जोहरान ममदानी: न्यूयॉर्क के पहले मुस्लिम मेयर कैसे बने?
जोहरान ममदानी: न्यूयॉर्क के पहले मुस्लिम मेयर कैसे बने?
अमेरिका के सबसे बड़े शहर न्यूयॉर्क को एक ऐतिहासिक मेयर मिला है। 34 वर्षीय जोहरान ममदानी ने मंगलवार को हुए मेयर चुनाव में शानदार जीत दर्ज की, जो उन्हें शहर के पहले मुस्लिम, पहले दक्षिण एशियाई मूल के और पिछले 100 वर्षों में सबसे युवा मेयर बनाते हैं। भारतीय मूल के ममदानी ने डेमोक्रेटिक प्राइमरी में पूर्व गवर्नर एंड्र्यू कुओमो को 13 प्रतिशत के अंतर से हराया और जनरल चुनाव में कुओमो (इंडिपेंडेंट) व रिपब्लिकन कर्टिस स्लिवा को पछाड़ दिया। लगभग सभी वोटों की गिनती के बाद उन्हें 50.6 प्रतिशत (9,48,202 वोट) मिले।
ममदानी का सफर प्रेरणादायक है। उनका जन्म 1991 में युगांडा की राजधानी कंपाला में हुआ। मां मीरा नायर प्रसिद्ध भारतीय फिल्म निर्देशक हैं, जिनकी फिल्में ‘सलाम बॉम्बे’ (ऑस्कर नामांकित), ‘मॉनसून वेडिंग’ और ‘द नेमसेक’ जैसी हैं। पिता महमूद ममदानी कोलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और लेखक हैं। सात साल की उम्र में परिवार के साथ न्यूयॉर्क पहुंचे ममदानी ने ब्रॉन्क्स हाई स्कूल ऑफ साइंस से पढ़ाई की, जहां उन्होंने स्कूल का पहला क्रिकेट टीम बनाया। ब्वोयडॉइन यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में डिग्री ली। शुरुआत में हिप-हॉप रैपर बने, फिर हाउसिंग काउंसलर के रूप में काम किया। 2017 में डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट्स ऑफ अमेरिका (DSA) जॉइन किया।
राजनीति में प्रवेश 2020 में हुआ, जब उन्होंने न्यूयॉर्क स्टेट असेंबली के 36वें जिले से चुनाव लड़ा। पांच बार की सिटिंग विधायक अरावेला सिमोटास को प्राइमरी में हराकर जीते। 2022 और 2024 में बिना विरोध के दोबारा चुने गए। अक्टूबर 2024 में मेयर चुनाव की घोषणा की। उनका अभियान ‘सस्ता न्यूयॉर्क’ पर केंद्रित था: किराया स्थिर रखना, मुफ्त बसें, सार्वजनिक चाइल्डकेयर, शहर-चलाए ग्रॉसरी स्टोर, $30 न्यूनतम वेतन (2030 तक), कॉर्पोरेट टैक्स बढ़ाना और अमीरों पर कर। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो जैसे ‘हलाल-फ्लेशन’ (सड़क खाने की ऊंची कीमतें) ने युवाओं को जोड़ा।
यह जीत ट्रंप की धमकी के बावजूद आई। राष्ट्रपति ट्रंप ने फंडिंग रोकने और निर्वासन की धमकी दी, लेकिन रिकॉर्ड 20 लाख वोट पड़े। प्राइमरी में युवा और पहली बार वोटरों ने कमाल किया। जीत के बाद भाषण में नेहरू के ‘ट्रस्ट विद डेस्टिनी’ का हवाला दिया: “इतिहास में ऐसा पल कम आता है।” अरबी में प्रतिज्ञा की: “इंसाफ, समानता और एकता।” एओसी और बर्नी सैंडर्स जैसे प्रोग्रेसिव्स ने बधाई दी।
ममदानी की पत्नी रामा दुवाजी ने पर्दे के पीछे अभियान चलाया। चुनौतियां बाकी: अल्बनी और सिटी काउंसिल को एकजुट करना, ट्रंप का विरोध झेलना। लेकिन यह जीत प्रोग्रेसिव्स के लिए ब्लूप्रिंट है। न्यूयॉर्क अब बदलाव की नई सुबह का गवाह बनेगा।
