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दिवाली पर कर्मचारियों को 51 लग्जरी कारें गिफ्ट करने वाला बॉस: एम.के. भाटिया कौन हैं, और क्यों लिया इतना बड़ा फैसला?

दिवाली पर कर्मचारियों को 51 लग्जरी कारें गिफ्ट करने वाला बॉस: एम.के. भाटिया कौन हैं, और क्यों लिया इतना बड़ा फैसला?

दिवाली की रौनक में जहां ज्यादातर कंपनियां कर्मचारियों को बोनस या छोटे-मोटे गिफ्ट्स देती हैं, वहीं चंडीगढ़ के एक फार्मा उद्योगपति ने ऐसा तोहफा दिया, जिसने सोशल मीडिया और न्यूज चैनलों पर तहलका मचा दिया। एमआईटीएस हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड (MITS Healthcare Pvt Ltd) के फाउंडर और चेयरमैन एम.के. भाटिया ने इस दिवाली पर अपने 51 चुनिंदा कर्मचारियों को ब्रांड न्यू लग्जरी कारें (ज्यादातर निसान SUV) गिफ्ट कीं। यह लगातार तीसरा साल है जब भाटिया ने अपनी इस अनोखी परंपरा को जारी रखा—पिछले साल 15 कारें और उसके पहले 12। कुल 51 कारों की ‘हाफ सेंचुरी’ पूरी होने पर कर्मचारियों ने शोरूम से ‘कार गिफ्ट रैली’ निकाली, जिसकी रील्स इंस्टाग्राम पर वायरल हो रही हैं। यूजर्स उन्हें ‘बॉस ऑफ द ईयर’ और ‘रियल लाइफ सांता’ कह रहे हैं। लेकिन आखिर एम.के. भाटिया कौन हैं, और इतना बड़ा फैसला क्यों लिया?

एम.के. भाटिया कौन हैं? एक नजर

– पृष्ठभूमि: चंडीगढ़ के रहने वाले एम.के. भाटिया एक समाजसेवी, उद्यमी और फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री के दिग्गज हैं। 2002 में उन्होंने MITS ग्रुप की शुरुआत की, जो पंचकूला (हरियाणा) के फेज-I में स्थित है। कंपनी फार्मा प्रोडक्ट्स (दवाइयां, हेल्थकेयर सॉल्यूशंस) में माहिर है और उत्तर भारत में तेजी से बढ़ रही है।

– व्यवसाय: MITS हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड के तहत वे हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स का उत्पादन और डिस्ट्रीब्यूशन करते हैं। कंपनी का फोकस क्वालिटी और इनोवेशन पर है, जिसकी वजह से यह ट्राईसिटी (चंडीगढ़, मोहाली, पंचकूला) में जाना-माना नाम बन चुकी है। भाटिया खुद सोशल मीडिया एक्टिव रहते हैं, जहां वे अपनी कंपनी की सक्सेस स्टोरीज शेयर करते हैं।

– सोशल साइड: वे समाजसेवा में भी सक्रिय हैं—स्वास्थ्य कैंप्स, शिक्षा सहायता और पर्यावरण पहल में योगदान देते हैं। उनकी ‘कार गिफ्टिंग’ रील्स को लाखों व्यूज मिलते हैं, जो उनकी ब्रांड वैल्यू बढ़ाती हैं।

क्यों लिया इतना बड़ा फैसला? भाटिया के शब्दों में

भाटिया ने मीडिया इंटरव्यूज में साफ कहा कि यह फैसला उनकी कंपनी की सफलता का श्रेय कर्मचारियों को देने का तरीका है। मुख्य कारण:

– कर्मचारियों को ‘रीढ़ की हड्डी’ मानना: “मेरे सहयोगी मेरी फार्मास्यूटिकल कंपनियों की रीढ़ हैं। जब मेरा सपना साकार हुआ, तो स्टाफ के सपनों को पूरा करना जरूरी हो गया।” उन्होंने बताया कि ये कारें उन कर्मचारियों को दी गईं, जिन्होंने पूरे साल शानदार परफॉर्मेंस दिया—टॉप सेलर्स, इनोवेटर्स और लॉयल टीम मेंबर्स को।

– मोटिवेशन और वर्क कल्चर: भाटिया का मानना है कि महंगे गिफ्ट्स से कर्मचारी मोटिवेट होते हैं। “मैं उन्हें बाइक या ऑटो से उतारकर कार में लाना चाहता हूं।” यह परंपरा कंपनी के वर्क कल्चर को मजबूत करती है, जहां परफॉर्मेंस को रिवार्ड मिलता है। पिछले तीन सालों में इससे कर्मचारी टर्नओवर कम हुआ और प्रोडक्टिविटी बढ़ी।

– व्यक्तिगत टच: गिफ्टिंग इवेंट के दौरान भाटिया खुद चाबियां सौंपते हैं, हग्स देते हैं और रील्स बनाते हैं। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ गिफ्ट नहीं, उनके समर्पण की पहचान है। दिवाली पर खुशियां बांटना मेरा धर्म है।”

– बिजनेस स्ट्रैटेजी: कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि यह PR मूव भी है, जो कंपनी को पॉजिटिव पब्लिसिटी देता है। लेकिन भाटिया का कहना है कि यह दिल से किया गया फैसला है।

सोशल मीडिया पर धमाल: वायरल रील्स और रिएक्शन्स

– इंस्टाग्राम पर भाटिया की रील्स को 10 लाख+ व्यूज मिले, जहां कर्मचारियों की खुशी के पल कैद हैं। एक यूजर ने लिखा, “ऐसे बॉस हर कंपनी में होने चाहिए!”

– रैली में 51 कारें सजी हुईं, दिवाली लाइट्स के साथ—शहरवासी सड़कों पर जमा हो गए।

– सिलेब्रिटी सहयोगियों को भी कारें गिफ्ट कीं, जो वायरल फैक्टर बढ़ा रहा है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

बिजनेस एनालिस्ट्स का मानना है कि भाटिया का यह अप्रोच ‘एंप्लॉयी सेंट्रीक’ मॉडल का बेहतरीन उदाहरण है। CNBC Awaaz के अनुसार, ऐसे गिफ्ट्स से लॉयल्टी बढ़ती है और कंपनी की वैल्यूएशन ऊपर जाती है। हालांकि, कुछ क्रिटिक्स ने सवाल उठाया कि क्या यह सभी कर्मचारियों के लिए संभव है? भाटिया ने जवाब दिया, “हर कंपनी अपनी क्षमता के अनुसार करे, लेकिन कर्मचारियों को वैल्यू दें।”

एम.के. भाटिया की यह पहल न सिर्फ दिवाली को यादगार बनाती है, बल्कि कॉर्पोरेट वर्ल्ड में ‘बॉस-एम्प्लॉयी रिलेशनशिप’ की नई मिसाल पेश करती है। अगर आप भी ऐसे बॉस के साथ काम करते, तो कैसा लगता? कमेंट्स में बताएं!

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