उत्तराखंड

बद्रीनाथ धाम में दीपोत्सव: 12,000 दीपों से जगमगाया आकाश, केदारनाथ में 15,000 दीपों की रोशनी ने मनाई दिवाली

बद्रीनाथ धाम में दीपोत्सव: 12,000 दीपों से जगमगाया आकाश, केदारनाथ में 15,000 दीपों की रोशनी ने मनाई दिवाली

हिमालय की गोद में बसे बद्रीनाथ और केदारनाथ धामों ने दीवाली की रात को अनोखे दीपोत्सव से रोशन कर दिया। बद्रीनाथ धाम में पहली बार 12,000 दीपों को प्रज्वलित कर जगमगाया आकाश, जबकि केदारनाथ में 15,000 दीपों की चांदी ने धाम को स्वर्ग जैसा बना दिया। श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) द्वारा आयोजित इस भव्य समारोह में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया, जहां फूलों की सजावट, चप्पन भोग और विशेष पूजा-अर्चना ने त्योहार को और भव्य बना दिया। यह दीपोत्सव न केवल आस्था का प्रतीक बना, बल्कि हिमालयी धामों के पुनर्निर्माण और पर्यटन विकास की दिशा में भी एक संदेश दिया।

BKTC अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि बद्रीनाथ धाम को 12 क्विंटल फूलों से सजाया गया, और माता लक्ष्मी को चप्पन भोग अर्पित किया गया। उन्होंने कहा, “यह पहली बार है जब बद्रीनाथ में इतने बड़े पैमाने पर दीपोत्सव मनाया गया। 12,000 दीपों की रोशनी ने धाम को दिव्य रूप दिया।” इसी तरह, केदारनाथ में मंदिर परिसर और आसपास के पथों पर दीपों की भरमार रही, जहां श्रद्धालुओं ने सामूहिक आरती उतारी। समिति ने स्थानीय पुजारियों और हक-हकूकधारियों के सहयोग से 20 से 23 अक्टूबर तक चलने वाले इस उत्सव को सफल बनाया.

दीपोत्सव की मुख्य झलकियां

– बद्रीनाथ का भव्य स्वरूप: धाम के मुख्य मंदिर, माता लक्ष्मी मंदिर और आसपास के क्षेत्रों में 12,000 दीप जलाए गए। डिमरी केंद्रीय पंचायत, मेहता, भंडारी समुदायों ने मिलकर यह आयोजन किया। 56 प्रकार के भोगों के साथ विशेष पूजा हुई, और फूलों की मालाओं से धाम सजा। श्रद्धालुओं ने “हर हर महादेव” और “जय बद्री विशाल” के जयकारे लगाए।

– केदारनाथ की रोशनी: यहां 15,000 दीपों से मंदिर परिसर जगमगा उठा। दीपोत्सव के दौरान भगवान शिव की विशेष आराधना हुई, और धाम के बंद होने (23 अक्टूबर) से पहले यह एक यादगार विदाई समारोह बन गया। 12 क्विंटल फूलों से सजावट की गई, जो भक्तों और दानदाताओं के सहयोग से संभव हुई।

– सुरक्षा और व्यवस्था: विशेष सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। BKTC ने श्रद्धालुओं के लिए स्वास्थ्य शिविर, पार्किंग और परिवहन सुविधाएं सुनिश्चित कीं। कोई अप्रिय घटना न होने से सभी ने राहत की सांस ली।

धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

दीवाली पर ये धाम धन-समृद्धि और प्रकाश के प्रतीक के रूप में जगमगाते हैं। बद्रीनाथ में कुबेर और माता लक्ष्मी की पूजा विशेष महत्व रखती है, जबकि केदारनाथ में शिव की आराधना अंधकार पर विजय का संदेश देती है। यह आयोजन चार धाम यात्रा को बढ़ावा देने का भी माध्यम बना, जहां 2025 में 35 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे। राज्यपाल गुरमीत सिंह के हालिया दौरे के बाद यह उत्सव और प्रेरणादायक रहा।

दीपोत्सव ने हिमालय की वादियों में दिवाली को अमर बना दिया। यदि आप भी इन धामों की यात्रा प्लान कर रहे हैं, तो अगले साल के लिए बुकिंग शुरू हो चुकी है।

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