उत्तराखंड

दीपावली की रात देहरादून में पटाखों से आग की घटनाएं: दमकल विभाग की गाड़ियां रातभर दौड़ती रहीं, लाखों का नुकसान लेकिन कोई हताहत नहीं

दीपावली की रात देहरादून में पटाखों से आग की घटनाएं: दमकल विभाग की गाड़ियां रातभर दौड़ती रहीं, लाखों का नुकसान लेकिन कोई हताहत नहीं

दीपावली की चमक-दमक के बीच देहरादून और आसपास के इलाकों में पटाखों और आतिशबाजी की चिंगारियों ने कई जगहों पर आग लगा दी। रातभर दमकल विभाग की गाड़ियां इधर-उधर दौड़ती रहीं, और कम से कम 5-7 जगहों पर आग बुझाने का अभियान चलाया गया। ज्यादातर घटनाएं पटाखों के रॉकेट्स या चिंगारियों से हुईं, जिनमें घरों, दुकानों और वाहनों को नुकसान पहुंचा। राहत की बात यह रही कि किसी की जान नहीं गई, लेकिन लाखों रुपये का सामान जलकर राख हो गया। स्थानीय प्रशासन ने पहले ही चेतावनी जारी की थी, लेकिन उत्साह में लोग सतर्कता भूल गए।

रिपोर्ट्स के अनुसार, देहरादून शहर में रात 8 बजे से मध्यरात्रि तक 12 से अधिक आग की सूचनाएं मिलीं, जिनमें से 6 प्रमुख घटनाएं पटाखों से जुड़ी थीं। दमकल विभाग के डायरेक्टर मनोज कुमार ने बताया, “हमारी टीमें हाई अलर्ट पर थीं। रातभर 15 से ज्यादा गाड़ियां मैदान में थीं, और आग पर 80% मामलों में 20-30 मिनट में काबू पा लिया गया।” उत्तराखंड अग्निशमन विभाग ने पूरे त्योहार के दौरान 50 अतिरिक्त वाहनों की तैनाती की थी।

प्रमुख घटनाएं: कहां-कहां लगी आग?

– डोईवाला बाजार में दुकान जलकर राख: डोईवाला के मुख्य बाजार में देहरादून रोड पर सुभाष कौशल की दुकान में रॉकेट पटाखा गिरने से गैस के गुब्बारों में आग लग गई। दुकान मालिक घायल हो गए, लेकिन फायर ब्रिगेड ने तुरंत पहुंचकर आग बुझा दी। नुकसान: करीब 2 लाख रुपये। स्थानीय लोगों ने बताया कि रॉकेट पास के घरों की छत से फायर हुआ था।

– राजपुर रोड पर वाहन में आग: राजपुर रोड के एक पार्किंग में खड़ी कार पर पटाखों की चिंगारी गिरी, जिससे आग भड़क उठी। दो दमकल गाड़ियां पहुंचीं और 15 मिनट में काबू पाया। कोई हताहत नहीं, लेकिन कार पूरी तरह खराब।

– कनखल और हरिद्वार क्षेत्र में घरों में धुआं: देहरादून से सटे कनखल में 3 घरों में पटाखों से आग लगी, जहां दमकल टीम रातभर दौड़ती रही। ज्वालापुर और रानीपुर में भी 2 घटनाएं हुईं, जहां कपड़े और लकड़ी का सामान जल गया।

– रुड़की में फैक्ट्री का धुआं: देहरादून के नजदीक रुड़की में एक छोटी फैक्ट्री में शॉर्ट सर्किट और पटाखों के मिश्रण से आग लगी, जिसे 4 गाड़ियों ने बुझाया। नुकसान: 5 लाख से ज्यादा।

– अन्य जगहें: सहस्रधारा रोड पर एक रेस्तरां के बाहर और मसूरी रोड पर पार्क में छोटी-मोटी आग की 2-3 घटनाएं। कुल मिलाकर, उत्तराखंड में 20 से ज्यादा कॉल्स आएं।

क्यों बढ़ीं ऐसी घटनाएं? विशेषज्ञों की राय

– पटाखों का जोखिम: सुप्रीम कोर्ट के ग्रीन पटाखों के बावजूद, कई जगहों पर बड़े रॉकेट्स और हाई-डेंसिटी फायरक्रैकर्स इस्तेमाल हुए। हवा की कम गति ने चिंगारियों को फैलने दिया।

– जागरूकता की कमी: नगर निगम ने 100 से ज्यादा पॉइंट्स पर जागरूकता कैंप लगाए थे, लेकिन रात के उत्साह में लोग लापरवाह हो गए। दमकल विभाग ने चेतावनी दी थी कि पटाखे 8-10 बजे के बीच ही चलाएं।

– तैयारी: विभाग ने 24 त्वरित प्रतिक्रिया वाहन तैनात किए थे, जो रातभर सक्रिय रहे। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, देहरादून में 78 बर्न केस दर्ज हुए, जिनमें एक की हालत गंभीर है।

क्या कहते हैं अधिकारी?

उत्तराखंड के मुख्य अग्निशमन अधिकारी ने कहा, “दीपावली पर आग की घटनाएं 30% बढ़ जाती हैं। हमने कोई बड़ा हादसा होने से रोक लिया। अगले साल ज्यादा सख्ती करेंगे।” स्थानीय लोग भी मानते हैं कि “खुशियां मनानी हैं, लेकिन सावधानी बरतनी चाहिए।”

यह घटनाएं दीपावली के जश्न को एक सबक देती हैं। यदि आप भी पटाखे चलाते हैं, तो खुले मैदान में ही और सुरक्षा उपकरण पहनें।

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