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ईरान ने ICBM मिसाइल का दावा, रेंज 10 हजार किमी से ज्यादा, अमेरिका-इजरायल में हड़कंप

ईरान ने ICBM मिसाइल का दावा, रेंज 10 हजार किमी से ज्यादा… अमेरिका-इजरायल में हड़कंप

तेहरान: ईरान ने एक बार फिर मिसाइल कार्यक्रम से दुनिया को हिलाने का दावा किया है। एक ईरानी सांसद ने 20 सितंबर को घोषणा की कि देश ने इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) का सफल परीक्षण कर लिया है, जिसकी रेंज 10,000 किलोमीटर से अधिक बताई जा रही है। यह मिसाइल अमेरिका के पूर्वी तट तक पहुंच सकती है, जिससे वाशिंगटन और इजरायल में चिंता की लहर दौड़ गई है। तेहरान के आसमान में दिखे धुएं के गुबार के वीडियो वायरल होने के बाद यह खुलासा हुआ, लेकिन पश्चिमी खुफिया एजेंसियां इसे अतिशयोक्ति मान रही हैं।

ईरानी संसद के सदस्य ने राज्य मीडिया को बताया कि यह परीक्षण ‘सफल’ रहा और मिसाइल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (SLV) सिमोर्ग प्रोग्राम पर आधारित है। ईरान का दावा है कि यह ICBM यूरोप और अमेरिका को निशाना बना सकती है, जो उसके परमाणु कार्यक्रम के साथ मिलकर क्षेत्रीय संतुलन को बिगाड़ सकता है। हाल ही में जून 2025 में इजरायल-ईरान संघर्ष के दौरान ईरान ने 500 मिसाइलें दागीं, लेकिन 94% विफल रहीं। अब ICBM का यह दावा ईरान की सैन्य क्षमता को नई ऊंचाई देने का प्रयास लगता है।

अमेरिकी डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी (DIA) की 2025 रिपोर्ट के अनुसार, ईरान 2035 तक ICBM विकसित कर सकता है, यदि वह अभी निर्णय ले ले। लेकिन अभी उसके पास मीडियम-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें (MRBM) जैसे खोर्रमशहर-4 (2,000-3,000 किमी रेंज) और फतह-2 हैं। आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन की रिपोर्ट कहती है कि सिमोर्ग SLV ICBM के लिए आधार हो सकता है, लेकिन यह प्रोटोटाइप स्टेज में है। ईरान के पास 3,000 से अधिक मिसाइलें हैं, लेकिन कोई पुष्ट ICBM नहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान को नॉर्थ कोरिया या अन्य देशों से तकनीकी मदद की जरूरत पड़ेगी।

इस दावे से अमेरिका और इजरायल में हड़कंप मच गया। अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा, “हम ईरान के मिसाइल कार्यक्रम पर नजर रखे हुए हैं और इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा मानते हैं।” इजरायल के प्रधानमंत्री ने इसे “ईरानी आक्रामकता का नया अध्याय” बताया। सऊदी अरब और यूएई जैसे खाड़ी देश भी चिंतित हैं, क्योंकि यह मिसाइल उनके क्षेत्र को प्रभावित कर सकती है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस पर चर्चा की मांग उठी है। ईरान ने जवाब में कहा, “यह हमारा रक्षा अधिकार है, जो अमेरिकी प्रतिबंधों के जवाब में विकसित किया गया।”

ईरान का मिसाइल कार्यक्रम 1980 के दशक से चला आ रहा है, जब उसने स्कड मिसाइलें लीबिया और नॉर्थ कोरिया से प्राप्त कीं। 2025 में फरवरी में 1,000 टन सोडियम पर्क्लोरेट का आयात हुआ, जो मिसाइल ईंधन के लिए इस्तेमाल होता है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि ICBM वास्तविक हो गया, तो यह मध्य पूर्व में हथियारों की होड़ तेज कर देगा। क्या यह दावा सच्चाई है या प्रचार? खुफिया एजेंसियां जांच में जुटी हैं, लेकिन तनाव बढ़ता ही जा रहा है।

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