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चारधाम परियोजना पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार की मांग: मुरली मनोहर जोशी ने CJI को क्यों लिखा पत्र

चारधाम परियोजना पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार की मांग: मुरली मनोहर जोशी ने CJI को क्यों लिखा पत्र

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने चारधाम परियोजना के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले पर पुनर्विचार की मांग करते हुए मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस बी.आर. गवई को पत्र लिखा है। पत्र में जोशी ने हिमालयी क्षेत्र के पर्यावरणीय संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के खतरे पर जोर देते हुए कहा है कि परियोजना से गंगा के उद्गम स्थल को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। यह पत्र 26 सितंबर को लिखा गया, जो हिमालय संरक्षण के लिए पूर्व मंत्रियों की बढ़ती चिंता को दर्शाता है।

पत्र का मुख्य कारण: पर्यावरणीय क्षति और सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल

मुरली मनोहर जोशी ने पत्र में सुप्रीम कोर्ट के 25 सितंबर 2025 के उस आदेश का जिक्र किया है, जिसमें चारधाम परियोजना के तहत सड़कों के चौड़ीकरण (दो-लेन से चार-लेन) को पर्यावरणीय मंजूरी दी गई थी। जोशी का तर्क है कि यह फैसला हिमालय की नाजुक पारिस्थितिकी को नजरअंदाज करता है। उन्होंने चेतावनी दी कि चौड़ी सड़कों के निर्माण से पहाड़ों की स्थिरता प्रभावित होगी, जंगल नष्ट होंगे और भूस्खलन का खतरा बढ़ेगा। विशेष रूप से, भागीरथी इको-सेंसिटिव जोन (गंगा का उद्गम स्थल) को क्षति पहुंचने की आशंका जताई गई है, जो हाल ही में धराली आपदा का केंद्र रहा।

जोशी ने जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में कहा, “हिमालय भारत की जीवन रेखा है। इस फैसले को बरकरार रखा गया तो अपूरणीय क्षति होगी।” उन्होंने CJI से तुरंत संज्ञान लेने और पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई की अपील की। यह पत्र न सिर्फ जोशी का व्यक्तिगत प्रयास है, बल्कि पूर्व केंद्रीय मंत्री करण सिंह के साथ संयुक्त रूप से लिखा गया, जो हिमालय संरक्षण अभियान का हिस्सा है।

पृष्ठभूमि: चारधाम परियोजना पर लंबे समय से विवाद

चारधाम परियोजना 2016 में शुरू हुई थी, जिसका उद्देश्य यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ को जोड़ने वाली 900 किमी सड़कों को चौड़ा करना है। सरकार का दावा है कि इससे तीर्थयात्रियों की सुविधा बढ़ेगी और आपातकालीन पहुंच आसान होगी। लेकिन पर्यावरणविदों और विशेषज्ञों ने शुरू से ही विरोध किया, क्योंकि यह हिमालय की संवेदनशीलता को खतरे में डालती है। सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के आदेश पर रोक लगाई थी, लेकिन 2025 में मंजूरी दे दी।

जोशी, जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री रह चुके हैं, पर्यावरण मुद्दों पर हमेशा मुखर रहे हैं। उनका यह कदम बीजेपी के अंदर भी चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि परियोजना केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है। X (पूर्व ट्विटर) पर यूजर्स इसे ‘जोशी जी का साहसिक कदम’ बता रहे हैं, जहां एक पोस्ट में लिखा गया, “पूर्व मंत्री ने ही सरकार को आईना दिखाया। हिमालय बचाओ!”

आगे की राह: क्या CJI लेंगे संज्ञान?

जोशी के पत्र के बाद पर्यावरण समर्थक आशान्वित हैं। सुप्रीम कोर्ट में पहले से कई याचिकाएं लंबित हैं, और यह पत्र पुनर्विचार की प्रक्रिया को गति दे सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि हिमालय में बढ़ते आपदाओं (जैसे 2023 की केदारनाथ बाढ़) को देखते हुए यह फैसला जरूरी है। क्या कोर्ट परियोजना पर रोक लगाएगा? अपडेट्स के लिए बने रहें।

(रिपोर्ट: unnatbharatlive.com न्यूज डेस्क | स्रोत: विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स)

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