अन्तर्राष्ट्रीय

अराघची का 48 घंटे का ‘डिप्लोमैटिक मैराथन’: ओमान, पाकिस्तान और रूस के साथ ईरान की महा-रणनीति की इनसाइड स्टोरी

ईरान-अमेरिका (और इजराइल) के बीच फरवरी 2026 से चले सैन्य टकराव के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का सबसे संवेदनशील चोकपॉइंट बन गया है। ईरान ने इस जलमार्ग पर यातायात को सीमित कर दिया, जिससे वैश्विक तेल की कीमतें बढ़ीं और आपूर्ति प्रभावित हुई। अमेरिका ने ईरान पर नौसेना नाकाबंदी लगाई हुई है।

इस तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान मध्यस्थता कर रहा है, लेकिन बातचीत अटकी हुई है। इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अप्रैल 2026 के अंत में एक तीव्र कूटनीतिक दौरा शुरू किया — मात्र 48 घंटे में तीन देशों (पाकिस्तान, ओमान और रूस) की यात्रा। यह दौरा क्षेत्रीय गठबंधनों को मजबूत करने, होर्मुज पर दबाव कम करने और अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष बातचीत को आकार देने का प्रयास था।

दौरा का क्रम और टाइमलाइन (48 घंटे की मैराथन)

पहला पड़ाव: इस्लामाबाद (पाकिस्तान) — शुक्रवार/शनिवार (24-25 अप्रैल)। पाकिस्तान अमेरिका-ईरान के बीच मुख्य मध्यस्थ है। यहां अराघची ने पाकिस्तानी नेतृत्व (सैन्य और राजनीतिक) से मुलाकात की। ईरान ने होर्मुज खोलने के लिए तीन शर्तें (नाकाबंदी हटाना, युद्ध समाप्ति, न्यूक्लियर मुद्दे को टालना) पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका तक पहुंचाईं।

दूसरा पड़ाव: मस्कट (ओमान) — शनिवार/रविवार (26 अप्रैल)। ओमान होर्मुज के दूसरी तरफ स्थित है और पहले भी ईरान-अमेरिका के बीच मध्यस्थता कर चुका है। अराघची ने ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक और विदेश मंत्री से मुलाकात की। फोकस: होर्मुज में सुरक्षित नौवहन, पड़ोसी देशों के बीच समन्वय और क्षेत्रीय सुरक्षा। अराघची ने कहा — “हमारे पड़ोसी हमारी प्राथमिकता हैं।”

तीसरा पड़ाव: रूस (सेंट पीटर्सबर्ग) — सोमवार (27 अप्रैल)। यहां अराघची ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। रूस ईरान का प्रमुख रणनीतिक सहयोगी है। पुतिन ने मध्य पूर्व में शांति के लिए समर्थन देने का वादा किया। अराघची ने अमेरिका पर “अत्यधिक मांगें” रखने का आरोप लगाया और कहा कि पाकिस्तान में हुई पहली दौर की बातचीत में प्रगति के बावजूद अमेरिका की वजह से असफलता हुई।

48 घंटे में तीसरी बार पाकिस्तान: कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, ओमान से लौटकर अराघची ने रविवार को फिर पाकिस्तान का दौरा किया और बाद में रूस गए। कुल मिलाकर पाकिस्तान में उनकी गतिविधियां बहुत तीव्र रहीं।

इसके अलावा, अराघची ने सऊदी अरब, कतर और मिस्र के विदेश मंत्रियों से फोन पर बात की।

तीन देश, तीन एजेंडे

पाकिस्तान — मध्यस्थता और अमेरिका से अप्रत्यक्ष बातचीत

पाकिस्तान के माध्यम से ईरान ने अमेरिका को प्रस्ताव भेजा। मुख्य मुद्दा: होर्मुज खोलना, लेकिन शर्तों के साथ। ट्रंप ने ईरानी प्रस्ताव को अस्वीकार्य माना और अपने दूतों की यात्रा रद्द कर दी। ईरान प्रत्यक्ष बातचीत से बच रहा है और अप्रत्यक्ष (indirect) फॉर्मेट पर जोर दे रहा है।

ओमान — होर्मुज की सुरक्षा और क्षेत्रीय समन्वय

दोनों देश होर्मुज के तटवर्ती राज्य हैं। चर्चा का केंद्र: सुरक्षित पारगमन, नाविकों की रिहाई और वैश्विक आपूर्ति को बहाल करना। ईरान पड़ोसियों के साथ समन्वय बढ़ाकर अमेरिका पर दबाव कम करना चाहता है।

रूस — रणनीतिक समर्थन और युद्ध के बाद का समन्वय

रूस से सैन्य-राजनीतिक बैकिंग, युद्ध समाप्ति में मदद और पोस्ट-वार व्यवस्था पर चर्चा। पुतिन ने “रणनीतिक साझेदारी” बनाए रखने का आश्वासन दिया। ईरान अमेरिका के खिलाफ रूस-चीन अक्ष को मजबूत करना चाहता है।

बड़ी जियो-पॉलिटिक्स: क्या मायने रखता है यह दौरा?

ईरान की रणनीति: सीधे अमेरिका से बात करने के बजाय क्षेत्रीय गठबंधन (Pakistan-Oman-Russia) को सक्रिय कर दबाव बनाना। ईरान न्यूक्लियर और मिसाइल कार्यक्रम पर कोई तत्काल रियायत नहीं देना चाहता। होर्मुज को लीवरेज के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।

ट्रंप का रुख: “हम ब्लैकमेल नहीं होंगे”। अमेरिका नाकाबंदी को दबाव का हथियार मानता है और न्यूक्लियर मुद्दे को किसी भी डील में शामिल करना चाहता है। ट्रंप ने फोन पर बात करने का प्रस्ताव दिया, लेकिन ईरान अप्रत्यक्ष रास्ता पसंद कर रहा है।

क्षेत्रीय प्रभाव: खाड़ी देश (सऊदी, कतर आदि) चिंतित हैं। तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। भारत जैसे तेल आयातक देशों पर असर पड़ रहा है।

वैश्विक आयाम: रूस का समर्थन ईरान को मजबूती देता है, जबकि पाकिस्तान और ओमान शांति प्रक्रिया को जीवित रखने की कोशिश कर रहे हैं। यह दौरा दिखाता है कि ईरान युद्ध थकान महसूस कर रहा है लेकिन अपनी “रेड लाइन्स” (nuclear red lines और होर्मुज पर संप्रभुता) से पीछे नहीं हटना चाहता।

वर्तमान स्थिति (28 अप्रैल 2026)

होर्मुज अभी पूरी तरह सामान्य नहीं खुला है। यातायात आंशिक रूप से प्रभावित है।

अगले दौर की बातचीत की कोई निश्चित तारीख नहीं। पाकिस्तान मध्यस्थता जारी रखे हुए है।

अराघची ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह “गंभीर” नहीं है, जबकि ट्रंप कह रहे हैं कि अमेरिका के पास “कार्ड्स” हैं।

स्थिति बहुत तरल है — कोई भी गलत कदम बड़े टकराव को जन्म दे सकता है।

यह 48 घंटे की मैराथन ईरान की कूटनीतिक सक्रियता को दर्शाती है। ईरान अकेले नहीं लड़ना चाहता, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक सहयोगियों के साथ मिलकर बेहतर शर्तों पर डील करना चाहता है। आगे की अपडेट के लिए आधिकारिक बयानों पर नजर रखें।

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