Thursday, September 10, 2026
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दिल्ली में प्रॉपर्टी खरीदना हो जाएगा महंगा: सर्किल रेट संशोधन पर 15 दिनों में लोगों से मांगे गए सुझाव

दिल्ली में प्रॉपर्टी खरीदना हो जाएगा महंगा: सर्किल रेट संशोधन पर 15 दिनों में लोगों से मांगे गए सुझाव

दिल्ली सरकार ने शहर भर में सर्किल रेट (प्रॉपर्टी की न्यूनतम वैल्यूएशन रेट) को संशोधित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह रेट्स आखिरी बार 2014 में अपडेट किए गए थे, और अब इन्हें बाजार की वर्तमान स्थिति के अनुरूप बनाने के लिए सार्वजनिक सुझाव मांगे गए हैं। इससे प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन और स्टांप ड्यूटी के खर्च में इजाफा हो सकता है, जिसका असर आम खरीदारों पर पड़ेगा। सुझाव 15 दिनों के अंदर ईमेल से भेजने होंगे, और नई दरें कुछ महीनों में लागू हो सकती हैं।

राजस्व विभाग ने 1 अक्टूबर को एक सर्कुलर जारी कर कहा कि सर्किल रेट्स को बाजार मूल्यों से जोड़ने का उद्देश्य प्रॉपर्टी लेन-देन में पारदर्शिता लाना है। इससे सरकार की आय भी बढ़ेगी, क्योंकि स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस इन रेट्स पर आधारित होती है। वर्तमान में दिल्ली के इलाकों को A से H कैटेगरी में बांटा गया है, जहां A कैटेगरी (जैसे गोल्फ लिंक्स, वसंत विहार) में सबसे ऊंची दरें हैं। कृषि भूमि की दरें 2008 से 53 लाख रुपये प्रति एकड़ पर अटकी हुई हैं।

सुझाव कैसे दें?

– ईमेल आईडी: suggestionondelhicirclerates@gmail.com

– समय सीमा: नोटिफिकेशन की तारीख से 15 दिन (लगभग 15 अक्टूबर तक)

– कौन दे सकते हैं: रेसिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA), प्रॉपर्टी ओनर्स, इंडस्ट्री बॉडीज, अन्य स्टेकहोल्डर्स।

– रेफरेंस: 2008 (कृषि भूमि) और 2014 (रेजिडेंशियल/कमर्शियल) की पुरानी नोटिफिकेशन देखें।

सरकार ने जून 2025 में डिविजनल कमिश्नर की अगुवाई में एक कमिटी भी गठित की थी, जो बाजार सर्वे के आधार पर रिपोर्ट सौंपेगी।

लोगों के सुझाव और चिंताएं

प्रारंभिक प्रतिक्रियाओं में RWAs और प्रॉपर्टी ओनर्स ने मिश्रित राय जताई है:

– URJA (यूनाइटेड रेसिडेंट्स जॉइंट एक्शन) के अध्यक्ष अतुल गोयल: “प्रॉपर्टी कीमतें पहले से ही अनियंत्रित हैं। सर्किल रेट्स को कम करना चाहिए, न कि बढ़ाना। पहले मास्टर प्लान लागू करें, सीवेज जैसी बेसिक समस्याएं ठीक करें।”

– दिल्ली पंचायत संघ के अध्यक्ष थान सिंह यादव: “ग्रामीण और कृषि हितों की रक्षा करें। DDA द्वारा रेजिडेंशियल लैंड को कमर्शियल नोटिफाई करने पर दरें 200% बढ़ाएं या डी-नोटिफाई करें। विकास के स्तर के आधार पर अलग-अलग दरें तय करें।”

विशेषज्ञों का मानना है कि संशोधन से A-H कैटेगरी में सब-कैटेगरी बन सकती हैं, और कुछ इलाकों में 35% तक बढ़ोतरी हो सकती है। इससे प्रॉपर्टी खरीदना महंगा हो जाएगा, लेकिन ब्लैक मनी पर अंकुश लगेगा।

अगर आप प्रॉपर्टी डील करने वाले हैं, तो जल्द सुझाव दें या पुरानी दरों का फायदा उठाएं।

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