रामदास कदम के सनसनीखेज आरोप: बाल ठाकरे की वसीयत पर नया विवाद
महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर से शिवसेना के दो गुटों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। एकनाथ शिंदे गुट के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री रामदास कदम ने उद्धव ठाकरे पर दिवंगत शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे की वसीयत और मृत्यु से जुड़े गंभीर आरोप लगाते हुए राजनीतिक हलचल मचा दी है। कदम ने दावा किया कि बाल ठाकरे का पार्थिव शरीर निधन के बाद दो दिनों तक मातोश्री में रखा गया था और उद्धव ने उनके हाथों के निशान (अंगूठा छाप) लिए थे। उन्होंने वसीयत की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा कि उद्धव को बालासाहेब का नाम लेने का कोई हक नहीं है।
आरोपों का पूरा ब्योरा
रामदास कदम ने गुरुवार (2 अक्टूबर) को गोरेगाव के नेस्को पार्क में शिंदे गुट की दशहरा रैली में ये बयान दिए। उनके प्रमुख दावे इस प्रकार हैं:
– शरीर को दो दिन रखने का दावा: बाल ठाकरे का निधन 17 नवंबर 2012 को हुआ था। कदम ने कहा, “डॉक्टरों ने बताया था कि पार्थिव शरीर दो दिनों तक मातोश्री में रखा गया। मैंने उद्धव से पैरों के निशान लेने को कहा, लेकिन उन्होंने कहा कि हथेलियों के निशान ले लिए हैं।”
– वसीयत पर सवाल: कदम ने पूछा, “बालासाहेब की वसीयत किसने लिखी? यह कब लिखी गई और किसने हस्ताक्षर किए? इन निशानों का वसीयत से क्या संबंध है?” उन्होंने मांग की कि इसकी सखोल जांच होनी चाहिए।
– राजनीतिक हमला: कदम ने उद्धव पर तंज कसते हुए कहा, “उद्धव ठाकरे को बालासाहेब का नाम लेने का हक नहीं। वे शिवसेना को बर्बाद कर चुके हैं।” यह बयान शिंदे गुट की रैली में बाल ठाकरे की विरासत को लेकर दिए गए थे, जहां कदम ने शिंदे को ही असली उत्तराधिकारी बताया।
ये आरोप शिवसेना (शिंदे गुट) और शिवसेना (यूबीटी) के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद को और भड़ाने वाले हैं, खासकर विधानसभा चुनावों के नजदीक आते हुए।
उद्धव गुट का तीखा पलटवार
शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने कदम के बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। राउत ने कहा:
– “रामदास कदम के मुंह में किसी ने गोबर ठूंस दिया है, जो अब बाहर आ रहा है।” उन्होंने कदम को नमकहराम बताया और कहा कि बाल ठाकरे ने ही कदम को बड़ा नेता बनाया, अब वे बालासाहेब के प्रति विश्वासघात कर रहे हैं।
– राउत ने जोर देकर कहा, “ये झूठे और रटे-रटाए आरोप हैं। सत्ता के लालच में शिंदे गुट बाल ठाकरे की विरासत को खराब करने पर तुला है।” उन्होंने कदम के पांच साल के मंत्री पद को याद दिलाते हुए कहा कि अब ये बातें याद आना बेईमानी है।
उद्धव ठाकरे की ओर से अभी कोई सीधा बयान नहीं आया है, लेकिन पार्टी के अंदरूनी स्रोतों के मुताबिक, ये आरोपों को कानूनी रूप से चुनौती दी जा सकती है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
– बाल ठाकरे की 2012 में मृत्यु के बाद उनकी वसीयत को लेकर पहले भी सवाल उठे थे, लेकिन यह पहली बार है जब इतने सनसनीखेज आरोप लगाए गए हैं।
– शिंदे गुट (ईकेस) और उद्धव गुट (यूबीटी) के बीच 2022 के विद्रोह के बाद से ही बाल ठाकरे की ‘असली’ विरासत को लेकर जंग चल रही है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में दोनों गुटों को चुनाव चिन्ह पर फैसला सुरक्षित रखा है।
– यह विवाद महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव (नवंबर 2025) से ठीक पहले आया है, जहां दोनों गुट अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
प्रशासन ने दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है। यदि कोई नया विकास होता है, तो अदालत या चुनाव आयोग की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति में लंबे समय तक चर्चा का विषय बनेगा।
यह जानकारी प्रमुख समाचार स्रोतों पर आधारित है। सटीक तथ्यों की पुष्टि के लिए आधिकारिक बयानों का इंतजार करें।
