Monday, April 27, 2026
धर्म

सर्व पितृ अमावस्या पर करें ये उपाय, पितरों का मिलेगा आशीर्वाद!

सर्व पितृ अमावस्या पर करें ये उपाय, पितरों का मिलेगा आशीर्वाद!

हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का समापन सर्व पितृ अमावस्या (Sarva Pitru Amavasya) के साथ होता है, जो पूर्वजों की आत्मा की शांति और आशीर्वाद प्राप्त करने का विशेष अवसर माना जाता है। 2025 में यह तिथि 21 सितंबर को पड़ेगी, जब आश्विन मास की अमावस्या पर पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान का महत्व बढ़ जाता है। पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि 21 सितंबर को पूर्वाह्न 12:16 बजे से शुरू होकर 22 सितंबर को पूर्वाह्न 1:23 बजे तक रहेगी, लेकिन उदय तिथि के अनुसार पूजा-पाठ 21 सितंबर को ही किया जाएगा। यह दिन महालय अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है, जो नवरात्रि की शुरुआत का संकेत देता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस दिन किए गए उपाय पितृ दोष को दूर करते हैं और वंशजों को सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं।

सर्व पितृ अमावस्या का महत्व असीम है। मान्यता है कि इस दिन पितर धरती पर पधारते हैं और अपने वंशजों से तर्पण की अपेक्षा रखते हैं। यदि किसी पूर्वज की मृत्यु तिथि अज्ञात हो या पितृ पक्ष के दौरान श्राद्ध न किया जा सका हो, तो यह दिन सभी पितरों के लिए श्राद्ध करने का अंतिम अवसर होता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस दिन की पूजा से पितरों को मोक्ष प्राप्त होता है, और परिवार में आने वाली बाधाएं दूर हो जाती हैं। यदि पितर असंतुष्ट रहें, तो धन हानि, संतान संबंधी समस्या या जीवन में असफलताएं हो सकती हैं। इसलिए, इस दिन ब्राह्मणों को दान देना, तिल, जल और अन्न से तर्पण करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। पितृ पक्ष 7 सितंबर से शुरू होकर 21 सितंबर को समाप्त होगा, और इस दौरान गज छाया योग का निर्माण भी होगा, जो श्राद्ध के लिए शुभ है।

सर्व पितृ अमावस्या पर पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए कुछ सरल लेकिन प्रभावी उपाय अपनाए जा सकते हैं।

सबसे पहले, सुबह स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूर्व दिशा की ओर मुख करके पितरों का स्मरण करें।

तर्पण विधि: एक तांबे या चांदी के लोटे में जल, काले तिल, जौ और कुशा घास मिलाकर पूर्वजों के नाम से तर्पण दें। यदि संभव हो, तो गंगा या किसी पवित्र नदी में जाकर यह करें, अन्यथा घर पर ही ब्राह्मण की उपस्थिति में संपन्न करें।

पिंडदान: चावल, दूध और गुड़ से बने पिंड बनाकर उन्हें तर्पण दें।

दान-पुण्य: पीले वस्त्र पहनकर ब्राह्मणों को भोजन, दान और वस्त्र दान करें।

विशेष मंत्र जाप: ‘ओम पितृभ्यो नमः’ या ‘ओम पितृ देवताभ्यो नमः’ का 108 बार जाप करें।

काले तिल का दान: घर के बाहर काले तिल बहते जल में प्रवाहित करें, इससे पितृ दोष निवारण होता है।

गाय को भोजन: एक गाय को चना या गुड़ खिलाएं, क्योंकि गाय पितरों का प्रतीक मानी जाती है। यदि कोई सदस्य अकाल मृत्यु को प्राप्त हुआ हो, तो उसके लिए विशेष तर्पण करें। इन उपायों को कुतुब मुहूर्त या रोहिणा मुहूर्त में करने से अधिक फल मिलता है।

ज्योतिषियों का सुझाव है कि इस दिन मांसाहार, मदिरा और तामसिक भोजन से पूर्णतः परहेज करें। घर में साफ-सफाई रखें और नकारात्मक विचारों से दूर रहें। यदि संभव न हो तो त्रिम्बकेश्वर, प्रयागराज या सिद्धपुर जैसे तीर्थ स्थलों पर जाकर पूजा करें। सर्व पितृ अमावस्या पर ये उपाय न केवल पितरों को प्रसन्न करते हैं, बल्कि परिवार को धन, स्वास्थ्य और संतान सुख प्रदान करते हैं।

विशेषज्ञ कहते हैं कि हृदय से किया गया तर्पण सबसे प्रभावी होता है। इस अवसर पर देशभर के मंदिरों में विशेष पूजा का आयोजन हो रहा है, और लाखों भक्त पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त कर रहे हैं। पितृ पक्ष का समापन आशीर्वादों की वर्षा के साथ हो, यही सभी की कामना है।

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