उत्तराखंड सरकार का सख्त रुख: अवैध धर्मांतरण, अतिक्रमण और दंगा फैलाने वालों पर कार्रवाई, 250 अवैध मदरसों पर ताला
उत्तराखंड सरकार का सख्त रुख: अवैध धर्मांतरण, अतिक्रमण और दंगा फैलाने वालों पर कार्रवाई, 250 अवैध मदरसों पर ताला
देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने अवैध धर्मांतरण, अतिक्रमण और दंगा भड़काने वालों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए व्यापक अभियान शुरू किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने काशीपुर में भाजपा जिला कार्यालय के उद्घाटन के दौरान ऐलान किया कि अब तक 250 अवैध मदरसों को सील कर दिया गया है और 500 से अधिक अवैध संरचनाओं को ध्वस्त किया गया है। यह कार्रवाई ‘लैंड जिहाद’, अवैध धर्मांतरण और सामाजिक अशांति फैलाने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा, “देवभूमि में नकल, लव जिहाद और थूक जिहाद जैसे कृत्यों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अवैध मदरसों और अतिक्रमण पर सख्ती जारी रहेगी।” उन्होंने बताया कि 9,000 एकड़ से अधिक सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है। सरकार ने मदरसा बोर्ड को समाप्त करने का फैसला लिया है, और 1 जुलाई 2026 के बाद बिना मान्यता वाले सभी मदरसों का पंजीकरण रद्द होगा। नेपाल सीमा से सटे उधम सिंह नगर, चम्पावत और पिथौरागढ़ जैसे जिलों में अवैध मदरसों, मस्जिदों और मजारों की जांच तेज कर दी गई है।
अभियान का दायरा और प्रभाव
– अवैध मदरसे: 250 से अधिक गैर-पंजीकृत मदरसों को सील किया गया, जिनमें से कई नेपाल सीमा के पास थे। इन पर अवैध धर्मांतरण और संदिग्ध गतिविधियों का आरोप है।
– अतिक्रमण हटाओ: 500+ अवैध संरचनाएं (मस्जिदें, मजारें, और अन्य) ध्वस्त। 9,000 एकड़ सरकारी जमीन मुक्त।
– कानूनी कार्रवाई: सैकड़ों FIR दर्ज, बुलडोजर कार्रवाई जारी। मुख्यमंत्री ने कहा, “जो सामाजिक सद्भाव भंग करेगा, उसे छोड़ा नहीं जाएगा।”
धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जांच में तेजी लाएं और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्ती करें। उन्होंने जनता से भी अवैध गतिविधियों की जानकारी साझा करने की अपील की।
विपक्ष की प्रतिक्रिया और विश्लेषण
विपक्ष ने इस अभियान को “सांप्रदायिक ध्रुवीकरण” का हथकंडा बताया। कांग्रेस नेता हरीश रावत ने कहा, “यह कार्रवाई अल्पसंख्यकों को निशाना बना रही है।” वहीं, भाजपा ने इसे कानून-व्यवस्था की जीत बताया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनावों से पहले BJP की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
यह अभियान उत्तराखंड को सुरक्षित और कानून-सम्मत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है, लेकिन सामाजिक संतुलन बनाए रखना चुनौती होगा।
