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अयोध्या का 9वां दीपोत्सव बना अब तक का सबसे भव्य, 26 लाख दीयों से जगमगाई सरयू; बने दो नए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड

अयोध्या का 9वां दीपोत्सव बना अब तक का सबसे भव्य, 26 लाख दीयों से जगमगाई सरयू; बने दो नए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड

अयोध्या: राम नगरी अयोध्या ने 9वें दीपोत्सव के साथ एक नया इतिहास रच दिया। छोटी दीवाली (19 अक्टूबर 2025) पर सरयू नदी के तटों पर 26,17,215 दीयों का प्रज्वलन हुआ, जो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए सबसे बड़ा तेल का दीप प्रदर्शन बना। इसके अलावा, 2,128 वैदिक विद्वानों ने एक साथ सरयू आरती की, जो सबसे बड़ा सामूहिक आरती का नया रिकॉर्ड है। यह राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के बाद पहला दीपोत्सव था, जो पिछले सभी आयोजनों को पीछे छोड़ते हुए वैश्विक पटल पर अयोध्या को चमका गया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राम की पैड़ी पर दीप प्रज्वलन किया, जहां 33,000 से अधिक स्वयंसेवकों ने 56 घाटों पर दीये सजाए। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा, “यह दीपोत्सव त्रेता युग की राम नगरी को पुनर्जीवित करने का प्रतीक है। 26 लाख दीयों का प्रदर्शन पिछले रिकॉर्ड (22 लाख) को तोड़कर नया कीर्तिमान स्थापित कर चुका।” गिनीज अधिकारी निश्चल बरोत ने प्रमाण-पत्र सौंपते हुए कहा, “यह भव्य दीपोत्सव वर्षों तक याद रहेगा।”आरती के दौरान 2,128 विद्वानों ने एक साथ ‘हर हर महादेव’ का जाप किया, जो आध्यात्मिक ऊर्जा से गूंज उठा।

आयोजन में 1,100 ड्रोन शो, लेजर लाइटिंग और 15 देशों के कलाकारों के रामकथा-आधारित नृत्य-नाट्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। 22 टेबलॉक्स प्रोसेसन ने रामायण के सात कांडों को जीवंत किया। मुख्यमंत्री ने कहा, “राम मंदिर के बाद यह दीपोत्सव अयोध्या को वैश्विक पर्यटन केंद्र बनाने की दिशा में मील का पत्थर है।” 10,000 से अधिक सुरक्षा बलों ने 18 जोन और 42 सेक्टरों में इंतजाम किए, जिससे कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।

पिछले वर्षों के रिकॉर्ड टूटे: 2024 में 22 लाख दीये जले थे, जबकि 2023 में 15 लाख। इस बार 26 लाख से अधिक दीयों ने सरयू को ‘दीपों की नदी’ बना दिया। आयोजन में 25 लाख श्रद्धालु शामिल हुए, जो पिछले रिकॉर्ड से 20% ज्यादा है। पर्यटन विभाग के अनुसार, यह उत्सव अयोध्या को 2025 में 2 करोड़ पर्यटकों का केंद्र बनेगा।

विपक्ष ने इसे सराहा, लेकिन सपा नेता अखिलेश यादव ने ‘क्रिसमस से सीखने’ का सुझाव देकर विवाद खड़ा किया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दीपोत्सव अयोध्या को सांस्कृतिक राजधानी के रूप में स्थापित करेगा। राम जन्मभूमि का यह पहला दीपोत्सव आस्था और भव्यता का संगम था।

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