कोल्ड्रिफ कफ सिरप की बिक्री MP में बैन: 9 बच्चों की मौत के बाद CM मोहन यादव ने कहा- दोषियों को नहीं छोड़ेंगे
कोल्ड्रिफ कफ सिरप की बिक्री MP में बैन: 9 बच्चों की मौत के बाद CM मोहन यादव ने कहा- दोषियों को नहीं छोड़ेंगे
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में पिछले 30 दिनों में 9 मासूम बच्चों की मौत के बाद राज्य सरकार ने कोल्ड्रिफ कफ सिरप की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे ‘अत्यंत दुःखद’ बताते हुए कहा कि दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी सिरप में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) नामक जहरीले रसायन की अधिक मात्रा पाए जाने की पुष्टि की है, जो किडनी फेलियर का कारण बन सकता है।
घटना का पूरा विवरण
– मौतों का सिलसिला: छिंदवाड़ा जिले में 7 सितंबर से अब तक 9 बच्चों की मौत किडनी फेलियर से हो चुकी है। शुरुआत में 6 मौतें बताई गईं, लेकिन अब आंकड़ा 9 तक पहुंच गया है। बायोप्सी रिपोर्ट्स में किडनी टिश्यू में DEG की मौजूदगी पाई गई, जो सिरप के सेवन से जुड़ी है। यह मामला अगस्त 2025 से शुरू हुआ, जब बच्चों को खांसी-जुकाम के लिए कोल्ड्रिफ और नेक्स्ट्रो-डीएस सिरप दिए गए।
– प्रतिबंध की घोषणा: छिंदवाड़ा कलेक्टर शीलेंद्र सिंह ने 1 अक्टूबर को जिले में दोनों सिरपों पर स्थानीय बैन लगाया। अब मुख्यमंत्री के आदेश पर पूरे मध्य प्रदेश में कोल्ड्रिफ सिरप की बिक्री, वितरण और स्टॉक पर रोक लगा दी गई है। मेडिकल स्टोर्स को केवल मानक सिरप उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
– उत्पादन और वितरण: सिरप का निर्माण तमिलनाडु के कांचीपुरम जिले में स्थित स्रेसन फार्मास्यूटिकल्स (Sresan Pharmaceuticals) द्वारा किया जाता है। कंपनी राजस्थान, मध्य प्रदेश, पुदुच्चेरी और तमिलनाडु को सप्लाई करती है। बैच नंबर SR-13 (मैन्युफैक्चरिंग डेट: मई 2025, एक्सपायरी: अप्रैल 2027) पर विशेष नजर है।
CM मोहन यादव का बयान
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट कर कहा: “छिंदवाड़ा में कोल्ड्रिफ सिरप के कारण हुई बच्चों की मृत्यु अत्यंत दुःखद है। इस सिरप की बिक्री को पूरे मध्य प्रदेश में बैन कर दिया गया है। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। जांच में जो भी जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।” उन्होंने प्रभावित परिवारों को 4-4 लाख रुपये की सहायता राशि भी घोषित की।
अन्य राज्यों में प्रभाव
– तमिलनाडु: 1 अक्टूबर से कोल्ड्रिफ सिरप की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध। ड्रग्स कंट्रोल डिपार्टमेंट ने फैक्ट्री का निरीक्षण किया और सैंपल लैब में भेजे। उत्पादन अस्थायी रूप से रोका गया।
– राजस्थान: सीकर और भरतपुर में 3 बच्चों की मौत के बाद स्थानीय स्तर पर बैन। स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों को सलाह जारी की कि 2 साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप न दें।
– केंद्रीय जांच: नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) ने मध्य प्रदेश और राजस्थान से सैंपल कलेक्ट किए। यूनियन हेल्थ मिनिस्ट्री ने मल्टी-एजेंसी प्रोब शुरू की। 594 बोतलें वितरित हो चुकी थीं, जिनकी जांच जारी है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और जांच
– कांग्रेस का आरोप: पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया, कहा कि ‘ब्रेक ऑयल सॉल्वेंट’ मिलाने से मौतें हुईं। उन्होंने तत्काल जांच की मांग की।
– उपमुख्यमंत्री का पुराना बयान: 1 अक्टूबर को डिप्टी CM राजेंद्र शुक्ला ने मौतों को सिरप से जोड़ने से इनकार किया था, लेकिन अब केंद्रीय रिपोर्ट के बाद सरकार का रुख सख्त हो गया।
– चल रही जांच: सैंपल राज्य ड्रग टेस्टिंग लैबोरेट्रीज और सेंट्रल लैब्स में परीक्षणाधीन। ICMR और नागपुर लैब से रिपोर्ट का इंतजार। एयर एम्बुलेंस सेवा भी प्रभावित इलाकों में तैनात की गई।
यह घटना 2023 के कफ सिरप कांड की याद दिलाती है, जहां विषाक्त सिरप से कई बच्चों की जान गई थी। सरकार ने डॉक्टरों, फार्मासिस्टों और अभिभावकों को अलर्ट किया है कि खांसी-जुकाम पर तुरंत सरकारी अस्पताल जाएं। यदि कोई नया अपडेट आता है, तो लैब रिपोर्ट्स पर नजर रहेगी। प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना!
