US-China ट्रेड वॉर का ‘द एंड’? चीन का धमाकेदार ऐलान: अमेरिका से हटाया 24% टैरिफ!
US-China ट्रेड वॉर का ‘द एंड’? चीन का धमाकेदार ऐलान: अमेरिका से हटाया 24% टैरिफ!
अमेरिका और चीन के बीच छह साल पुरानी ट्रेड वॉर को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम उठा है। चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने मंगलवार को ऐलान किया कि अमेरिकी आयात पर लगे 24% अतिरिक्त टैरिफ को तत्काल प्रभाव से हटा लिया गया है। यह फैसला कृषि उत्पादों, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर लागू होगा, जो कुल $150 बिलियन के सामान को कवर करता है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा, “यह कदम आपसी लाभ और वैश्विक स्थिरता के लिए है। ट्रेड वॉर के नुकसान से सबको सबक मिला।”
यह ऐलान वाशिंगटन-बीजिंग के बीच नवंबर में हुई गुप्त वार्ताओं का नतीजा है। ट्रंप प्रशासन के दौर में 2018 से शुरू हुई जंग में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर सैकड़ों बिलियन डॉलर के टैरिफ ठोके थे। अमेरिका ने चीनी स्टील, एल्यूमीनियम और टेक प्रोडक्ट्स पर 25% तक टैक्स लगाया, तो चीन ने अमेरिकी सोयाबीन, व्हिस्की और कारों पर जवाबी कार्रवाई की। नतीजा? अमेरिकी किसानों को $28 बिलियन का नुकसान, जबकि चीनी निर्यात 12% गिरा। वैश्विक सप्लाई चेन बाधित हुई, महंगाई बढ़ी और स्टॉक मार्केट हिल गया।
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “यह सकारात्मक शुरुआत है। हम भी जवाबी कदम उठाएंगे।” व्हाइट हाउस के अनुसार, अमेरिका चीनी सोलर पैनल्स और इलेक्ट्रिक वाहनों पर 10% टैरिफ कम करने पर विचार कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह ‘फेज टू’ डील का संकेत है, जिसमें इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स और टेक ट्रांसफर पर सहमति बनेगी। जेपी मॉर्गन के अर्थशास्त्री ने अनुमान लगाया कि इससे ग्लोबल जीडीपी 0.5% बढ़ेगी।
लेकिन चुनौतियां बाकी हैं। टिकटॉक और हुवावे जैसे मुद्दे, साथ ही दक्षिण चीन सागर में तनाव। रिपब्लिकन सीनेटरों ने इसे “चीनी जाल” करार दिया, जबकि डेमोक्रेट्स ने इसे “आर्थिक राहत” बताया। चीन का यह कदम अपनी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने का प्रयास है, जहां रियल एस्टेट संकट और बेरोजगारी ने ग्रिप बनाई है। अमेरिकी किसान, जो सोयाबीन एक्सपोर्ट से वंचित थे, अब जश्न मना रहे हैं।
क्या यह ट्रेड वॉर का असली अंत है? या सिर्फ अस्थायी विराम? आने वाले महीनों में G20 समिट पर नजरें टिकी हैं। फिलहाल, वैश्विक बाजारों में हलचल मच गई—डाउ जोंस 2% उछला, जबकि शंघाई इंडेक्स 1.5% मजबूत हुआ। US-China रिश्तों में यह नया अध्याय दुनिया को नई दिशा दे सकता है।
