अन्तर्राष्ट्रीय

‘धक्का दिया, जानवरों की तरह ट्रीट…’ इजरायल पर ग्रेटा थनबर्ग से दुर्व्यवहार के आरोप, एक्टिविस्टों ने लगाए यातना के गंभीर इल्जाम

‘धक्का दिया, जानवरों की तरह ट्रीट…’ इजरायल पर ग्रेटा थनबर्ग से दुर्व्यवहार के आरोप, एक्टिविस्टों ने लगाए यातना के गंभीर इल्जाम

स्वीडिश जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग के साथ इजरायली सेना द्वारा कथित दुर्व्यवहार के आरोपों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हंगामा मचा दिया है। गाजा के लिए सहायता ले जा रहे ‘ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला’ को इजरायल ने अंतरराष्ट्रीय जल सीमा में ही रोक लिया था, जिसमें थनबर्ग सहित 450 से अधिक एक्टिविस्ट हिरासत में लिए गए। अब डिपोर्ट किए गए एक्टिविस्टों ने थनबर्ग के साथ मारपीट, बाल खींचना, इजरायली झंडा चूमने को मजबूर करना और प्रोपेगैंडा के रूप में इस्तेमाल करने जैसे आरोप लगाए हैं। एक्टिविस्टों का कहना है कि उन्हें ‘जानवरों की तरह’ ट्रीट किया गया।

घटना की शुरुआत 2 अक्टूबर को हुई, जब इजरायली नौसेना ने 40 से अधिक नावों वाले इस फ्लोटिला को गाजा की नौसेना नाकाबंदी तोड़ने से पहले ही हाईजैक कर लिया। फ्लोटिला का उद्देश्य गाजा में युद्ध प्रभावित क्षेत्रों के लिए दवाइयां, भोजन और अन्य सहायता पहुंचाना था। थनबर्ग, जो 22 वर्ष की हैं, इस अभियान का हिस्सा बनीं, जिसके बाद इजरायली सेना ने उन्हें और अन्य को हिरासत में ले लिया। 4 अक्टूबर को तुर्की पहुंचे 137 एक्टिविस्टों ने इस्तांबुल एयरपोर्ट पर मीडिया को बताया कि हिरासत के दौरान थनबर्ग को विशेष रूप से निशाना बनाया गया।

तुर्की पत्रकार और फ्लोटिला सदस्य एर्सिन चेलिक ने सीएनएन तुर्क को बताया, “हमारी आंखों के सामने इजरायली सैनिकों ने छोटी ग्रेटा के बाल खींचे, उसे पीटा और इजरायली झंडा चूमने को मजबूर किया। उन्होंने उसके साथ सब कुछ किया जो कल्पना कीजिए जा सकता है, ताकि बाकियों को चेतावनी मिले।” मलेशियन एक्टिविस्ट हाजवानी हेल्मी ने रॉयटर्स को कहा, “यह आपदा थी। उन्होंने हमें जानवरों की तरह ट्रीट किया। थनबर्ग को धक्का दिया गया और इजरायली झंडा पहनाने को मजबूर किया। हमें साफ पानी, भोजन या दवाइयां नहीं दी गईं।” अमेरिकी एक्टिविस्ट विंडफील्ड बिवर ने आरोप लगाया कि थनबर्ग को “भयानक तरीके से ट्रीट किया गया” और प्रोपेगैंडा के लिए इस्तेमाल किया गया। उन्होंने बताया कि इजरायल के दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बेन-ग्विर के आने पर थनबर्ग को एक कमरे में धकेल दिया गया।

स्वीडिश विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने थनबर्ग के परिवार को ईमेल में बताया कि उन्होंने हिरासत में थनबर्ग से मुलाकात की, जहां उन्होंने डिहाइड्रेशन, अपर्याप्त भोजन-पानी और बेडबग्स से होने वाली चकत्तों की शिकायत की। अधिकारी ने लिखा, “वह कठोर सतहों पर लंबे समय तक बैठी रहीं। एक अन्य कैदी ने बताया कि थनबर्ग को झंडे पकड़ने के लिए मजबूर किया गया और तस्वीरें ली गईं।” गार्जियन ने इस ईमेल को प्राप्त किया है। इटालियन पत्रकार लोरेंजो अगोस्टिनो ने कहा, “ग्रेटा को इजरायली झंडे में लपेटकर ट्रॉफी की तरह प्रदर्शित किया गया।”

इजरायल ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने एक्स पर पोस्ट किया, “सभी हिरासत में लिए गए एक्टिविस्ट सुरक्षित और स्वस्थ हैं। हम शेष डिपोर्टेशन जल्द पूरा करना चाहते हैं।” मंत्रालय ने कुछ सदस्यों पर “डिपोर्टेशन प्रक्रिया में जानबूझकर बाधा डालने” का आरोप लगाया, लेकिन कोई सबूत नहीं दिया। अधिकार संगठन अदाला ने कहा कि कत्ज़ीओट जेल में कैदियों को भोजन-पानी से वंचित रखा गया और शारीरिक दुर्व्यवहार किया गया।

यह घटना गाजा युद्ध के संदर्भ में हो रही है, जो 2023 के हामास हमले के बाद शुरू हुआ। फ्लोटिला अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन मानते हुए इजरायल ने रोका, लेकिन एक्टिविस्ट इसे “समुद्री डकैती” बता रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ ने जांच की मांग की है। थनबर्ग की डिपोर्टेशन की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन एक्टिविस्टों के बयानों ने सोशल मीडिया पर #FreeGreta और #EndGazaBlockade ट्रेंड कराया। पॉप क्रेव ने पोस्ट किया, “ग्रेटा थनबर्ग को बेडबग्स से भरी जेल में रखा गया, अपर्याप्त भोजन-पानी दिया गया।” कई यूजर्स ने इजरायल पर प्रतिबंध लगाने की मांग की।

यह मामला इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष में मानवाधिकार उल्लंघनों पर नई बहस छेड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि थनबर्ग जैसे वैश्विक चेहरे का मामला अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाएगा। फिलहाल, इजरायल ने चुप्पी साध रखी है, जबकि एक्टिविस्ट न्याय की लड़ाई जारी रखने का ऐलान कर चुके हैं।

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