राजनीति

MP: किसानों की पीड़ा लेकर जीतू पटवारी पहुंचे शिवराज के घर, धान की बोरी कंधे पर लादकर किया ड्रामा

MP: किसानों की पीड़ा लेकर जीतू पटवारी पहुंचे शिवराज के घर, धान की बोरी कंधे पर लादकर किया ड्रामा

मध्य प्रदेश की राजनीति में किसानों का मुद्दा फिर गरमाया तो कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने अनोखा ड्रामा रचा। मंगलवार दोपहर वे अचानक धान की बोरी कंधे पर लादकर, करीब 50 कार्यकर्ताओं और किसानों के साथ केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के भोपाल स्थित बंगले पर पहुंच गए। रास्ते भर पुलिस बैरिकेड्स तोड़ते हुए झड़पें हुईं, लेकिन पटवारी नहीं रुके। हंगामे के बीच चौहान खुद बाहर आए और प्रतिनिधिमंडल को अंदर ले गए। यह प्रदर्शन किसानों की समस्याओं—खासकर भावांतर योजना की जगह सीधे MSP की मांग—पर केंद्रित था। विपक्ष का यह कदम भाजपा सरकार पर तीखा प्रहार माना जा रहा है।

घटना दोपहर करीब 2 बजे शुरू हुई। कांग्रेस मुख्यालय से निकले पटवारी ने धान की बोरी कंधे पर लादी, जो किसानों की उपज का प्रतीक थी। वे चिल्लाए, “शिवराज जी, ये बोरी आपके द्वार पर है। किसानों का दर्द समझिए!” रास्ते में पुलिस ने बैरिकेड्स लगाए, लेकिन कार्यकर्ताओं ने उन्हें हटाने की कोशिश की। तीन जगहों पर धक्का-मुक्की हुई, और एक कार्यकर्ता घायल भी हुआ। पूर्व सूचना न देने के कारण प्रशासन ने इसे “अनधिकृत प्रदर्शन” बताया। पटवारी ने कहा, “हम किसानों की आवाज दबने नहीं देंगे। भावांतर योजना किसानों को ठग रही है। सीधे MSP लागू करें।”

चौहान के बंगले पर पहुंचते ही हंगामा चरम पर। कार्यकर्ताओं ने “किसान हक दो” के नारे लगाए। तभी केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद बाहर निकले। उन्होंने पटवारी को गले लगाया और प्रतिनिधिमंडल को अंदर बुलाया। करीब 45 मिनट की बैठक में किसानों की शिकायतें सुनीं। चौहान ने कहा, “मैं किसानों का बेटा हूं। उनकी हर समस्या का समाधान करेंगे।” पटवारी ने बाद में बताया, “मंत्री जी ने आश्वासन दिया। लेकिन वादे पूरे होने चाहिए।” बैठक के बाद कार्यकर्ता शांतिपूर्वक लौटे।

यह घटना मध्य प्रदेश में किसान आंदोलन की पृष्ठभूमि में आई है। हाल ही में मूंग, आलू और गेहूं की MSP पर विवाद चला। जून 2025 में पटवारी ने मूंग की बोरी लेकर सोहागपुर में प्रदर्शन किया था, और फरवरी में विदिशा में धान-गेहूं MSP पर सवाल उठाए। भाजपा ने इसे “राजनीतिक ड्रामा” बताया। प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने कहा, “कांग्रेस वोटों के लिए किसानों का दर्द भुन रही। मोदी सरकार ने MSP बढ़ाया है।” कांग्रेस ने जवाब दिया, “शिवराज मंत्री बनने के बाद किसानों को भूल गए।”

मध्य प्रदेश में किसान संगठनों ने समर्थन जताया। भारतीय किसान संघ के नेता ने कहा, “पटवारी ने सही मुद्दा उठाया। भावांतर से किसान घाटे में हैं।” विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रदर्शन 2028 के विधानसभा चुनावों की रणनीति का हिस्सा है, जहां किसान वोट निर्णायक होंगे। फिलहाल, चौहान के बंगले पर तनाव शांत हो गया, लेकिन किसानों का आंदोलन जारी है। क्या यह ड्रामा MSP पर ठोस कदम दिलाएगा? आने वाले दिनों में साफ होगा।

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