तालिबान विदेश मंत्री का देवबंद में जोरदार स्वागत: जावेद अख्तर ने जताई नाराजगी, कहा- “शर्म से सिर झुका”
तालिबान विदेश मंत्री का देवबंद में जोरदार स्वागत: जावेद अख्तर ने जताई नाराजगी, कहा- “शर्म से सिर झुका”
अफगानिस्तान के तालिबान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी के भारत दौरे ने विवाद खड़ा कर दिया है। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर स्थित दारुल उलूम देवबंद में उन्हें भव्य स्वागत मिलने पर मशहूर गीतकार और लेखक जावेद अख्तर भड़क गए हैं। उन्होंने इसे “शर्मनाक” बताते हुए सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी, खासकर तालिबान के महिला विरोधी रवैये और शिक्षा पर प्रतिबंध को लेकर सवाल उठाए। यह घटना भारत-अफगान संबंधों और धार्मिक कट्टरता पर नई बहस छेड़ रही है।
मुत्तकी 9 अक्टूबर से छह दिन के भारत दौरे पर हैं, जो 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद पहला उच्चस्तरीय दौरा है। 11 अक्टूबर को देवबंद में दारुल उलूम के उप-कुलपति मौलाना अबुल कासिम नोमानी और जामियत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने उनका फूलों से स्वागत किया। सैकड़ों छात्र और स्थानीय लोग मुत्तकी से मिलने पहुंचे, लेकिन सुरक्षा कारणों से रोके गए। मुत्तकी ने हदीस का अध्ययन किया और उन्हें ‘कासमी’ उपाधि दी गई, जो दारुल उलूम से शैक्षिक जुड़ाव का प्रतीक है। उन्होंने कहा, “भारत-अफगान रिश्ते मजबूत होंगे। काबुल आएं, हम नए राजनयिक भेजेंगे।”
जावेद अख्तर ने 13 अक्टूबर को X पर लिखा, “मैं शर्म से सिर झुका लेता हूं, जब देखता हूं कि दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकी समूह तालिबान के प्रतिनिधि को कितना सम्मान और स्वागत मिल रहा है।” उन्होंने देवबंद पर निशाना साधते हुए कहा, “देवबंद को शर्मिंदगी होनी चाहिए कि उन्होंने अपने ‘इस्लामिक हीरो’ को ऐसा सम्मान दिया, जो लड़कियों की शिक्षा पर पूरी तरह प्रतिबंध के लिए जिम्मेदार है। मेरे भारतीय भाई-बहन, हमारे साथ क्या हो रहा है?” अख्तर ने दिल्ली में मुत्तकी की प्रेस कॉन्फ्रेंस से महिला पत्रकारों को बाहर रखने पर भी तंज कसा।
यह विवाद तब और बढ़ा, जब पता चला कि 10 अक्टूबर को दिल्ली में मुत्तकी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला पत्रकारों को शामिल नहीं किया गया। विपक्षी नेताओं ने इसे “महिलाओं का अपमान” बताया। 12 अक्टूबर को मुत्तकी ने दूसरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिलाओं को बुलाया, दावा किया कि “पहली कॉन्फ्रेंस जल्दबाजी में थी।” विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनकी कोई भूमिका नहीं थी।
मुत्तकी ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात में चाबहार बंदरगाह के विकास और वाघा बॉर्डर से व्यापार की बात की। भारत ने काबुल में अपनी टेक्निकल मिशन को पूर्ण दूतावास में अपग्रेड करने का ऐलान किया, हालांकि तालिबान सरकार को मान्यता नहीं दी।
विपक्ष ने इस दौरे को बीजेपी सरकार की “दोहरी नीति” बताया। AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, “भारत में हिजाब पर बैन, लेकिन तालिबान का स्वागत?” सोशल मीडिया पर #TalibanInDeoband ट्रेंड कर रहा है, जहां लोग इसे गंगा-जमुनी तहजीब बनाम कट्टरता की बहस कह रहे हैं। कुछ ने इसे भारत की कूटनीति का हिस्सा बताया, तो कुछ ने नैतिकता पर सवाल उठाए।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत तालिबान से रिश्ते सुधारकर क्षेत्रीय स्थिरता और आतंकवाद पर नजर रखना चाहता है। लेकिन अख्तर जैसे बुद्धिजीवियों का मानना है कि यह स्वागत तालिबान की नीतियों को परोक्ष समर्थन देता है। क्या यह कूटनीति का हिस्सा है या नैतिक चूक? बहस जारी है।
