गडकरी का कार कंपनियों को अल्टीमेटम: जल्द बदलेगा देश का फ्यूल सिस्टम, अब 100% इथेनॉल और फ्लेक्स इंजन पर चलेगा जोर
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए एक बड़ा ‘अलर्ट’ जारी किया है। हाल ही में (21-23 अप्रैल 2026) आयोजित ग्रीन ट्रांसपोर्ट कॉन्क्लेव में उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि भारत का भविष्य 100% इथेनॉल (E100) और फ्लेक्स फ्यूल (Flex-Fuel) इंजन में है।
नितिन गडकरी के इस कदम के मुख्य बिंदु और कार कंपनियों के लिए चेतावनी नीचे दी गई है:
1. 100% इथेनॉल (E100) का लक्ष्य
गडकरी ने कहा कि पश्चिम एशिया (Middle East) में चल रहे युद्ध और अस्थिरता के कारण भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए आत्मनिर्भर होना पड़ेगा।
चेतावनी: उन्होंने कार कंपनियों को E85 से E100 (100% इथेनॉल) क्षमता वाले इंजन बनाने पर ध्यान केंद्रित करने को कहा है।
नया नियम: सरकार जल्द ही एक नया नोटिफिकेशन जारी करने वाली है, जिसमें E85 से E100 ईंधन पर चलने वाले वाहनों के लिए टेस्टिंग मानक (Test Requirements) तय किए जाएंगे।
2. फ्लेक्स फ्यूल (Flex-Fuel) अनिवार्य करने की ओर कदम
मंत्री ने ऑटो कंपनियों को याद दिलाया कि वे केवल पेट्रोल-डीजल के भरोसे न रहें।
फ्लेक्स इंजन: ऐसे इंजन जो 20% से लेकर 100% तक किसी भी मात्रा में मिले इथेनॉल-पेट्रोल मिश्रण पर चल सकें।
सबूत: गडकरी खुद दिल्ली में टोयोटा की ऐसी प्रोटोटाइप कार (Innova Hycross Flex-Fuel) का उपयोग कर रहे हैं जो पूरी तरह इथेनॉल पर चलती है।
3. कार कंपनियों पर दबाव और CAFE-3 नॉर्म्स
सरकार CAFE-3 (Corporate Average Fuel Efficiency) नियमों को और सख्त करने की तैयारी में है, जो अप्रैल 2027 से लागू हो सकते हैं।
लक्ष्य: कंपनियों को अपने वाहनों का औसत कार्बन उत्सर्जन 113 g/km से घटाकर 71.5 g/km तक लाना पड़ सकता है।
कंपनियों का तर्क: कंपनियां इस लक्ष्य को बहुत कठिन बता रही हैं, लेकिन गडकरी ने साफ किया है कि प्रदूषण कम करने और तेल आयात (₹22 लाख करोड़) घटाने के लिए तकनीक में बदलाव जरूरी है।
आम आदमी पर क्या होगा असर?
सस्ता ईंधन: इथेनॉल की कीमत पेट्रोल की तुलना में काफी कम (लगभग ₹60-65 प्रति लीटर) हो सकती है।
माइलेज की चिंता: इथेनॉल पर चलने वाली कारों का माइलेज पेट्रोल की तुलना में 27-30% कम हो सकता है, लेकिन कम कीमत इस नुकसान की भरपाई कर देगी।
नई कार की कीमत: फ्लेक्स फ्यूल इंजन और प्रदूषण मानकों के कारण भविष्य में नई कारों की कीमतें बढ़ सकती हैं।
निष्कर्ष: गडकरी का संदेश साफ है— ऑटो कंपनियां या तो “ग्रीन फ्यूल” (Green Hydrogen/Ethanol) अपनाएं या पीछे छूटने के लिए तैयार रहें। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि पश्चिम एशिया संकट ने “आधा काम” तो पहले ही कर दिया है, अब बस कंपनियों को अपनी तकनीक बदलनी है।
