सऊदी में ‘गुलामी’ का अंत: कफाला प्रथा खत्म, MBS के फैसले से लाखों भारतीय मजदूरों को मिली नई आजादी
सऊदी में ‘गुलामी’ का अंत: कफाला प्रथा खत्म, MBS के फैसले से लाखों भारतीय मजदूरों को मिली नई आजादी
सऊदी अरब ने आखिरकार अपनी 50 साल पुरानी कफाला प्रथा को आधिकारिक रूप से खत्म कर दिया है, जिसे कई मानवाधिकार संगठनों ने ‘आधुनिक गुलामी’ का नाम दिया था। क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) के नेतृत्व में जून 2025 में घोषित इस ऐतिहासिक सुधार ने करीब 1.34 करोड़ विदेशी मजदूरों को नई आजादी दी है। इनमें से करीब 26 लाख भारतीय शामिल हैं, जो मुख्य रूप से निर्माण, कृषि, घरेलू काम और अन्य निम्न-आय वाले क्षेत्रों में काम करते हैं। अब मजदूर बिना नियोक्ता की अनुमति के नौकरी बदल सकेंगे, देश छोड़ सकेंगे और कानूनी सहायता ले सकेंगे। यह बदलाव MBS के विजन 2030 का हिस्सा है, जो अर्थव्यवस्था को तेल पर निर्भरता से मुक्त करने और वैश्विक छवि सुधारने का लक्ष्य रखता है।
कफाला प्रथा के तहत मजदूरों का कानूनी दर्जा उनके ‘कफील’ (नियोक्ता) से बंधा रहता था, जो उनके पासपोर्ट जब्त कर लेता था, आवाजाही पर रोक लगाता था और शोषण करता था। अब इसे अनुबंध-आधारित मॉडल से बदल दिया गया है, जो कतर के 2022 फीफा वर्ल्ड कप से पहले किए गए सुधारों से प्रेरित है। द वीक ने बताया कि यह कदम सऊदी की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा, क्योंकि बेहतर श्रमिक अधिकार विदेशी निवेश आकर्षित करेंगे।
कफाला प्रथा क्या थी? एक नजर
– उत्पत्ति: 1950 के दशक में सऊदी के ऑयल बूम के दौरान शुरू। इसका मतलब ‘स्पॉन्सरशिप’ होता था, जहां नियोक्ता मजदूर का कानूनी संरक्षक बन जाता था।
– समस्याएं: मजदूर नौकरी नहीं बदल सकते थे, वीजा रद्द होने का डर रहता था। पासपोर्ट जब्ती, कम वेतन, शारीरिक शोषण जैसी घटनाएं आम थीं। ह्यूमन राइट्स वॉच (HRW) ने इसे ‘फोर्स्ड लेबर’ कहा था।
– प्रभाव: सऊदी की 42% आबादी विदेशी मजदूरों पर निर्भर। दक्षिण एशिया (भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, नेपाल) से ज्यादातर आते हैं।
विकिपीडिया के अनुसार, यह सुधार MBS के विजन 2030 का हिस्सा है, जो 2034 फीफा वर्ल्ड कप की मेजबानी से पहले श्रमिक अधिकारों को मजबूत करने का प्रयास है।
भारतीय मजदूरों पर असर: आजादी की नई सुबह
भारत से सऊदी में 26 लाख से ज्यादा मजदूर काम करते हैं, जो परिवारों को रेमिटेंस भेजते हैं। बिजनेस स्टैंडर्ड के मुताबिक, अब वे:
– नौकरी बदल सकेंगे: नियोक्ता की मंजूरी के बिना, लेकिन अनुबंध की शर्तें पूरी करके।
– देश छोड़ सकेंगे: वीजा रद्द होने का डर खत्म।
– कानूनी सुरक्षा: शोषण पर आसानी से शिकायत दर्ज कर सकेंगे। घरेलू कामगार महिलाओं को सबसे ज्यादा फायदा, जो अक्सर अलग-थलग रहती थीं।
भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ट्वीट कर कहा, “यह सुधार हमारे प्रवासी भारतीयों के कल्याण के लिए सकारात्मक कदम है।” एनआरआई संगठनों ने इसे सराहा, लेकिन चेतावनी दी कि अमल में निगरानी जरूरी है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
– विजन 2030: MBS की योजना अर्थव्यवस्था को विविधीकृत करने और विदेशी निवेश बढ़ाने की। ILO और HRW के दबाव ने भी भूमिका निभाई।
– क्षेत्रीय प्रभाव: कतर और UAE ने पहले सुधार किए। सऊदी 2034 वर्ल्ड कप की मेजबानी के लिए तैयार हो रहा है।
– चुनौतियां: पूर्ण अमल में समय लगेगा, क्योंकि पुरानी मानसिकता बाकी है।
यह सुधार न केवल मजदूरों को आजादी देगा, बल्कि सऊदी की वैश्विक छवि को नई ऊंचाई देगा। भारतीय सरकार ने सलाह दी है कि मजदूर नए नियमों का लाभ लें और शोषण की शिकायतें एमईए को रिपोर्ट करें। प्रवासी भारतीयों के लिए एक नई उम्मीद की किरण!
