संभल मस्जिद ध्वस्तीकरण मामले में मुस्लिम पक्ष को बड़ा झटका: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की
संभल मस्जिद ध्वस्तीकरण मामले में मुस्लिम पक्ष को बड़ा झटका: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की
उत्तर प्रदेश के संभल जिले के रायां बुजुर्ग गांव में सरकारी तालाब और जमीन पर अवैध रूप से बनी मस्जिद, बारात घर और अस्पताल के ध्वस्तीकरण के खिलाफ मुस्लिम पक्ष की याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। यह फैसला जस्टिस दिनेश पाठक की सिंगल बेंच ने शनिवार सुबह 10 बजे की सुनवाई के दौरान सुनाया। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) में अपील दाखिल करने का निर्देश दिया है, लेकिन ध्वस्तीकरण पर कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई।
मामले का पृष्ठभूमि
– ध्वस्तीकरण कार्रवाई: 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) को प्रशासन ने तालाब की 2860 वर्ग मीटर सरकारी जमीन पर बने मैरिज हॉल को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया। मस्जिद कमेटी को मस्जिद हटाने के लिए 48 घंटे का समय दिया गया था। शुक्रवार (3 अक्टूबर) को भी कार्रवाई जारी रही, लेकिन मस्जिद अभी पूरी तरह जमींदोज नहीं हुई है।
– याचिका का आधार: मस्जिद शरीफ गोसुलबारा रावां बुजुर्ग और मुतवल्ली मिंजर की ओर से दाखिल याचिका में ध्वस्तीकरण आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई। पक्ष ने दावा किया कि कार्रवाई छुट्टी के दिन की गई, जिससे भीड़भाड़ और हादसे का खतरा था। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों (बुलडोजर एक्शन पर रोक) का हवाला दिया गया।
– कोर्ट की सुनवाई: दशहरा अवकाश के दौरान अर्जेंट सुनवाई की मांग पर शुक्रवार को पहली सुनवाई हुई, जहां कोर्ट ने कागजात मंगवाए। शनिवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिका निस्तारित कर दी गई।
कोर्ट के प्रमुख निर्देश
– मुस्लिम पक्ष को ट्रायल कोर्ट में जल्द अपील दाखिल करने को कहा गया।
– राज्य सरकार, संभल के डीएम, एसपी, एडीएम, तहसीलदार और ग्राम सभा को पक्षकार बनाया गया था।
– ध्वस्तीकरण जारी रहने की संभावना; प्रशासन ने अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई को वैध बताया।
पक्षों की प्रतिक्रियाएं
– मुस्लिम पक्ष: अधिवक्ता अरविंद कुमार त्रिपाठी और शशांक त्रिपाठी ने फैसले पर निराशा जताई। वे सुप्रीम कोर्ट जाने की योजना बना रहे हैं।
– प्रशासन: डीएम राजेंद्र पैंसिया और एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई ने कार्रवाई को कानूनी बताया, जो सरकारी संपत्ति की रक्षा के लिए आवश्यक थी।
यह मामला संभल में हाल के धार्मिक विवादों (जैसे जामा मस्जिद सर्वे) से जुड़ा माना जा रहा है, जहां मई 2025 में भी हाईकोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज की थी। प्रशासन ने शांति बनाए रखने के लिए फ्लैग मार्च किया है। यदि कोई नया अपडेट आता है, तो ट्रायल कोर्ट की सुनवाई पर नजर रहेगी।
यह जानकारी प्रमुख समाचार स्रोतों पर आधारित है। सटीक कानूनी सलाह के लिए विशेषज्ञ से संपर्क करें।
