों को आपदा राहत में कमी पर चिंता जताई। पूर्व विधायकों ने कहा कि सरकार इन वर्गों की अनदेखी कर रही है, जबकि पूर्व जनप्रतिनिधि ही इनकी आवाज उठाते रहे हैं। मुलाकात के बाद संगठन के प्रतिनिधियों ने मीडिया से कहा, “हमने मुख्य सचिव से वादा लिया है कि मामले पर कैबिनेट में चर्चा होगी। अगर सुधार नहीं हुए, तो बड़ा आंदोलन करेंगे।”

मुख्य सचिव आनंद वर्धन ने आश्वासन दिया कि सभी मांगों पर विचार किया जाएगा और जल्द रिपोर्ट तैयार होगी। हालांकि, परिवहन और राजस्व विभागों के साथ यह तीसरा बड़ा प्रदर्शन है, जो सरकार पर दबाव बढ़ा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्व विधायकों की एकजुटता राजनीतिक समीकरण बदल सकती है, खासकर 2027 चुनाव से पहले। क्या सरकार रियायतें बहाल करेगी? फिलहाल, सचिवालय के बाहर पूर्व विधायकों का धरना जारी है।

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